FMCG: एफएमसीजी उद्योग में नौ% तक वृद्धि, नील्सनआईक्यू की रिपोर्ट- उच्च महंगाई का दबाव घटने से खपत में इजाफा
एनआईक्यू इंडिया के प्रबंध निदेशक सतीश पिल्लई ने कहा, एफएमसीजी उद्योग में पिछली तिमाही से मूल्य के लिहाज से वृद्धि कम हुई है। उपभोक्ताओं की खर्च करने की शक्ति बढ़ी है और यह विशेष रूप से ग्रामीण बाजारों में स्पष्ट है।
विस्तार
देश में रोजमर्रा के उपभोग का सामान (एफएमसीजी) बनाने वाले उद्योग ने चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में मात्रा के लिहाज से 8.6 फीसदी वृद्धि दर्ज की। महंगाई का दबाव कम होने से खपत बढ़ी, जिससे उद्योग को सहारा मिला।
विश्लेषण फर्म नील्सनआईक्यू (एनआईक्यू) की रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतों में सुधार होने से एफएमसीजी उद्योग में सितंबर तिमाही में मूल्य के लिहाज से 9 फीसदी की वृद्धि रही। यह आंकड़ा पिछली तिमाहियों से कम है। महंगाई जब अपने रिकॉर्ड उच्चस्तर पर थी तो भी पिछली 5-6 तिमाहियों में एफएमसीजी उद्योग ने मूल्य के लिहाज से वृद्धि दर्ज की थी।
ग्रामीण बाजार में सुधार
रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण बाजार में सुधार के संकेत दिख रहे हैं, जहां पिछली कई तिमाहियों से खपत के मोर्चे पर मंदी देखने को मिल रही थी। शहरी बाजारों में वृद्धि दर स्थिर बनी हुई है। ग्रामीण बाजार में छोटे आकार के पैक की खपत अधिक है। शहरी बाजारों में औसत पैक आकार बेहतर हो गया है, जहां बड़े पैक को प्राथमिकता दी जा रही है।
उपभोक्ताओं में खर्च करने की शक्ति बढ़ी
एनआईक्यू इंडिया के प्रबंध निदेशक सतीश पिल्लई ने कहा, एफएमसीजी उद्योग में पिछली तिमाही से मूल्य के लिहाज से वृद्धि कम हुई है। उपभोक्ताओं की खर्च करने की शक्ति बढ़ी है और यह विशेष रूप से ग्रामीण बाजारों में स्पष्ट है। कुल मिलाकर, महंगाई कम होने, बेरोजगारी के आंकड़ों में हालिया गिरावट और एलपीजी की कीमतों में नरमी जैसे कारकों ने उपभोक्ताओं में खर्च करने की इच्छा बढ़ाई है।
खाद्य और गैर-खाद्य दोनों क्षेत्रों का योगदान
रिपोर्ट के मुताबिक, एफएमसीजी उद्योग में खपत बढ़ाने में खाद्य और गैर-खाद्य दोनों क्षेत्रों का योगदान है। इसमें भी खाद्य क्षेत्र का योगदान अधिक है। सितंबर तिमाही में खाद्य क्षेत्र की वृद्धि दर 8.7 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई, जो एक साल पहले की समान अवधि में 8.5 फीसदी रही थी। गैर-खाद्य क्षेत्र की वृद्धि दर इस अवधि में 3.3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 8.7 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। एक साल पहले की समान अवधि में यह दर 5.4 फीसदी रही थी।