Zomato Ad: 'कचरा' विज्ञापन को लेकर नहीं कम हो रही जोमैटो की मुश्किलें, अब एनसीएससी ने जारी किया नोटिस
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पांच जून को एक विज्ञापन प्रसारित किया गया था, जिसमें कचरे के लिए हिंदी शब्द 'कचरा' के साथ 'कचरा' के चरित्र के बीच एक कड़ी दिखाई गई थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा बढ़ता गया और विज्ञापन के जातिवादी होने के कारण इसे सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा।
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रेस्तरां एग्रीगेटर जोमैटो के विवादास्पद 'कचरा' विज्ञापन को लेकर उसकी मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। विज्ञापन वापस लेने के बाद भी अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने रेस्तरां एग्रीगेटर जोमैटो को नोटिस जारी किया है और से विज्ञापन और उसके विवरण पर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही एनसीएससी ने दिल्ली पुलिस आयुक्त और यूट्यूब के रेसीडेंस ग्रीवान्स ऑफिसर से भी मामले की जांच करने को कहा है और पोस्ट या ईमेल के माध्यम से तुरंत की गई कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
यह विज्ञापन 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रसारित किया गया था। यह विज्ञापन हिंदी शब्द 'कचरा' के साथ कचरा के चरित्र के बीच संबंध स्थापित करता है। लगभग दो मिनट के विज्ञापन में लखिया को एक लैंप, कागज, पेपरवेट, वाटरिंग कैन और विभिन्न प्रकार के जैकेट के रूप में दर्शाया गया है। साथ में विवरण दिया गया है कि प्रत्येक वस्तु को बनाने के लिए कितने पुनर्नवीनीकरण 'कचरे' का उपयोग किया गया था।
आयोग ने दी व्यक्तिगत पेशी के लिए समन जारी करने की चेतावनी
एनसीएससी के अध्यक्ष विजय सांपला ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, यदि कार्रवाई की गई रिपोर्ट निर्धारित समय के भीतर पेश नहीं की गई तो आयोग संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत कानूनी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है और व्यक्तिगत पेशी के लिए समन जारी कर सकता है।
जोमैटो ने हटाया विज्ञापन, मांगी माफी
जातिवाद का आरोप लगने के बाद जोमैटो ने विज्ञापन को हटा दिया था। कंपनी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से माफीनामा जारी करते हुए कहा, उसका इरादा सिर्फ प्लास्टिक कचरे की क्षमता और रीसाइक्लिंग के लाभों के बारे में जागरूकता फैलाना था।