MPC: एमपीसी बैठक पर बाजार की नजर, त्योहारी सीजन से पहले आरबीआई देगा सरप्राइज या रखेगा न्यूट्रल रुख, जानें
आरबीआई की एमपीसी बैठक आज से शुरू हो गई है। बाजार के 60 प्रतिशत विशेषज्ञों को उम्मीद है कि ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती होगी। हालांकि अमर उजाला से जुड़े सूत्रों के अनुसार आरबीआई एमपीसी इस बार नीतिगत ब्याज दरों को वर्तमान स्तर पर ही बरकरार रख सकता है।
विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक ने अगस्त 2025 में हुई पिछले मौद्रिक नीति समिति की बैठक में जून 2025 में 50 आधार अंकों की कटौती के बाद ब्याज दरों को 5.50 प्रतिशत पर बरकरार रखा था। अमर उजाला से जुड़े सूत्रों के अनुसार आरबीआई कम मुद्रास्फीति और विकास के लिए संभावित जोखिमों को देखते हुए रेपो दर 5.50 प्रतिशत में कोई बदलाव नहीं करेगा। वहीं कुछ विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि सितंबर में ब्याज दरों में कटौती करना उचित और तर्कसंगत होगा क्योंकि मुद्रास्फीति नियंत्रण में है, वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी में कटौती के साथ आगामी त्योहारों में मांग और खपत को बढ़ाने के लिए यह सहायक होगी। बाजार के 60 प्रतिशत विशेषज्ञों को उम्मीद है कि ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती होगी। वहीं 40 प्रतिशत बाजार विशेषज्ञ और जानकारों का कहना है कि आरबीआई ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा।
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ब्याज दरों में कटौती होने की संभावना कम
सीएनआई इंफो प्राइवेट लिमिटेड के सीएमडी किशोर ओस्तवाल ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि सरकार ने वस्तु एंव सेवा कर (जीएसटी) में सुधार कर उपभोक्ता सहित बाजार को भी काफी बड़ी राहत दी है। दूसरा नई कर व्यवस्था के तहत 12,00,000 तक की आय को कर मुक्त करना और तीसरा मुद्रास्फीति आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के नीचे बनी हुई है। जिसके बाद रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाएं कुछ कम हो जाती है। मेरा अनुमान है कि आरबीआई अपना रुख न्यूट्रल रखेगी। वे कहते हैं, ब्याज दर आरबीआई का सबसे बड़ा हथियार है, जिसको वह काफी सोच समझकर चलाएगी। वैश्विक व्यापार चुनौतियां जिस प्रकार से देखने को मिल रही हैं, उसे देखते हुए आरबीआई फिलहाल रुख को न्यूट्रल रख सकती है। फिलहाल टैरिफ को साधने के लिए सरकार ने जीएसटी सुधार को आगे बढ़ाया है और इससे काफी राहत मिलेगी। जीएसटी में 5 और 18 प्रतिशत कर स्लैब केवल त्योहारों में ही नहीं भविष्य में देश में खपत और मांग को आगे बढ़ाएगा।
ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद कम
म्यूचुअल फंड कंपनी दी वेल्थ के सीओओ बालाचंद्र जोशी कहते हैं कि हमारा मानना है कि आरबीआई ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, क्योंकि घरेलू बाजार में खपत बढ़ाने और टैरिफ के असर को कम करने के लिए जीएसटी दरों में सुधार किया जा चुका है। इसके अलावा आयकर कटौती और मुद्रास्फीति सहित सरकार ने कई कदम पहले से ही उठा लिए है। जिसके बाद ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हो जाती है। मेरा मानना है कि इस समय आरबीआई बॉन्ड मार्केट के लिए कुछ करेगा, क्योंकि अमेरिका बॉन्ड बाजार में उथल-पुथल है।
आरबीआई गवर्नर सरप्राइज कर सकते हैं
त्योहारी सीजन से पहले इस बैठक से लोगों को राहत की उम्मीद है। कई रिपोर्ट का कहना है कि आरबीआई ब्याज दरों में कमी कर सकता है, जिससे होम लोन, कार लोन की ईएमआई सस्ती हो जाएगी। इससे न केवल पुराने ग्राहकों को लाभ मिलेगा बल्कि नए ग्राहकों को भी कम ब्याज पर लोन मिल पाएगा।
त्योहारी सीजन में खपत बढ़ाने के लिए आरबीआई कर सकती है कटौती
स्मॉलकेस के निवेश प्रबंधक और गोलएफ के निदेशक वरुण जोशी ने कहा कि आरबीआई ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है, क्योंकि जीएसटी कटौती के साथ मुद्रास्फीति काबू में है और त्योहारी सीजन में खपत को बढ़ाने के लिए आरबीआई एक और कट ले सकती है। ब्याज दर की यह कटौती हमारे जीडीपी डेटा 7.8 प्रतिशत (भारत की वर्तमान घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2025-26 की पहली तिमाही में औसत अनुमान 7.8 प्रतिशत है) में वृद्धि करेगा और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में सहयाता करेगा। वे कहते हैं कि आरबीआई गवर्नर सरप्राइज देते हैं, जून में बाजार ने 25 आधार अंक की कटौती की उम्मीद की थी और सीआरआर में 50 आधार अंकों, लेकिन गवर्नर ने 50 आधार अंक से ब्याज दरों में कटौती और सीआआर 100 प्रतिशत कर बाजार को चौंका दिया। इस बार भी ऐसा कुछ देखने को मिल सकता है।
अर्थबोध शेयर्स एंड इंवेस्टमेंट प्राइवेट के प्रबंध निदेशक और पीआईएफएए के संस्थापक सदस्य और संरक्षक भूषण महाजन कहते हैं कि सरकार ने जीएसटी सुधार किया जो खपत को आगे बढ़ाएगा, लेकिन अर्थव्यवस्था में चुनौतियां अभी बनी हुई है। वहीं मुद्रास्फीति में मामूली वृद्धि हुई है।
वैश्विक अनिश्चितता से मुद्रास्फीति बढ़ने की संभावना
बजाज ब्रोकिंग रिसर्च के अनुसार भारत की उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति जुलाई में 1.61 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त 2025 में 2.07 प्रतिशत हो गई, जो दस महीनों में पहली मासिक वृद्धि है। इस वृद्धि के बावजूद मुद्रास्फीति आरबीआई के चार प्रतिशत के लक्ष्य के नीचे और उसके निर्धारित स्तर के भीतर बनी हुई है, जिसमें खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें इस वृद्धि के कारण बनी हुई है। हाल ही में जीएसटी कर में सुधार से रिटेल कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। इससे निकट भविष्य में मुद्रास्फीति में संभावित रूप से कमी आ सकती है। हालांकि अर्थशास्त्री आगाह करते हैं कि वैश्विक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू मांग के दबाव जैसे कारणों से आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।
बजाज ब्रोकिंग रिसर्च का कहना है भारत की अर्थव्यवस्था ने जून तिमाही में उम्मीदों से अधिक साल दर साल 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की। इस वृद्धि को काफी हद तक सरकारी खर्च का समर्थन प्राप्त है। हालांकि निजी निवेश अभी भी धीमा बना हुआ है। बाहरी मोर्चे पर अमेरिका व्यापार शुल्क (टैरिफ ) और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियां भविष्य की विकास संभावनाओं पर भारी पड़ सकती हैं।
तरलता यानी लिक्विडिटी प्रबंधन और अग्रिम मार्गदर्शन सितंबर 2025 में सीआरआर में कमी सहित आरबीआई के तरलता हस्तक्षेपों का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इन प्रयासों के बावजूद उधार लेने की लागत अपेक्षाकृत उच्च बनी हुई है। विशेषकर केंद्र और राज्य सरकारों के लिए, केंद्रीय बैंक से अपने अग्रिम मार्गदर्शन में एक तटस्थ रुख अपनाने की उम्मीद है, जो मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए विकास को बनाए रखने के लिए आवश्यकता को संतुलित करता है।