RBI MPC: नीतिगत दरें स्थिर; कर्ज सस्ता करने और उधारी बढ़ाने के लिए बड़े कदम, जानें एमपीसी की 8 बड़ी बातें
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.5% पर बरकरार रखने का फैसला किया है। आइए जानतें हैं एमपीसी से जुड़ी मुख्य बातें।
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भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने प्रमुख नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और 'न्यूट्रल' रुख बनाए रखा है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था को सहारा देने और विकास को गति देने के उद्देश्य से केंद्रीय बैंक ने यह निर्णय लिया।
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एमपीसी बैठक की आठ बड़ी बातें
- रेपो रेट 5.50% पर स्थिर - केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया। फरवरी 2025 से आरबीआई नीतिगत दरों में 100 आधार अंकों की कटौती कर चुका है। जून में अपनी पिछली नीति समीक्षा में, उसने रेपो दर को 50 आधार अंकों की कटौती करके 5.5 प्रतिशत कर दिया था।
- बैंक रेट यथावत 5.75% - बैंकों के लिए उधारी की यह दर भी अपरिवर्तित रखी गई। बैंक रेट वह दर है जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को लंबी अवधि के लिए सीधे ऋण देती है। यह दर मुख्य रूप से बैंकों के लिए नकदी की लागत को दर्शाती है।
- मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट 5.75% पर बरकरार - जरूरत पड़ने पर बैंकों की तात्कालिक फंडिंग की दर में कोई संशोधन नहीं। एमएसएफ आरबीआई द्वारा बैंकों को रेपो दर से अधिक ब्याज दर पर ओवरनाइट फंड उधार लेने की सुविधा प्रदान की जाती है।
- स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) रेट 5.25% पर स्थिर - बैंकों द्वारा आरबीआई में अतिरिक्त धन जमा करने की दर यथावत। एसडीएफ के तहत, बैंक ओवरनाइट आधार पर आरबीआई के पास अधिशेष जमा रख सकते हैं । यह बिना किसी संपार्श्विक के वाणिज्यिक बैंकों से तरलता अवशोषित करता है।
- तरलता समायोजन सुविधा (LAF) दर 5.25% - तरलता प्रबंधन की यह महत्वपूर्ण दर भी यथावत रखी गई। यह भारतीय रिजर्व बैंक की एक महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति व्यवस्था है, जिसके तहत केंद्रीय बैंक बैंकों की अल्पकालिक नकदी की जरूरतों और अधिशेष को नियंत्रित करता है।
- चालू खाता घाटा घटकर 0.2% - मौजूदा वित्त वर्ष में CAD में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। चालू खाता घाटा इस वित्त वर्ष में घटकर 0.2% रह गया है। यह देश की आर्थिक स्थिति में मजबूती का संकेत माना जा रहा है। चालू खाता घाटा एक आर्थिक संकेतक है जो दिखाता है कि देश के आयात और निर्यात, सेवाओं, आय और हस्तांतरणों के संतुलन में अंतर कितना है।
- ‘न्यूट्रल’ रुख बरकरार - आरबीआई ने मौद्रिक नीति का रुख बदलने की बजाय संतुलित दृष्टिकोण जारी रखा। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू वृद्धि को ध्यान में रखते हुए यथास्थिति अपनाई गई। मौजूदा दरों से ईएमआई और कर्ज की लागत में तत्काल कोई बदलाव नहीं होगा।
- 22 अतिरिक्त उपायों की घोषणा - बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती, क्रेडिट फ्लो, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना, विदेशी मुद्रा प्रबंधन को सरल बनाना, उपभोक्ता संतुष्टि में इजाफा करना और रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देने के लिए नए कदम उठाए गए।
कर्ज सस्ता करने और उधारी बढ़ाने के लिए बड़े उपायों की घोषणा
बैंकों की ऋण भूमिका बढ़ाने और वित्तपोषण लागत कम करने के लिए पांच प्रमुख कदमों की घोषणा की है। इसके तहत भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण को फाइनेंस करने के लिए बैंकों को नया फ्रेमवर्क मिलेगा, सूचीबद्ध डेब्ट सिक्योरिटीज और शेयरों के खिलाफ लेंडिंग की सीमा बढ़ाई जाएगी और IPO फाइनेंसिंग की लिमिट भी बढ़ाई गई है। RBI ने 2016 में लागू उस फ्रेमवर्क को भी हटा दिया है, जो बड़े क्रेडिट लिमिट वाले उधारकर्ताओं को फाइनेंसिंग से रोकता था, जबकि बैंक-स्तरीय बड़े एक्सपोजर और सिस्टम-व्यापी जोखिम नियंत्रण के लिए मौजूदा उपाय जारी रहेंगे। इसके अलावा, उच्च गुणवत्ता वाले ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस करने पर एनबीएफसी का रिस्क वेट कम किया जाएगा, जिससे फाइनेंसिंग लागत घटेगी। साथ ही, 2004 से रुकी नई शहरी सहकारी बैंकों की लाइसेंसिंग प्रक्रिया फिर से शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।