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नीति आयोग: सीईओ अमिताभ कांत ने प्राकृतिक खेती पर दिया जोर, बोले- यह आज के समय की जरूरत
Mon, 25 Apr 2022 03:03 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Mon, 25 Apr 2022 03:03 PM IST
सार
Natural Farming Need Of The Hour: नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने सोमवार को प्राकृतिक खेती पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमें नए वैज्ञानिक तरीकों की पहचान कर यह सुनिश्चित करना होगा कि किसान इससे सीधे कैसे लाभान्वित हो सकें और उनकी आय में वृद्धि कैसे हो।
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amitabh kant
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने सोमवार को प्राकृतिक खेती पर जोर देते हुए कहा कि अब यह समय की जरूरत बन गई है। उन्होंने कहा कि रसायनों और उर्वरकों के उपयोग के कारण खाद्यान्न उत्पादन की लागत में जोरदार इजाफा हुआ है।
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वैज्ञानिक तरीकों की पहचान जरूरी
अमिताभ कांत ने नीति आयोग की तरफ से नवप्रवर्तन कृषि पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अब गेहूं और चावल का निर्यातक बन चुका है। उन्होंने आगे कहा कि हमें इस समय इसकी जरूरत है और यह महत्वपूर्ण है कि हम नए वैज्ञानिक तरीकों की पहचान कर यह सुनिश्चित कर सकें कि किसान इससे सीधे कैसे लाभान्वित हो सकें और उनकी आय में वृद्धि कैसे हो। इस कार्यक्रम के दौरान नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए कई सारी प्रणालियां मौजूद हैं, जिन्हें अपनाया जा सकता है।
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उवर्रकों के उपयोग ने बढ़ाई लागत
कांत ने आगे संबोधित करते हुए कहा कि लगातार उर्वरकों और रसायनों के बढ़ते उपयोग के कारण खाद्यान्न उत्पादन की लागत में इजाफा हुआ है। इसके साथ ही सब्जियां उत्पादित करने की लागत भी बढ़ गई है। इसका असर इनके भाव में महंगाई के तौर पर देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती रसायन मुक्त कृषि प्रणाली है। से कृषि पारिस्थितिकी पर आधारित सिस्टम के तौर पर देखा जाता है। इलिए हमें प्रत्येक तरीके के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को समझना होगा।
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