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राहत: कैशलेस इलाज से अस्पतालों का इनकार तो क्या करें, जानें हर सवाल का जवाब

Sat, 24 Apr 2021 04:56 PM IST
प्रियंका तिवारी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रियंका तिवारी Updated Sat, 24 Apr 2021 04:56 PM IST
सार

कोरोना की दूसरी लहर के बीच ऐसी कई रिपोर्ट सामने आई हैं, जहां अस्पतालों ने कोविड मरीजों को कैशलेस क्लेम देने से मना कर दिया।

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IRDAI asks hospitals to provide cashless treatment of Corona to policy holders
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

कोरोना वायरस के कारण देशभर में गहराए संकट के बीच ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि बीमा कंपनियां अपने ग्राहकों को कोरोना का क्लेम नहीं दे रहीं। ऐसे में बीमा कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सरकार एक्शन मोड में आ गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईआरडीएआई) के चेयरमैन एस सी खुंटिया से कहा कि वह सभी बीमा कंपनियों और नेटवर्क हॉस्पिटल को सख्त निर्देश दें कि वे कोरोना मरीजों के इलाज के लिए कैशलेस ट्रीटमेंट उपलब्ध कराएं। दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर के बीच ऐसी कई रिपोर्ट सामने आई हैं, जहां अस्पतालों ने कोविड मरीजों को कैशलेस क्लेम देने से मना कर दिया। 

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वित्त मंत्री के निर्देश के बाद अब आईआरडीएआई ने इंश्योरेंस कंपनियों के नाम आदेश जारी कर साफ कहा है कि उन्हें अपने ग्राहकों को नेटवर्क अस्पतालों में अन्य बीमारियों की तरह ही कोरोना के लिए भी कैशलेस इलाज की सुविधा मुहैया करानी होगी। आईआरडीएआई के इस निर्देश का सीधा मतलब यही है कि अब इंश्योरेंस कंपनियों को कोरोना के इलाज को भी अन्य बीमारियों की तरह ही समझना होगा। आईआरडीएआई ने अपने निर्देश में यह भी साफ किया है कि अपने ग्राहकों को कैशलेस सुविधा का लाभ नहीं देने वाली इंश्योरेंस कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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कोरोना काल में इंश्योरेंस इंडस्ट्री में क्लेम करीब 50 फीसद बढ़ा
उल्लेखनीय है कि महामारी के दौर में इंश्योरेंस इंडस्ट्री में क्लेम करीब 50 फीसद बढ़ा है। अब तक कोविड से जुड़े करीब 14 हजार 287 करोड़ रुपये के क्लेम हुए हैं, जिसमें से 7 हजार 561 करोड़ रुपये का सेटलमेंट हुई है। वित्त मंत्री ने  गुरुवार को बताया था कि इंश्योरेंस कंपनियों ने 8 हजार 642 करोड़ रुपये के कोविड से जुड़े 9 लाख से ज्यादा क्लेम का निपटारा किया है।

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कैशलेस इलाज न मिलने पर इनसे शिकायत कर सकते हैं ग्राहक

  • अगर अस्पताल ने ग्राहकों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं दी, तो सबसे पहले ग्राहक अपनी इंश्योरेंस कंपनी के ग्रीवांस रिट्रेशनल ऑफिसर (जीआरओ) के पास शिकायत दर्ज करा सकता है।
  • वहीं, यदि ग्राहक को 15 दिन में संतुष्टि भरा जवाब नहीं मिला तो वह बीमा लोकपाल के पास अपनी शिकायत लेकर जा सकता है। यहां सुनवाई के दौरान वकील की जरूरत नहीं होती। ग्राहक या उसका रिश्तेदार उपस्थित हो सकता है और बीमा कंपनी की ओर से भी कोई अधिकारी आ सकता है।
  • बीमा लोकपाल के फैसले से इंश्योरेंस कंपनी इनकार नहीं कर सकती है, लेकिन अगर ग्राहक फैसले से असंतुष्ट है तो वह कंज्यूमर कोर्ट भी जा सकता है।

इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

  • इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि इसमें किन-किन बीमारियों को कवर किया गया है। इसके लिए हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम की लिस्ट चेक करें।
  • इसके अलावा इंश्योरेंस कंपनी का क्लेम सेटलमेंट रेशियो जरूर जांच लें। इससे आपको पता चलेगा कंपनी ने इलाज के खर्चे का अब तक कितने लोगों को पेमेंट किया है। 
  • पॉलिसी लेते समय अपनी हेल्थ यानी स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी बिल्कुल न छिपाएं।
  • इंश्योरेंस कंपनी की ओर से मिलने वाले नेटवर्क हॉस्पिटल आपके आस-पास हैं या नहीं इस पर भी ध्यान दें।
  • पॉलिसी में सब लिमिट पर ध्यान देना चाहिए। इसके तहत इंश्योरेंस कंपनियां डॉक्टर फीस, आसीयू चार्जेज सहित रूम रेंट पर लिमिटेड पैसे ही देते हैं। यानी अलग-अलग लिमिट लगी होती है।
  • पॉलिसी में को-पे का भी ध्यान रखना चाहिए। इसके तहत कुल खर्च का कुछ हिस्सा ग्राहक और कुछ इंश्योरेंस कंपनी को पेमेंट करना होता है।
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