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MP Budget 25-26: GYAN के सहारे 250 लाख करोड़ की जीडीपी बनाना लक्ष्य, जानें कहां से आएगा पैसा और कहां होगा खर्च

Wed, 12 Mar 2025 04:06 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 12 Mar 2025 04:06 PM IST
सार

MP Budget 25-26: मध्य प्रदेश में वित्त मंत्रालय संभाल रहे उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। बजट 2025-26 पिछले वर्ष की तुलना में कितना बड़ा है, कितना पैसा कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है, कौन सी नई योजनाओं की शुरुआत हो रही है और किस योजना में कितनी राशि खर्च हो रही है? आइए जानते हैं बजट का पूरा सार।

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MP Budget 25-26: Goal to Achieve ₹250 Lakh Crore GDP with GYAN, Know the Revenue Sources and Expenditure Plans
मध्य प्रदेश बजट 2025-26 - फोटो : PTI

विस्तार

मध्य प्रदेश में वित्त मंत्रालय संभाल रहे उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। विधानसभा में अपने बजट भाषण में देवड़ा ने 'ज्ञान' की राह चलने और 2047 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 250 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचाने का खांका साझा किया। एमपी के 2025-2026 के बजट में जनता के लिए राहत की बात है कि देवड़ा के बजट भाषण में किसी नए कर का एलान नहीं किया है और न ही किसी कर की दर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। मध्य प्रदेश विधान सभा में पेश किया गया बजट 2025-26 पिछले वर्ष की तुलना में कितना बड़ा है, कितना पैसा कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है, कौन सी नई योजनाओं की शुरुआत हो रही है और किस योजना में कितनी राशि खर्च हो रही है? आइए जानते हैं बजट का पूरा सार।

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GYAN की सीढ़ी चढ़ 250 लाख करोड़ रुपये की इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य 

मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण की शुरुआत कविता से की। उन्होंने कहा, "यही जुनून, यही एक ख्वाब मेरा है, वहां चिराग जला दूं, जहां अंधेरा है...जनता और जनप्रतिनिधियों की बेशुमार फरमाइशें हैं, कर सकें हम सब पूरी, ये हमारी कोशिशें हैं।"  वित्त मंत्री ने बजट में GYAN पर फोकस देने की बात कही। यहां G का मतलब-गरीब कल्याण, Y-युवा शक्ति, A-अन्नदाता और N- नारी शक्ति है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा, "सरकार का फोकस गरीबों के कल्याण के लिए अंत्योदय की अवधार को सकार करने पर है। आगे उन्होंने बताया कि युवाओं में कौशल का विकास और रोजगारन्मुखी प्रशिक्षण के सरकार प्रतिबद्ध है। देवड़ा ने बजट भाषण में अन्नदाताओं की आय में वृद्धि और नारी शक्ति को सशक्त बनाने की भी बात कही। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में एलान किया कि हमने GYAN को प्राथमिकता देकर 2047 तक प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद को 250 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

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खर्चे से ज्यादा आमदनी, 618 करोड़ रुपये के फायदे का बजट

राज्य सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए कुल ₹4,21,032 करोड़ के बजट का प्रावधान किया है, जो पिछले साल की तुलना में 15% अधिक है। इस साल सरकार को ₹618 करोड़ का राजस्व सरप्लस रहने की उम्मीद है, जिसका मतलब है कि उसकी कमाई उसके खर्च से ज्यादा होगी। सरकार को कुल 2,90,879 करोड़ रुपये की आमदनी होने का अनुमान है। जिसमें राज्य को अपने कर स्रोतों से 1,09,157 करोड़ रुपये, केंद्र सरकार से करों के हिस्से के रुपय में 1,11,662 करोड़ रुपये, अन्य गैर-कर मदों से 21,399 करोड़ रुपये और केंद्र से मिलने वाली सहायता के रूप में 48,661 करोड़ रुपये राजस्व के रूप में मिलने का अनुमान है।


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टैक्स से आमदनी 7% बढ़ेगी, विकास पर ज्यादा जोर देने का वादा

इस साल राज्य को अपने करों से 7% राजस्व बढ़ने का अनुमान है और पूंजीगत खर्च 31% बढ़ने की बात कही है। इसका मतलब है कि सरकार आने वाले वित्त वर्ष में विकास कार्यों में अधिक निवेश करने वाली है। अनुसूचित जनजाति के लिए ₹47,296 करोड़ (23.5%) और अनुसूचित जाति के लिए ₹32,633 करोड़ (16.2%) का बजट रखा गया है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) ₹16,94,477 करोड़ रहने का अनुमान है, जिसमें से पूंजीगत खर्च 5.02% होगा। वहीं, सरकार का राजकोषीय घाटा 4.66% और ब्याज भुगतान कुल राजस्व का 9.84% रहेगा। इस बजट से बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण पर ज्यादा खर्च किए जाने की उम्मीद है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

सरकारी खर्चों में पारदर्शिता लाने के लिए वित्त मंत्री ने क्या एलान किए?

वित्त मंत्री ने बताया कि बजट में इस साल साल शून्य आधारित बजटिंग (Zero-Based Budgeting) को पहली बार अमल में लाया गया है। जिससे 15,000 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। बजट में गैर-जरूरी खर्चों को कम करने के लिए करीब 2,000 बजट लाइनें हटाई गईं। वित्त मंत्री ने बताया कि डेटा एनालिटिक्स की मदद से सरकार ने संसाधनों के सही आवंटन, खर्च की निगरानी और वित्तीय आवश्यकताओं का सही अनुमान लगाने की कोशिश की है। इसके अलावा, SNA-SPARSH प्रणाली लागू की गई है, जिससे सरकारी योजनाओं की निधियों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी। इस कदम से प्रशासन के स्तर पर पारदर्शिता बढ़ेगी। वित्त मंत्री ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों और लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी लागू किया गया है। इससे उनकी पहचान का सत्यापन तेज, सुरक्षित और कागज रहित हो सकेगा। साथ ही, गड़बड़ियों और फिजूलखर्च को रोकने में भी मदद मिलेगी। वहीं, राज्यों को विशेष सहायता योजना (SASCI) के तहत बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार बढ़ाने और राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि ये सभी कदम सरकार के वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने में मदद करेंगे।

सरकार के पास पैसा कहां से आएगा?

सरकार को वर्ष 2025-26 में कुल 3.75 लाख करोड़ रुपये की आमदनी होने का अनुमान है, जो पिछले साल की तुलना में 14% अधिक है। इस आमदनी का प्रमुख हिस्सा राज्य करों (29%) से आएगा, जिसमें एसजीएसटी, वैट, स्टाम्प शुल्क, आबकारी, बिजली शुल्क और परिवहन कर शामिल हैं। इसके अलावा, केंद्र सरकार से मिलने वाला कर हिस्सा (30%) राज्य की आमदनी का सबसे बड़ा स्रोत है। गैर-कर राजस्व (6%), जैसे कि वन और खनिजों से होने वाली कमाई, का भी सरकार की आमदनी में योगदान होगा। केंद्र सरकार से मिलने वाले सहायता अनुदान सरकार की आमदनी में 13% का योगदान देंगे। यह मुख्य रूप से केंद्र की योजनाओं के लिए मिलती है। इसके अलावे 22% राशि पूंजीगत प्राप्तियों के मद से हासिल होगी। इसमें सरकार को बाजार मिलने वाले ऋण और अन्य वित्तीय स्रोत शमिल हैं। सरकार को होने वाली यह आदमनी राज्य के विकास और योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने में मदद करेगी।

सरकार अपनी आमदनी का हर एक रुपया कैसे खर्च करेगी?

सरकार के बजट में हर 1 रुपये में से 17 पैसे पूंजीगत व्यय (विकास कार्यों जैसे सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे) के लिए रखे गए हैं। यह बजट का सबसे बड़ा हिस्सा है। पिछले साल की तुलना में इसमें 31% की बढ़ोतरी हुई है, जिसका मतलब है कि सरकार इस साल विकास कार्यों पर ज्यादा खर्च कर रही है ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।  इसके बाद नगर व ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र को 12-12 पैसे, जबकि शिक्षा क्षेत्र को 11 पैसे मिलेंगे। कृषि और सामान्य सेवाओं पर 9-9 पैसे खर्च होंगे। सामाजिक क्षेत्र के लिए 6 पैसे, ऋण भुगतान, पेंशन और ब्याज भुगतान के लिए 7-7 पैसे, और अन्य सेवाओं के लिए 3 पैसे निर्धारित किए गए हैं। रोजगार क्षेत्र को 1 पैसा और संस्कृति क्षेत्र को 0.4 पैसा मिलेगा। इस बजट में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे राज्य के विकास और लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा।

बजट में किस क्षेत्र पर कितने खर्च का प्रस्ताव?

मध्य प्रदेश सरकार ने बजट 2025-26 में सबसे अधिक 70,515 करोड़ रुपये आधारभूत संरचना के निर्माण के लिए आवंटित किए हैं। इसके बाद नगर व ग्रामीण विकास पर 51,074 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य व महिला-बाल विकास पर 50,333 करोड़ रुपये, और शिक्षा क्षेत्र के लिए 44,826 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कृषि क्षेत्र को 39,207 करोड़ रुपये, सामान्य सेवाओं को 36,118 करोड़ रुपये, और एससी-एसटी व ओबीसी वर्ग के कल्याण के लिए 23,798 करोड़ रुपये मिले हैं। अन्य प्रमुख मदों में ब्याज भुगतान 28,636 करोड़ रुपये, पेंशन 28,961 करोड़ रुपये, और ऋण भुगतान पर 29,980 करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही गई है। अन्य सेवाओं के लिए 11,628 करोड़ रुपये, रोजगार के लिए 4,835 करोड़ रुपये, और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों पर 1,627 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव वित्त मंत्री ने दिया है।

जेंडर बजट के लिए कितने रुपये का प्रस्ताव किया गया?

राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए (जेंडर बजट) कुल ₹1,23,625 करोड़ का बजट आवंटित किया है, जो उनके सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम है। सरकार की जेण्डर बजट नीति यह सुनिश्चित करती है कि योजनाओं और कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी और लाभ स्पष्ट रूप से दिखे। पिछले 6 वर्षों में जेण्डर बजट का आकार दोगुना हो चुका है, जो सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। इस बजट के तहत 31 विभागों में ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम शामिल किए गए हैं, जिनमें या तो 100% बजट महिलाओं और बालिकाओं के लिए है या फिर ऐसी योजनाएँ हैं, जिनमें कम से कम 30% बजट महिलाओं के लिए आवंटित किया गया है। यह बजट महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

मुख्यमंत्री लाड़ली बहन समेत अन्य योजनाओं पर कितना खर्च?

राज्य सरकार ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर बजट आवंटन किया है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना के लिए सबसे अधिक 18,669 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण मिलेगा। जल जीवन मिशन (नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर मिशन) के तहत 17,136 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। अटल कृषि ज्योति योजना के लिए 13,909 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिससे किसानों को रियायती दरों पर बिजली मिलेगी।

बुनियादी सेवाओं के लिए बजट में क्या?

इसके अलावा, स्थानीय निकायों को बुनियादी सेवाओं के लिए 7,624 करोड़ रुपये, अटल गृह ज्योति योजना के तहत 7,132 करोड़ रुपये, और समग्र शिक्षा अभियान के लिए 5,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। किसानों के लिए 5 HP कृषि पंपों और एक बत्ती कनेक्शन हेतु 5,299 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए 5,220 करोड़ रुपये, और सीएम राइज योजना के लिए 4,686 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 4,418 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह बजट शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला कल्याण, कृषि और बुनियादी सेवाओं को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बजट में कुल 23 जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र किया गया है।

मोहन सरकार का विकास के साथ आस्था पर भी जोर

सिंहस्थ महापर्व  के लिए  2 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस राशि से सुनियोजित सुविधाओं का विकास कि जाएगा। इसके अलावे, मध्य प्रदेश सरकार ने आस्था और सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विशेष बजट प्रावधान किए हैं। "श्रीकृष्ण पाथेय" योजना के तहत 10 करोड़ रुपये की राशि भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े तीर्थ स्थलों के विकास, मंदिरों की सुरक्षा और सांस्कृतिक संवर्धन पर खर्च होगी। "अविरल निर्मल नर्मदा" योजना के लिए 25 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसके तहत नर्मदा नदी के दोनों तटों से 10 किमी तक 5600 हेक्टेयर वन क्षेत्र में सघन पौधारोपण किया जाएगा। "गीता भवन" के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें पुस्तकालय, ई-लाइब्रेरी, सांस्कृतिक सभागार और भारतीय संस्कृति पर केंद्रित साहित्य उपलब्ध रहेगा।

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