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New Labor Codes: नई श्रम संहिता से बदलेगी नौकरी की तस्वीर, 60% कामगारों को कार्य स्थितियां सुधरने की उम्मीद
Tue, 10 Feb 2026 05:23 AM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Tue, 10 Feb 2026 05:23 AM IST
सार
नई श्रम संहिता लागू होने से पहले किए गए सर्वे में 60 फीसदी से ज्यादा कामगारों ने कार्य स्थितियां बेहतर होने की उम्मीद जताई है। श्रमिकों को वेतन पारदर्शिता, समय पर भुगतान और सामाजिक सुरक्षा बढ़ने का भरोसा है। गिग और प्रवासी कर्मचारियों को भी लाभ मिलने की बात कही गई है।
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नई श्रम संहिता।
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
देश में नई श्रम संहिता लागू होने से पहले ही कामगारों और नियोक्ताओं के बीच उम्मीद का माहौल दिख रहा है। ज्यादातर श्रमिकों को भरोसा है कि नए श्रम कानून लागू होने के बाद कार्यस्थल की स्थितियां सुधरेंगी। काम के घंटे तय होंगे, वेतन भुगतान में पारदर्शिता आएगी और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा। एक बड़े सर्वे में यह दावा किया गया है कि श्रम सुधारों को लेकर जमीनी स्तर पर सकारात्मक सोच बन रही है।
नोएडा स्थित वीवी गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान ने श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच यह सर्वे किया। सर्वे के अनुसार करीब 60 फीसदी श्रमिकों का मानना है कि नई श्रम संहिता से काम करने की स्थितियां बेहतर होंगी। 63 फीसदी कामगारों को उम्मीद है कि काम के घंटों के नियमन में सुधार आएगा। यह संस्थान श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत काम करता है। सर्वे में 5,720 श्रमिकों और 715 नियोक्ताओं से बातचीत की गई।
वेतन पारदर्शिता और समय पर भुगतान की उम्मीद
सर्वे में 64 फीसदी श्रमिकों ने कहा कि नई व्यवस्था से वेतन भुगतान में पारदर्शिता बढ़ेगी। 54 फीसदी कामगारों को भरोसा है कि सैलरी समय पर मिलेगी। आय सुरक्षा को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। 68 फीसदी श्रमिकों ने ई-श्रम और कल्याण बोर्ड के जरिए सुविधाओं तक आसान पहुंच की उम्मीद जताई है। बड़ी संख्या में श्रमिकों का मानना है कि डिजिटल सिस्टम से शिकायत और पंजीकरण की प्रक्रिया आसान होगी।
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गिग, प्रवासी और अनुबंध कर्मचारियों को फायदा
करीब 63 फीसदी श्रमिकों का मानना है कि नए श्रम कानूनों से अनुबंध, प्रवासी और गिग यानी अस्थायी काम करने वाले कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लेना आसान होगा। अभी तक इन वर्गों को योजनाओं का पूरा फायदा नहीं मिल पाता था। नई श्रम संहिता में इनके लिए अलग प्रावधान जोड़े गए हैं। इससे असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सुरक्षा कवच मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
ये भी पढ़ें- छोटे कारोबारियों को अब बिना गारंटी 20 लाख रुपये तक का लोन, 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे नए नियम
नियोक्ताओं ने भी सुधारों को बताया जरूरी
सर्वे में शामिल 76 फीसदी नियोक्ताओं ने कहा कि नए श्रम कानूनों से कार्यबल में लचीलापन आएगा, जो कारोबार के लिए जरूरी है। 64 फीसदी नियोक्ताओं का मानना है कि निश्चित अवधि का रोजगार मॉडल उनके बिजनेस के लिए उपयुक्त रहेगा। 73 फीसदी नियोक्ताओं ने कहा कि लंबे समय में नियमों का अनुपालन आसान होगा और कानूनी जटिलताएं कम होंगी। इससे उद्योग जगत को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पर जोर
करीब 66 फीसदी कामगारों ने माना कि नए नियमों से महिला कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। सुरक्षा और परिवहन से जुड़े अनिवार्य प्रावधानों से कार्यस्थल ज्यादा सुरक्षित होंगे। 60 फीसदी श्रमिकों ने कहा कि छुट्टी से जुड़े नियम भी पहले से बेहतर होंगे। इससे काम और निजी जीवन के संतुलन में मदद मिलेगी। महिला भागीदारी बढ़ाने के लक्ष्य को भी इससे बल मिलने की बात कही गई है।
एक अप्रैल से लागू करने की तैयारी
केंद्र सरकार चारों श्रम कानून पहले ही अधिसूचित कर चुकी है। नियमों के मसौदे पर सुझाव भी मांगे जा चुके हैं। सरकार की योजना एक अप्रैल 2026 से इन्हें पूरी तरह लागू करने की है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि इन सुधारों का लक्ष्य सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक काम और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
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नोएडा स्थित वीवी गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान ने श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच यह सर्वे किया। सर्वे के अनुसार करीब 60 फीसदी श्रमिकों का मानना है कि नई श्रम संहिता से काम करने की स्थितियां बेहतर होंगी। 63 फीसदी कामगारों को उम्मीद है कि काम के घंटों के नियमन में सुधार आएगा। यह संस्थान श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत काम करता है। सर्वे में 5,720 श्रमिकों और 715 नियोक्ताओं से बातचीत की गई।
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वेतन पारदर्शिता और समय पर भुगतान की उम्मीद
सर्वे में 64 फीसदी श्रमिकों ने कहा कि नई व्यवस्था से वेतन भुगतान में पारदर्शिता बढ़ेगी। 54 फीसदी कामगारों को भरोसा है कि सैलरी समय पर मिलेगी। आय सुरक्षा को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। 68 फीसदी श्रमिकों ने ई-श्रम और कल्याण बोर्ड के जरिए सुविधाओं तक आसान पहुंच की उम्मीद जताई है। बड़ी संख्या में श्रमिकों का मानना है कि डिजिटल सिस्टम से शिकायत और पंजीकरण की प्रक्रिया आसान होगी।
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गिग, प्रवासी और अनुबंध कर्मचारियों को फायदा
करीब 63 फीसदी श्रमिकों का मानना है कि नए श्रम कानूनों से अनुबंध, प्रवासी और गिग यानी अस्थायी काम करने वाले कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लेना आसान होगा। अभी तक इन वर्गों को योजनाओं का पूरा फायदा नहीं मिल पाता था। नई श्रम संहिता में इनके लिए अलग प्रावधान जोड़े गए हैं। इससे असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सुरक्षा कवच मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
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नियोक्ताओं ने भी सुधारों को बताया जरूरी
सर्वे में शामिल 76 फीसदी नियोक्ताओं ने कहा कि नए श्रम कानूनों से कार्यबल में लचीलापन आएगा, जो कारोबार के लिए जरूरी है। 64 फीसदी नियोक्ताओं का मानना है कि निश्चित अवधि का रोजगार मॉडल उनके बिजनेस के लिए उपयुक्त रहेगा। 73 फीसदी नियोक्ताओं ने कहा कि लंबे समय में नियमों का अनुपालन आसान होगा और कानूनी जटिलताएं कम होंगी। इससे उद्योग जगत को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पर जोर
करीब 66 फीसदी कामगारों ने माना कि नए नियमों से महिला कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। सुरक्षा और परिवहन से जुड़े अनिवार्य प्रावधानों से कार्यस्थल ज्यादा सुरक्षित होंगे। 60 फीसदी श्रमिकों ने कहा कि छुट्टी से जुड़े नियम भी पहले से बेहतर होंगे। इससे काम और निजी जीवन के संतुलन में मदद मिलेगी। महिला भागीदारी बढ़ाने के लक्ष्य को भी इससे बल मिलने की बात कही गई है।
एक अप्रैल से लागू करने की तैयारी
केंद्र सरकार चारों श्रम कानून पहले ही अधिसूचित कर चुकी है। नियमों के मसौदे पर सुझाव भी मांगे जा चुके हैं। सरकार की योजना एक अप्रैल 2026 से इन्हें पूरी तरह लागू करने की है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि इन सुधारों का लक्ष्य सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक काम और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
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