Maharashtra: सूबे के सात जिलों का जीएसडीपी में 54 प्रतिशत योगदान, सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में हुआ खुलासा
16वें वित्त आयोग को सरकार की ओर से भेजी गई एक रिपोर्ट से पता चला है कि महाराष्ट्र के 18 जिलों की विकास दर जीएसडीपी विस्तार दर के 0.8 गुना से भी कम है। इसके अलावे, प्रति व्यक्ति आय औसत राज्य आय से भी कम है। आइए इस बारे में विस्तार से जानतें हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महाराष्ट्र के 36 जिलों में से केवल सात जिले सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में 54 प्रतिशत का योगदान करते हैं, जो 2024 में 45 लाख करोड़ रुपये था। एक सरकारी रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। देश में आर्थिक महाशक्ति माने जाने वाले राज्य में आर्थिक गतिविधियां बड़े पैमाने पर केंद्रित हैं, इन सात जिलों में मुंबई, पुणे और नागपुर जिले शामिल हैं।
ये भी पढ़ें: US: 'ठीक है.. आप आईफोन भारत में बनाइए, पर टैरिफ के बिना इसे अमेरिका में नहीं बेच पाएंगे'; एपल को ट्रंप की धमकी
16वें वित्त आयोग को सरकार की ओर से भेजी गई एक रिपोर्ट से पता चला है कि महाराष्ट्र के 18 जिलों की विकास दर जीएसडीपी विस्तार दर के 0.8 गुना से भी कम है। इसके अलावे, प्रति व्यक्ति आय औसत राज्य आय से भी कम है। जीएसडीपी एक विशिष्ट अवधि के दौरान राज्य की सीमाओं के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को मापता है।
ये भी पढ़ें: IMF on Pakistan: 'आईएमएफ से मिली मदद से हथियार नहीं खरीद सकेगा पाकिस्तान', ऋण की शर्तों पर सामने आया यह अपडेट
इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत का 148 प्रतिशत है, जबकि राज्य के 12 जिलों की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से कम है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने पांच वर्षों की जिला रणनीतिक योजनाएं तैयार की हैं, जिन्हें विश्व बैंक की परियोजना से समर्थन प्राप्त है, ताकि इन 36 प्रशासनिक इकाइयों की सापेक्षिक शक्तियों के आधार पर संतुलित आर्थिक विकास में तेजी लाई जा सके।
जिलों के सालाना खर्च में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने विकास से जुड़ी रणनीतियों के लिए प्रशासन को धन मुहैया कराने के लिए कई फैसले लिए हैं। चालू वित्त वर्ष में जिला वार्षिक योजना परिव्यय को 11 प्रतिशत बढ़ाकर 20,150 करोड़ रुपये कर दिया है। इसके तहत जिला कलेक्टरों को जिला रणनीतिक योजना (डीएसपी) में चिन्हित परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए वार्षिक योजना की कम से कम 25 प्रतिशत राशि खर्च करने का निर्देश दिया गया है। त्वरित वित्तपोषण से जिलों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी और इससे विकास में और वृद्धि होगी। आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों को अतिरिक्त वित्तपोषण प्रदान किया जा रहा है।
जीएसडीपी में 54% योगदान देनेवाले सात जिलों में रायगढ़ और नागपुर भी
रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्वी महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले को स्टील हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। आर्थिक विकास और सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर जिलों को तीन खंडों में विभाजित किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 36 जिलों में से 50 प्रतिशत से अधिक जिले तीसरे खंड (निम्न सकल जिला घरेलू उत्पाद या प्रति व्यक्ति जीडीडीपी) में हैं। अधिकांश आर्थिक गतिविधियों के लिए जिम्मेदार और जीएसडीपी में 54 प्रतिशत योगदान देने वाले सात जिले हैं: रायगढ़, नागपुर, पुणे, ठाणे, पालघर, मुंबई शहर और मुंबई उपनगरीय।
ये भी पढ़ें: RBI Dividend: 11 साल में मोदी सरकार को मिला 11.42 लाख करोड़ लाभांश; राजकोषीय घाटे को कम करने में मिलेगी मदद
दूसरे खंड में 11 जिले हैं - वर्धा, चंद्रपुर, अहिल्यानगर, सोलापुर, सतारा, रत्नागिरी, सांगली, छत्रपति संभाजीनगर, नासिक, सिंधुदुर्ग और कोल्हापुर - जिनका जीएसडीपी योगदान 26 प्रतिशत था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 18 जिले - यवतमाल, अमरावती, अकोला, नांदेड़, भंडारा, गोंदिया, धुले, जलगांव, हिंगोली, बुलढाणा, गढ़चिरौली, नंदुरबार, लातूर, परभणी, बीड, वाशिम, धाराशिव और जालना - राज्य सकल घरेलू उत्पाद में 20 प्रतिशत का योगदान देते हैं।