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विकसित देशों की गलत नीतियों से उभरती अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान

Tue, 14 May 2019 05:30 AM IST
गौरव द्विवेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Tue, 14 May 2019 05:30 AM IST
सार

  • 22 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं भारत के साथ बैठक में 
  • 16 विकासशील और 6 विकसित देश विभिन्न मुद्दों पर करेंगे चर्चा

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Losses to emerging economies from wrong policies of developed countries
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की नई दिल्ली में शुरू हुई बैठक के पहले दिन सोमवार को भारत ने संरक्षणवाद पर कड़ा प्रहार किया। अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ विकसित देशों की गलत नीतियों के कारण डब्ल्यूटीओ का विवाद निपटारा तंत्र ठप हो गया है, जिसका खामियाजा उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों को भुगतना पड़ रहा। 

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डब्ल्यूटीओ महानिदेशक रॉबर्टो एजेवेदो की अगुवाई में 22 सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की शुरुआत करते हुए भारत के वाणिज्य सचिव अनूप वाधवान ने कहा कि कुछ देशों के एकपक्षीय कदम उठाने और जवाबी कार्रवाइयों से बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था पर खतरा उत्पन्न हो गया है। व्यापार वार्ताओं के अटकने और डब्ल्यूटीओ अपीलीय मंच के सदस्यों की नियुक्ति में गतिरोध आने से यह चुनौती और गंभीर हो गई है। वाधवान ने कहा कि व्यापार में संरक्षणवादी उपायों के बढ़ने से वैश्विक आर्थिक वातावरण बिगड़ रहा है और इसका सबसे ज्यादा असर विकासशील और अल्प विकसित देशों पर हो रहा है। 
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डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटारा प्रणाली को बचाए रखने के लिए रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ने व समस्या के तत्काल समाधान की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में सुधार की बातचीत जोर पकड़ रही है, लेकिन दुर्भाग्य से संतुलन का बड़ा अभाव है। 
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एजेंडे में हमारी चिंताओं पर गौर नहीं

भारत ने कहा कि डब्ल्यूटीओ के सुधार एजेंडे में विकासशील देशों की चिंताओं पर गौर नहीं किया गया है। ऐसा कोई भी एजेंडा भेदभाव से मुक्त होना चाहिए और सुधार आपसी विश्वास के आधार पर करने चाहिए। इनसे वर्तमान समझौते में पहले से चले आ रहे असंतुलन और विषमताओं का समाधान भी शामिल हो। अनूप वाधवान ने कहा कि विकासशील देशों के लिए कृषि सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है, लेकिन इस क्षेत्र के फैसलों को हाशिये पर डालने का प्रयास किया जा रहा है।

मिलकर काम करने की जरूरत

वाणिज्य सचिव ने कहा कि डब्ल्यूटीओ वार्ता के विषय में अल्प विकसित और विकासशील देशों के हितों पर कोई बात या प्रगति नहीं हो रही, जबकि यहां विकसित और विकासशील देशों को मिलकर काम करने की जरूरत है। इससे मछली उद्योग को सब्सिडी के बारे में एक निष्पक्ष और न्यायोचित समझौता हो सकेगा। सम्मेलन में चीन, ब्राजील, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, बांग्लादेश और मलयेशिया सहित 16 विकासशील और 6 विकसित देश भाग ले रहे हैं।


अमेरिका ने लगाया है अड़ंगा

अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ के सदस्यों की नियुक्ति में अड़ंगा लगा रखा है। इस निकाय के कार्य करने के लिए कम से कम तीन सदस्य अनिवार्य हैं और इस साल 10 दिसंबर के बाद यह स्थिति नहीं रहेगी और इसके बाद निकाय की कार्यप्रणाली ठप हो जाएगी। अपीलीय निकाय का ठप होना डब्ल्यूटीओ की विवाद सुलझाने की व्यवस्था और इसके क्रियान्वयन प्रणाली के लिए गंभीर जोखिम है। अमेरिका चाहता है कि डब्ल्यूटीओ ई-कॉमर्स जैसे नए मुद्दे पर चर्चा करे, जबकि भारत का कहना है कि इन पर नीतियां बनने के बाद ही चर्चा शुरू की जानी चाहिए।

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