बजट 2019: थोड़ी देर में सरकार बताएगी अर्थव्यवस्था की रफ्तार, यह है आर्थिक सर्वे का महत्व
बजट पेश होने में मात्र एक दिन बचा है और अब कुछ ही देर में संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा। आर्थिक सर्वे की कॉपियां संसद पहुंचने लगी हैं। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में आने वाले इस सर्वेक्षण को देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन सदन के पटल पर रखेंगे।
Delhi: Copies of the Economic Survey brought to Parliament, the survey will be tabled before the Parliament, today. pic.twitter.com/CmHfIEuTvt
— ANI (@ANI) July 4, 2019विज्ञापन
जनता को पता चलेगा अर्थव्यवस्था का हाल
बजट से पहले इस आर्थिक सर्वे का अपना महत्व होता है। आर्थिक सर्वे को पेश करने के पीछे सरकार का मकसद यह होता है कि वो जनता को बताए कि देश की अर्थव्यवस्था किस तरफ जा रही है। विकास दर, महंगाई से अर्थव्यवस्था की बयार किस तरफ बह रही है, उसके बारे में पता चलता है।
यह टीम तैयार करती है सर्वेक्षण
वित्त मंत्रालय में आर्थिक सर्वेक्षण को तैयार करने के लिए मुख्य आर्थिक सलाहकार के नेतृत्व में एक टीम काम करती है। फिलहाल देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रहमण्यम हैं। इसमें अर्थव्यवस्था के क्षेत्रवार हालातों की रूपरेखा और सुधार के उपायों के बारे में बताया जाता है।
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मिलती है बजट की झलक
आर्थिक सर्वेक्षण में मुख्यतः अगले दिन पेश होने वाले बजट की झलक मिलती है। आर्थिक सर्वेक्षण को वित्त मंत्रालय प्रकाशित करता है। मोटे तौर पर, यह सर्वेक्षण भविष्य में बनाई जाने वाली नीतियों के लिए एक दृष्टिकोण का काम करता है।
आर्थिक गतिविधियों का होता है लेखा-जोखा
आर्थिक सर्वेक्षण सरकार के बीते एक वर्ष की आर्थिक गतिविधियों का लेखा-जोखा होता है। यह सरकार के एक साल का रिपोर्ट कार्ड पेश करता है। इसमें बताया जाता है कि सरकार ने एक साल में क्या विकास कार्य किए हैं।
सरकार को मिलता है सुझाव
विस्तृत आर्थिक स्थिति में इस बात पर भी जोर दिया जाएगा कि किन क्षेत्रों पर सरकार को ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। यह सर्वेक्षण केवल सिफारिशें हैं और इन्हें लेकर कोई कानूनी बाध्यता नहीं होती है और इस कारण से सरकार इन्हें केवल निर्देशात्मक रूप से लेती है।