कर्ज के बोझ तले डूब जाएगा पाकिस्तान, हालात हो सकते हैं और खराबः मूडीज
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पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान कर्ज के बोझ में इस तरह से डूबा हुआ है कि आने वाले दिनों में इसकी हालत और खराब हो सकती है। अमेरिका और चीन के बीच अगर व्यापार युद्ध से हालत बिगड़ते हैं, तो फिर इसका सबसे ज्यादा असर इस देश में देखने को मिला है। वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने इस बात की संभावना व्यक्त की है।
नहीं चुका पाएगा कर्ज
पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार मूडीज ने पाकिस्तान को उन देशों की लिस्ट में शामिल किया है, जिनकी कर्ज चुकाने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म हो रही है। वहीं बढ़ते कर्ज के चलते देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।
महंगाई सबसे ज्यादा
पाकिस्तान में महंगाई इस वक्त सबसे चरम पर है। यहां पर दूध की कीमत भी पेट्रोल से ज्यादा है। कर्ज के बोझ से कंगाली की दहलीज पर खड़े पाकिस्तान के लिए महंगाई, बेरोजगारी, बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी चीजों की बहुत दिक्कत है। पड़ोसी मुल्क के लोग दूध के लिए भी तरस रहे हैं। मुहर्रम के दिन पाकिस्तान में दूध का दाम पेट्रोल से भी ज्यादा था। कराची और सिंध में एक लीटर दूध 140 रुपये तक बिका।
खुदरा महंगाई नौ फीसदी के करीब
मई 2019 में पाकिस्तान में खुदरा महंगाई नौ फीसदी के करीब थी। इसके अभी और बढ़ने की आशंका है। लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था से जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ गई है। ना सिर्फ दूध, बल्कि आलू और टमाटर जैसी अन्य कई सब्जियों के दामों ने आसमान छू लिया है। सच तो यह है कि पाक सरकार अवाम को आर्थिक सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाई। आज भी चार करोड़ से अधिक लोग बेरोजगार हैं। इस बेकारी के कारण युवा दहशतगर्दी का दामन थाम रहे हैं।
इन देशों में दिखी सबसे ज्यादा गिरावट
मूडीज का कहना है कि कर्ज चुकाने की क्षमता के मामले में पाकिस्तान, श्रीलंका, मिस्र, अंगोला और घाना जैसे देशों के राजस्व में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है क्योंकि, 2019-20 के पूर्वानुमान के मुकाबले यह ब्याज भुगतान की वजह से राजस्व को संभालने में नाकाम रहे हैं।
कितना पहुंचा पाकिस्तान का कर्ज
पाकिस्तान का कर्ज 6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। मूडीज के 39 महीने के करार के अलावा दूसरे देशों से लिए कर्ज और उसके ब्याज के भुगतान की वजह से फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व और चालू खाता घाटे में भी गिरावट आई है। बढ़ते कर्ज के कारण देश की वित्तीय स्थिति और कमजोर होगी। कर्ज वहन करने की उसकी क्षमता पर भी असर पड़ेगा।