शुगर डिप्लोमेसीः भारत से ज्यादा चीनी खरीद संबंधों में ‘मिठास’ लाएगा मलयेशिया
- पॉम तेल विवाद के बाद भारत की नाराजगी दूर करने की दिशा में बड़ी पहल
- 1.30 लाख टन चीनी पहली तिमाही में खरीदेगा मलयेशिया, पिछले साल खरीदी थी 88 हजार टन
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मलयेशिया ने जम्मू कश्मीर में धारा 370 खत्म करने और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद की बयानबाजी से भारत से बिगड़े संबंधों को सुधारने की दिशा में बड़ी पहल की है। सूत्रों के मुताबिक, पॉम तेल के आयात पर प्रतिबंध के बाद मलयेशिया, भारत की नाराजगी को शांत करने के क्रम में यहां से चीनी का आयात बढ़ाने जा रहा है।
इस क्रम में मलयेशिया की शीर्ष चीनी रिफाइनरी एमएसएम मलयेशिया होल्डिंग्स बेरहद 2020 की पहली तिमाही में 4.92 करोड़ डॉलर (350 करोड़ रुपये) में भारत से 1.30 लाख टन कच्ची चीनी का आयात करेगी। वहीं वर्ष 2019 में मलयेशिया ने भारत से 88 हजार टन चीनी खरीदी थी।
एमएसएम, पॉम तेल का उत्पादन करने वाली मलयेशिया सरकार के स्वामित्व वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी एफजीवी होल्डिंग्स की चीनी रिफाइन करने वाली इकाई है। हालांकि, कंपनी ने चीनी खरीद में बढ़ोतरी के लिए पॉम तेल विवाद को वजह नहीं बताया है।
इसी महीने बंद किया मलयेशिया से पॉम तेल आयात
कंपनी और सरकार के बीच खरीद पर हुई बातचीत पर नजर रखने वाले सूत्रों ने कहा कि यह भारत को खुश करने की दिशा में उठाया गया कदम है, जो मलयेशिया से दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे में कमी को लेकर दबाव बढ़ा रहा है। दुनिया में खाद्य तेल के सबसे बड़े खरीदार भारत ने इस महीने मलयेशिया से पॉम तेल का आयात पूरी तरह बंद कर दिया था। इसे कश्मीर पर भारत सरकार की नीति की मलयेशिया के प्रधानमंत्री द्वारा की गई आलोचना पर पलटवार के तौर पर देखा जा रहा था।
भारत को 10.8 अरब डॉलर का निर्यात करता मलयेशिया
इससे पहले मलयेशिया ने कहा था कि वह पॉम तेल की बिक्री के लिए दूसरे बाजारों की तलाश करेगा, लेकिन उसके लिए यह काम आसान नहीं होगा क्योंकि वह बीते पांच साल से मलयेशियाई पॉम तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। 2019 में भारत ने 44 लाख टन पॉम तेल की खरीद की है। 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष में मलयेशिया ने भारत को 10.8 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जबकि उसने सिर्फ 6.4 अरब डॉलर का आयात किया था।
ब्राजील-थाईलैंड से चीनी खरीदता रहा है मलयेशिया
इंटरनेशनल शुगर ऑर्गनाइजेशन ऑन रिफिनिटिव आइकॉन से मिले आंकड़ों के मुताबिक, मलयेशिया ने 2019 में कुल 19.5 लाख टन कच्ची चीनी का आयात किया था। वह आम तौर पर भारत की तुलना में ब्राजील और थाईलैंड से चीनी खरीदता है। भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन वह अपने सरप्लस से जूझ रहा है। 2019-20 सत्र में चीनी का निर्यात बढ़कर रिकॉर्ड 50 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है।
चीनी उद्योग को होगा फायदा
एमएसएम ने कहा कि जनवरी और फरवरी के बीच भारत से कच्ची चीनी की तीन शिपमेंट आने की उम्मीद है। एमएसएम के भारत से ज्यादा चीनी खरीदने के कदम पर ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रफुल विठलानी ने कहा, ‘यह अच्छा कदम है। इससे भारत से चीनी निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी।’ मुंबई के एक डीलर ने कहा कि जनवरी की शिपमेंट के वास्ते मलयेशिया 50 हजार टन चीनी के लिए पहले ही समझौता कर चुका है।