Report: देश में में तेजी से बढ़े अमीर, 3.79 लाख के पास 129 लाख करोड़ की संपत्ति; जानें आंकड़े
वैश्विक स्तर पर एचएनआई की वृद्धि अति अमीरों की संख्या में वृद्धि के कारण हुई। मजबूत शेयर बाजारों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आशावाद से पोर्टफोलियो रिटर्न को बढ़ावा मिलने से अति अमीरों की संख्या 6.2 फीसदी बढ़ गई।
विस्तार
जीडीपी समेत कई प्रमुख क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे भारत ने एक और उपलब्धि हासिल की है। प्रमुख देशों की तुलना में भारत में करोड़पतियों की संख्या 2024 में सबसे ज्यादा 8.8 फीसदी बढ़कर 3,78,810 पहुंच गई। इनके पास 129 लाख करोड़ रुपये (1.5 लाख करोड़ डॉलर) की दौलत है। वैश्विक स्तर पर करोड़पतियों की संख्या 2.6 फीसदी बढ़ी है।
कैपजेमिनी की वर्ल्ड वेल्थ रिपोर्ट-2025 के मुताबिक, 2024 अंत तक भारत में नेक्स्ट डोर वाले 3,33,340 करोड़पति थे। इनकी संपत्ति 628.93 अरब डॉलर थी। नेक्स्ट डोर का मतलब उन अमीरों से है, जिन्होंने खुद अपनी पहचान या संपत्ति बनाई है। ये वे लोग हैं, जो सामान्य जीवन जीते हैं और कोई दिखावा नहीं करते हैं। देश में 4,290 अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (एचएनडब्ल्यूआई) यानी बहुत ज्यादा अमीर हैं। इनकी संपत्ति 534.77 अरब डॉलर रही। देश के 85 फीसदी अगली पीढ़ी के एचएनडब्ल्यूआई एक-दो वर्षों में माता-पिता की वेल्थ मैनेजमेंट फर्म को छोड़ने की योजना बना रहे हैं। वैश्विक स्तर पर 81 फीसदी ऐसा करना चाहते हैं।
एशिया में भारत, चीन व जापान आगे
| देश | करोड़पति | रकम |
| भारत | 3.79 लाख | 1.5 |
| जापान | 39.89 लाख | 9.9 |
| चीन | 15.02 लाख | 7.9 |
(रकम लाख करोड़ डॉलर में)
संख्या के लिहाज से अमेरिका शीर्ष पर
संख्या के लिहाज से अमेरिका में बीते साल 5.62 लाख करोड़पति बढ़े। इससे कुल करोड़पतियों की संख्या 7.6 फीसदी बढ़कर 79 लाख पहुंच गई। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत और जापान सबसे आगे रहे। दोनों देशों में क्रमशः 20,000 और 2.10 लाख करोड़पति बढ़े। चीन में एचएनडब्ल्यूआई की संख्या एक फीसदी घट गई।
10%से अधिक बढ़ाएंगे संपत्ति
98% भारतीय एचएनडब्ल्यूआई 2030 तक अपनी ऑफशोर संपत्तियों को 10 फीसदी से अधिक बढ़ाना चाहते हैं। ऑफशोर निवेश पर ध्यान बेहतर निवेश विकल्पों (55%), धन प्रबंधन सेवाओं (65%), बाजार संपर्क (54%), बेहतर कर विनियमन व आर्थिक-राजनीतिक स्थिरता (49%) के कारण दिया जाता है।
ऐसे बढ़ी और घटी अमीरों की संख्या
- यूरोप- आर्थिक स्थिरता के कारण यूरोप की एचएनडब्ल्यूआई की संख्या 2.1 फीसदी घटी है। ब्रिटेन, फ्रांस व जर्मनी में क्रमशः 14,000, 21,000 एवं 41,000 करोड़पति कम हुए हैं। इसके विपरीत, यूरोप की अत्यधिक अमीरों की संख्या 3.5 फीसदी बढ़ी है।
- एशिया-प्रशांत- एचएनडब्ल्यूआई आबादी में 2.7% की वृद्धि हुई। पूरे क्षेत्र में इसमें उल्लेखनीय भिन्नता देखी गई।
- लैटिन अमेरिका- मुद्रा अवमूल्यन और राजकोषीय अस्थिरता के कारण करोड़पतियों की आबादी में 8.5 फीसदी की गिरावट आई। ब्राजील और मेक्सिको में सबसे ज्यादा 13.5-13.5 फीसदी की कमी रही।
- मध्य पूर्व- कच्चे तेल की लगातार घटती कीमतों के कारण करोड़पतियों की संख्या में 2.1 फीसदी की कमी आई।
मजबूत शेयर बाजारों और एआई आशावाद का असर
वैश्विक स्तर पर एचएनआई की वृद्धि अति अमीरों की संख्या में वृद्धि के कारण हुई। मजबूत शेयर बाजारों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आशावाद से पोर्टफोलियो रिटर्न को बढ़ावा मिलने से अति अमीरों की संख्या 6.2 फीसदी बढ़ गई। प्राइवेट इक्विटी और क्रिप्टोकरेंसी जैसे वैकल्पिक निवेश अब एचएनडब्ल्यूआई होल्डिंग्स में प्रमुख स्थान बना रहे हैं, जो उनके पोर्टफोलियो का 15 फीसदी हिस्सा है।