गोल्ड हॉलमार्किंग: देशभर में हड़ताल, 10 हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ
गोल्ड ज्वैलरी पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) अपने मार्क के द्वारा शुद्धता की गारंटी देता है। लेकिल इसने ज्वैलर्स की समस्या को बढ़ा दिया है।
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स्वर्ण आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग के गैरजरूरी नियमों से परेशान सराफा व्यापारियों ने सोमवार को देशभर में हड़ताल कर विरोध जताया। अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण परिषद (जीजेसी) की अगुवाई में 350 संगठनों ने सड़कों पर उतरकर सरकार से नियमों में बदलाव करने की गुहार लगाई।
परिषद के निदेशक दिनेश जैन ने कहा, सराफा कारोबारियों को हॉलमार्किंग से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन हॉलमार्किंग यूनिक आईडी के नियमों से कारोबार करने में दिक्कत आ रही। इन नियमों का सोने की शुद्धता से कोई लेना-देना नहीं है। उल्टे व्यापारियों पर और ज्यादा अनुपालन का बोझ बढ़ रहा है और ज्यादातर समय आंकड़े जुटाने और बीआईएस की वेबसाइट पर विवरण भरने में निकल जाता है। उन्होंने कहा कि देशभर में हमारे हड़ताल को व्यापक समर्थन मिला है। बड़ी और ब्रांडेड कंपनियों को छोड़कर सभी सराफा कारोबारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। व्यापारी संगठनों ने सभी जिलाधिकारी कार्यालयों पर ज्ञापन सौंपकर नियमों में सुधार की मांग की है। हड़ताल से चारों जोन में करीब 5-10 हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
अभी एक मिनट के काम में लगते हैं घंटों
जैन ने कहा, एचयूआईडी सिस्टम में आभूषण विक्रेता को हर उत्पाद का विवरण बीआईएस पोर्टल पर देने के साथ उसे किस ग्राहक को बेचा, ये भी बताना पड़ता है। इससे एक मिनट में पूरे होने वाले काम में घंटों लग जाते हैं। मान लीजिए, किसी थोक विक्रेता के पास 50 किलोग्राम हॉलमार्क लगे हुए स्वर्ण आभूषण हैं। उसने किसी खुदरा व्यापारी को 1 किलोग्राम आभूषण बेचे, तो इस काम में वैसे तो एक मिनट ही लगेगा। लेकिन, सभी आभूषणों का विवरण पोर्टल पर भरने में घंटों लग जाएंगे। यह व्यवस्था खुदरा व थोक कारोबारी दोनों के लिए नुकसानदायक है।
लाखों आभूषण विक्रेताओं ने उठाई आवाज
परिषद के अनुसार, देश के पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण सभी चारों जोन में लाखों आभूषण विक्रेताओं ने एचयूआईडी के विरोध में आवाज उठाई है। अकेले गुजरात में ही 15,000 से ज्यादा ज्वैलर्स हड़ताल में शामिल हुए। इसके अलावा जयपुर, भोपाल, इंदौर, मुंबई, दिल्ली, बंगाल, जम्मू-कश्मीर सहित देशभर से लाखों ज्वैलर्स ने विरोध में दुकानें बंद रखीं।
ज्वैलर्स के सामने कई समस्याएं
- महंगे आभूषणों को कई दिनों तक हॉलमार्किंग केंद्रों पर छोड़ना पड़ता है।
- एचयूआईडी सहित कुल आठ मार्किंग होती है, जिससे आभूषण की सुंदरता प्रभावित हो रही है।
- हॉलमार्किंग के लिए आभूषण से सोना निकाला जाता है, जिससे कई बार आभूषण खराब हो जाते हैं।
- इस प्रक्रिया में आभूषणों में होने वाले नुकसान की भरपाई ज्वैलर्स को ही करनी पड़ती है।
- हॉलमार्किंग और आभूषण बिकने के बाद भी किसी विवाद की स्थिति में ज्वैलर्स की जिम्मेदारी तय की जाती है।
क्या हैं मांगें?
- एचयूआईडी की प्रक्रिया हॉलमार्किंग केंद्रों पर होनी चाहिए, ज्वैलर्स के ऊपर नहीं।
- 40 लाख से कम टर्नओवर वाले आभूषण विक्रेताओं से लाइसेंस नहीं मांगा जाना चाहिए।
- 256 जिलों को छोड़कर अन्य जगहों पर हॉलमार्क आभूषण बेचने के लिए भी लाइसेंस मांग रहे।
- अभी हॉलमार्किंग में पांच से 15 दिन लग रहे, इसे एक दिन के भीतर उपलब्ध कराया जाए।
- केंद्रों पर गलत एचयूआईडी देने और प्रमाण पत्र जारी होने के बाद ज्वैलर्स की जिम्मेदारी खत्म की जाए।
क्या है हॉलमार्क?
हॉलमार्क एक तरह की गारंटी है। इसके तहत हर गोल्ड ज्वैलरी पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) अपने मार्क के द्वारा शुद्धता की गारंटी देता है। यदि आसान भाषा में कहें तो यह विश्वसनीयता प्रदान करने का एक माध्यम है। यदि गहनों पर हॉलमार्क है तो इसका मतलब है कि उसकी शुद्धता प्रमाणित है। बीआईएस का चिह्न प्रमाणित करता है कि गहना भारतीय मानक ब्यूरो के स्टैंडर्ड पर खरा उतरता है।