Budget 2023: विकास को मिली है उपयुक्त प्राथमिकता, जानें केंद्रीय बजट पर उद्योग जगत के दिग्गजों की क्या है राय
Budget 2023: टाटा संस के चेयरमैन के अनुसार नई कर व्यवस्था के तहत आयकर स्लैब में बदलाव से लोगों की क्रय शक्ति बढ़नी चाहिए। एमएसएमई के लिए ऋण गारंटी और अन्य सहायताओं की घोषणा, पर्यटन पर ध्यान केंद्रित करना और अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए उठाए गए कदमों से रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
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केंद्रीय बजट 2023-24 पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा है कि वैश्विक विकास की धीमी गति और चुनौतीपूर्ण वित्तीय परिस्थितियों बावजूद वित्त मंत्री ने विकास को उपयुक्त प्राथमिकता दी है।
उन्होंने कहा, “मैं अधिक उत्पादक व्यय के कदम का स्वागत करता हूं। पूंजीगत व्यय के लिए 10 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया गया है। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में 33% की वृद्धि की गई है। जीडीपी के हिस्से के रूप में पिछले दो दशकों में यह सबसे अधिक है।”
टाटा संस के चेयरमैन के अनुसार नई कर व्यवस्था के तहत आयकर स्लैब में बदलाव से लोगों की क्रय शक्ति बढ़नी चाहिए। एमएसएमई के लिए ऋण गारंटी और अन्य सहायताओं की घोषणा, पर्यटन पर ध्यान केंद्रित करना और अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए उठाए गए कदमों से रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। बजट में मुफ्त भोजन योजना को एक और वर्ष के लिए बढ़ाकर सरकार ने यह संकेत दिया है कि वह साझा समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है।
बजाज अलायंज लाइफ इंश्योरेंश एमडी और सीईओ तरुण चुघ ने कहा है कि कुल मिलाकर बजट राजकोषीय विवेक के साथ बहुत सकारात्मक रहा है और इसमें समग्र विकास पर स्पष्ट ध्यान दिया गया है। भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जारी रखा है। इस बजट ने कृषि, फिनटेक, बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण, पर्यटन समेत सभी क्षेत्रों में दीर्घकालिक विकास की नींव रखी है।
यह बजट पूंजीगत व्यय और खपत को बढ़ावा देने के साथ अच्छी तरह से संतुलित है। राजकोषीय घाटे का समेकन वित्त वर्ष 23 के लिए जीडीपी के 6.4% से वित्त वर्ष 2024 में 5.9% करने का लक्ष्य रखा गया है। वित्तीय सेवाओं के दृष्टिकोण से केवाईसी सरलीकरण और डिजिटल इको-सिस्टम के भीतर बड़े पैमाने पर आगे बढ़ने जैसी पहलों से हमें फायदा होगा।
नई कर व्यवस्था को 50,000 रुपये की मानक कटौती शुरू करके और अधिक आकर्षक बना दिया गया है। यह पहले केवल पुरानी कर व्यवस्था (वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए) के लिए उपलब्ध था। इसके अलावा नई कर व्यवस्था के तहत आयकर छूट सीमा को पांच लाख रुपये से बढ़ाकर सात लाख कर दिया गया है। इसका मतलब है कि सात लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तियों को व्यक्तिगत आयकर का भुगतान नहीं करना होगा)
बजट में घोषणा की गई है कि नए वित्तीय वर्ष वर्ष से जारी गैर-यूलिप (पारंपरिक) बीमा पॉलिसियों के लिए केवल 5 लाख रुपये तक के कुल प्रीमियम वाली पॉलिसियों से होने वाली आय को छूट दी जाएगी। यह बीमा उद्योग और भारत में बीमा और घरेलू वित्तीय बचत की बढ़ती पैठ के लिए एक निराशाजनक पहलू है।
वहीं, डीबीएस की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव का मानना है कि केंद्र सरकार का वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट विकास को बढ़ावा देने वाला है। इस बजट में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि और करों में उछाल के बजाय लंबे समय तक पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी गई है।
टाटा कैपिटल लिमिटेड के एमडी और सीईओ राजीव सभरवाल के अनुसार बजट 2023-24 में समावेशी सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कई उपायों को शामिल किया गया है।
भारत सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं के तहत वित्तीय क्षेत्र और बुनियादी ढांचे से जुड़े निवेश पर अधिक ध्यान देने के साथ सही दिशा में कदम बढ़ाया है। पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में 33% की वृद्धि और रेलवे के लिए 2.40 लाख करोड़ रुपये का आवंटन देश में रोजगार पैदा करने और बुनियादी ढांचे के विकास में सुधार करने की दिशा में एक साहसिक कदम है।
सभरवाल के अनुसार बजट 2023-24 में व्यय-परिव्यय की समग्र गुणवत्ता वैश्विक बाधाओं के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा प्रदान करती है और निजी निवेश के लिए प्रोत्साहन पैदा करेगी। यह घरेलू खपत के लिए एक विशाल गुंजाइश भी प्रदान करेगा। मजबूत कृषि ऋण परिव्यय, समर्थन उपाय, व्यापार करने में आसानी और विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटलीकरण अभियान अर्थव्यवस्था के भीतर कई समूहों में सुधार करेगा।
एचडीएफसी बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट अभीक बरुआ के अनुसार बजट में माना गया है कि बढ़ते वैश्विक जोखिमों और निजी पूंजीगत व्यय चक्र में मामूली सुधार को देखते हुए अर्थव्यवस्था में निवेश को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। 2023-24 के लिए पूंजीगत परिव्यय को बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया था, जो पिछले साल की तुलना में 33% अधिक है।
बजट में राजकोषीय समेकन की आवश्यकता पर भी ध्यान दिया गया है। राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को जो 2022-23 में 6.4% था उसे 2023-24 में 5.9% तक कम करने की जरूरत पर बल दिया गया है। परिणामस्वरूप बाजार उधारी की संख्या उम्मीद से कम रहेगी इससे बांड बाजार को कुछ राहत मिलने की संभावना है।
हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 2024 में 10 साल की बॉन्ड यील्ड घटकर 7 से 7.1 प्रतिशत रह सकती है। बजट में आयकर स्लैब में समायोजन की भी घोषणा की गई है। जिससे अर्थव्यवस्था में खपत और बचत को बढ़ावा मिलने की संभावना है। जिससे करदाताओं को विशेष रूप से आय पिरामिड के निचले वर्ग में लाभ होगा।