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खस्ताहाल पाकिस्तानः तो क्या पनीर खाना छोड़ देंगे लोग

Mon, 10 Sep 2018 04:32 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 10 Sep 2018 04:32 PM IST
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pakistan to ban cheese, smartphone and fruits to tackle economic crisis

पाकिस्तान की आर्थिक हालत काफी खस्ता हो चुकी है। देश को इस संकट से उबारने के लिए इमरान खान सरकार को कई तरह के सुझाव मिल रहे हैं, जिनमें पनीर (cheese) जैसे खाने के सामान पर भी बैन लग सकता है। पड़ोसी मुल्क में कई आर्थिक सलाहकारों ने इस तरह के कई प्रस्ताव दिए हैं। 

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आयतित सामानों पर लगेगा बैन

पाकिस्तान में विदेश से भारी मात्रा में पनीर, कारें और स्मार्टफोन का आयात होता है। इन वस्तुओं को खरीदने के लिए सरकार को काफी बड़ी संख्या में डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। वहीं निर्यात होने वाली वस्तुओं की संख्या काफी कम हो गई है। सरकार द्वारा हाल ही में गठित की गई इकोनॉमिक एडवायजरी काउंसिल ने सुझाव देते हुए कहा है कि वो आयतित वस्तुओं पर बैन लगा दे, जिससे आईएमएफ से 15वीं बार भीख न मांगनी पड़े। 
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तो इन पर लग सकता है बैन

सरकार को सुझाव दिए गए हैं उनमें एक साल के लिए पनीर, गाड़ियां, स्मार्टफोन और फलों के आयात पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। इस कदम से ही सरकार को केवल एक साल में 4-5 बिलियन डॉलर की बचत होगी। मुल्क का चालू खाता घाटा 30 जून तक पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण 43 फीसदी बढ़कर 18 बिलियन डॉलर के पार चला गया है। पाकिस्तान अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। पाक का स्टेट बैंक दिसंबर से लेकर के अब तक चार बार रुपये का अवमूल्यन कर चुका है। वहीं ब्याज दरों में तीन बार इजाफा हो चुका है।
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कर लेंगे 9 अरब डॉलर का जुगाड़

पाक वित्तमंत्री असद उमर ने माना कि विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रहे पाक को चालू खाता घाटे से निपटने के लिए नौ अरब डॉलर की जरूरत है लेकिन फिलहाल हमने आईएमएफ जाने का कोई फैसला नहीं किया है। पीटीआई नेतृत्व वाली नई इमरान सरकार के सामने देश की अर्थव्यवस्था में सुधार लाने की चुनौती है क्योंकि सत्ता में आई नई सरकार को तुरंत प्रभाव से 12 अरब डॉलर की जरूरत है।


पाकिस्तान संसद के उच्च सदन में सवालों का जवाब देते हुए उमर ने कहा, ‘बजट के मुताबिक हमें नौ अरब डॉलर की जरूरत है। लेकिन हम इसकी जड़ में जाकर समस्या का समाधान करना चाहते हैं।’ उन्होंने भरोसा जताया कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए जो उपाय किए जा रहे हैं उनका परिणाम दो से तीन साल में मिलने लगेगा। इस बीच देश उधार लेगा। 

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