US Fed: ट्रंप ने केविन वॉर्श को सौंपी फेडरल रिजर्व की कमान, जेरोम पॉवेल की लेंगे जगह; जानें इस बदलाव की वजह
डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व फेड अधिकारी केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व का अगला चेयरमैन बनाने का एलान किया है। वे मई में जेरोम पॉवेल की जगह लेंगे, बशर्ते सीनेट मंजूरी दे। ट्रंप पॉवेल की ब्याज दर नीति से नाराज रहे हैं। वॉर्श पहले फेड बोर्ड के सदस्य रह चुके हैं और उनकी नियुक्ति से फेड की नीति और स्वतंत्रता में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह फेडरल रिजर्व के अगले चेयर के रूप में पूर्व फेड अधिकारी केविन वॉर्श को नामित करेंगे। अगर सीनेट से मंजूरी मिलती है, तो वॉर्श मई में मौजूदा चेयर जेरोम पॉवेल की जगह लेंगे। यह फैसला अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीति दिशा में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है, जिससे फेड को व्हाइट हाउस के करीब लाने और उसकी लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक स्वतंत्रता को कमजोर करने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रंप और पॉवेल के बीच का विवाद
ट्रंप ने 2017 में जेरोम पॉवेल को फेड चेयर नियुक्त किया था, लेकिन हाल के वर्षों में उन्होंने ब्याज दरों में तेजी से कटौती न करने को लेकर पॉवेल की लगातार आलोचना की।
कौन है केविन वॉर्श?
55 वर्षीय केविन वॉर्श पहले भी फेडरल रिजर्व बोर्ड के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने 2006 से 2011 तक फेड में सेवा दी और 35 वर्ष की उम्र में नियुक्त होकर फेड के इतिहास के सबसे युवा गवर्नर बने। वर्तमान में वह रूढ़िवादी विचारधारा वाले हूवर इंस्टीट्यूशन में फेलो हैं और स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस में व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं।
हालांकि, वॉर्श को ट्रंप का अप्रत्याशित विकल्प भी माना जा रहा है, क्योंकि वह लंबे समय तक उच्च ब्याज दरों के समर्थक रहे हैं। 2008-09 की वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान उन्होंने फेड की कम ब्याज दर नीति और बड़े पैमाने पर बॉन्ड खरीद कार्यक्रमों पर सवाल उठाए थे। लेकिन हाल के वर्षों में उन्होंने कम ब्याज दरों के समर्थन के संकेत भी दिए हैं।
फेड की स्वतंत्रता को लेकर चिंता बढ़ी
विशेषज्ञों के मुताबिक, वॉर्श की नियुक्ति ट्रंप द्वारा फेड पर नियंत्रण बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकती है। फेड अमेरिका की सबसे स्वतंत्र संस्थाओं में से एक है, लेकिन ट्रंप के सार्वजनिक बयान और केंद्रीय बैंक पर दबाव डालने की कोशिशों ने उसकी स्वतंत्रता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
फेड चेयर दुनिया के सबसे शक्तिशाली आर्थिक पदों में से एक है, जो अमेरिका में महंगाई को नियंत्रित करने, रोजगार बढ़ाने और बैंकिंग व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी निभाता है। फेड के ब्याज दर फैसलों का असर मॉर्गेज, कार लोन और क्रेडिट कार्ड जैसे कर्ज पर पड़ता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।
अगर सीनेट से मंजूरी मिलती है, तो वार्श को ब्याज दरों में कटौती को लेकर फेड के भीतर मतभेद, बाजारों की प्रतिक्रिया और महंगाई के जोखिम जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता महंगाई नियंत्रण के लिए जरूरी है, और राजनीतिक हस्तक्षेप से मौद्रिक नीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
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