Tariffs: निर्यात पर नए संकट का साया, अमेरिका के बाद मेक्सिको ने भी भारत पर लगाया 50% टैरिफ; कैसा होगा असर?
मेक्सिको की संसद ने भारत-चीन समेत उन देशों से आने वाले 1,400 से अधिक उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, जिनके साथ उसका कोई मुक्त व्यापार समझौता नहीं है। कपड़े, जूते, फर्नीचर और ऑटो पार्ट्स सहित कई वस्तुओं पर 5% से 50% तक शुल्क लगाया जाएगा। आइए विस्तार से जानते हैं कि भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा।
विस्तार
मेक्सिको की संसद ने चीन और अन्य देशों से आयातिक 1,400 से अधिक उत्पादों पर टैरिफ वृद्धि को मंजूरी दे दी। इन देशों के साथ मेक्सिको के मुक्त व्यापार समझौते नहीं है। राष्ट्रपति क्लॉडियो शिनबॉम की सत्तारूढ़ मोरेना पार्टी ने घेरलू उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ को जरूरी बताया।
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मेक्सिको का कदम अमेरिका को साधने का है
विश्लेषकों का कहना है कि असली मकसद वाशिंगटन के साथ चल रही बातचीत है, जो मेक्सिको का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। शीनबाम ट्रंप प्रशासन द्वारा मेक्सिको के आयात पर लगाए गए शेष शुल्कों से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं।
इन सामानों पर लगेगा 5 से 50 प्रतिशत टैरिफ
इसके तहत कपड़े, जूते, घरेलू उपकरण और फर्नीचर जैसी रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं पर 5 से 50 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया गया है। विशेष रूप से, एल यूनिवर्सल समाचार रिपोर्ट के अनुसार, इस अध्यादेश में ऑटो पार्ट्स, हल्की कारों, कपड़ों, प्लास्टिक, स्टील, घरेलू उपकरणों, खिलौनों, वस्त्रों, फर्नीचर, जूते, चमड़े के सामान, कागज और कार्डबोर्ड, मोटरसाइकिलों, एल्यूमीनियम, ट्रेलरों, कांच और साबुन, इत्र और सौंदर्य प्रसाधनों सहित विभिन्न वस्तुओं के आयात पर शुल्क निर्धारित किए गए हैं।
भारत समेत कई देश होंगे प्रभावित
प्रस्तावित उच्च शुल्कों से प्रभावित होने वाले अन्य देशों में भारत, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। सरकार ने इस वर्ष की शुरुआत में अनुमान लगाया था कि प्रस्तावित शुल्कों से प्रति वर्ष 70 अरब पेसो (3.8 अरब अमेरिकी डॉलर) का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
भारत के ऑटो निर्यात पर सीधा असर
मैक्सिको द्वारा आयातित वाहनों पर टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव का भारत के ऑटो निर्यात पर सीधा प्रभाव पड़ने वाला है। मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम लगभग 1 अरब डॉलर के उन शिपमेंट्स को प्रभावित करेगा, जिन्हें भारत से वोक्सवैगन, हुंडई, निसान और मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां मैक्सिको भेजती हैं।
नए प्रावधानों के तहत कारों पर आयात शुल्क 20% से बढ़कर 50% किया जा रहा है, जिससे भारत के सबसे बड़े वाहन निर्यातकों को भारी झटका लगने की आशंका है। उद्योग जगत के अनुसार, यह वृद्धि लागत बढ़ाएगी और मैक्सिको में भारतीय कारों की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम कर सकती है।
उद्योग संगठन ने भी केंद्र सरकार को लिखे पत्र में चिंता जताते हुए कहा कि प्रस्तावित टैरिफ वृद्धि का भारतीय ऑटोमोबाइल निर्यात पर सीधा असर पड़ेग। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह मैक्सिको सरकार से इस मुद्दे पर बातचीत करे।"
मैक्सिको भारत का दक्षिण अफ्रीका और सऊदी अरब के बाद तीसरा सबसे बड़ा कार निर्यात बाजार है। ऐसे में, बढ़ा हुआ शुल्क भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की निर्यात रणनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
चीन ने इस फैसले का किया विरोध
मैक्सिको द्वारा 2024 में चीन से 130 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद आयात किए जाने के कारण, नए प्रस्तावित टैरिफ का सबसे अधिक प्रभाव चीन पर पड़ने की संभावना है। साथ ही अमेरिका प्रशासन का अनुमान है कि इन प्रस्तावित शुल्कों से 3.8 अरब डॉलर (लगभग ₹33,910 करोड़) का अतिरिक्त राजस्व जुटाया जा सकेगा।इस बीच, चीन ने सभी रूपों में एकतरफा टैरिफ वृद्धि का विरोध किया है। उन्होंने मेक्सिको से आग्रह किया कि वह एकतरफावाद और संरक्षणवाद की अपनी गलत प्रथाओं को जल्द से जल्द सुधारे। सरकारी मीडिया शिन्हुआ ने चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से कहा कि बीजिंग मैक्सिकन उपायों के कार्यान्वयन पर बारीकी से नजर रखेगा और उनके संभावित प्रभाव का आगे मूल्यांकन करेगा।