{"_id":"5d5abe3d8ebc3e89936a72fb","slug":"mat-and-ddt-might-be-removed-as-direct-tax-committiee-gives-suggesation","type":"story","status":"publish","title_hn":"मैट-डीडीटी जैसे बड़े टैक्स हो सकते हैं खत्म, सरकार से की गई सिफारिश","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
मैट-डीडीटी जैसे बड़े टैक्स हो सकते हैं खत्म, सरकार से की गई सिफारिश
Mon, 19 Aug 2019 08:50 PM IST
paliwal पालीवाल
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: paliwal पालीवाल
Updated Mon, 19 Aug 2019 08:50 PM IST
सार
- समिति ने वित्त मंत्री को सौंपी रिपोर्ट, प्रत्यक्ष कर कानूनों में होंगे व्यापक बदलाव
- उद्योग जगत को राहत के लिए इन सिफारिशों को जल्द लागू कर सकती है सरकार
विज्ञापन
tax
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सरकार जल्द ही प्रत्यक्ष कर कानूनों में व्यापक बदलाव करने जा रही है। इसके तहत मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (मैट) और लाभांश वितरण कर (डीडीटी) खत्म किए जाने की संभावना है। सीबीडीटी सदस्य अखिलेश रंजन की अध्यक्षता वाली प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) पर बनी समिति की रिपोर्ट में ऐसी कई सिफारिशें की गई हैं। समिति ने सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। डीटीसी, मौजूदा आयकर कानून की जगह लेगा। सरकार उद्योग जगत को राहत देने के लिए इन सिफारिशों पर ही जल्द फैसला कर सकती है।
विज्ञापन
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अखिलेश रंजन की अध्यक्षता वाले कार्यबल ने रिपोर्ट दे दी है। विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (मैट) और डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) को हटाने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा कमाई पर दोहरे कर का बोझ भी खत्म करने की सिफारिश की गई है। सरकार ने इससे पहले अप्रत्यक्ष कर के तहत जीएसटी में सुधार किया था। अब बारी प्रत्यक्ष कर की है।
विज्ञापन
दरअसल, उद्योग जगत काफी दिनों से मैट और डीडीटी को हटाने की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि जब किसी उद्योग को कुछ समय के लिए करावकास का लाभ दिया जाता है तो ऐसे में उनसे मिनिमम अल्टरनेट टैक्स वसूलना एक तरह से उद्योग जगत पर बोझ बढ़ाना है। इसलिए इसे खत्म करने में ही भलाई है।
विज्ञापन
अभी कंपनियों के मुनाफे पर उद्योगपतियों को 18.5 फीसदी का मैट चुकाना पड़ता है। साथ ही भारतीय कंपनियों को अपने अंशधारकों को लाभांश का भुगतान करने से पहले 15 फीसदी की दर से डीडीटी देना पड़ता है। यह कर कंपनी चुकाती है, जबकि शेयरधारकों को किसी भी वित्त वर्ष में 10 लाख रुपये तक के लाभांश पर कोई कर नहीं देना पड़ता है।