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Intrest Rate : अब कम से कम 7.8 फीसदी ब्याज पर मिलेगा कर्ज, अप्रैल तक 6.4 फीसदी पर मिलता था

Sat, 06 Aug 2022 06:22 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 06 Aug 2022 06:22 AM IST
सार

Interest Rate: जनवरी तक ब्याज दर में एक फीसदी और बढ़त हो सकती है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में तेजी से ऐसा होगा। एचडीएफसी बैंक की प्रधान अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा, आरबीआई रेपो दर को 5.75 फीसदी तक बढ़ा सकता है।

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Interest Rate: Now loan on 7.8 percent interest will increase in January again
ब्याज दर

विस्तार

3 महीने से लगातार बढ़ रही ब्याज दरें और ज्यादा हो गई हैं। अब यह कर्ज पर 7.8 फीसदी तक पहुंच गई है। अप्रैल में यह दर 6.4 फीसदी थी। देश के करीबन सभी बैंक होम लोन इसी दर से दे रहे हैं। अप्रैल से लेकर अब तक रेपो दर में 1.40% की बढ़ोतरी हुई है। उसके बाद से कर्ज महंगा हो गया है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि आरबीआई के फैसले का असर तुरंत ही दिख गया। दो बैंकों ने देर रात कर्ज को महंगा कर दिया।

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बैंक अपनी असेट लायबिलिटी कमेटी (अलको) की बैठक में इस पर फैसला करेंगे। इससे ग्राहकों को अगले महीने से ज्यादा किस्त चुकानी पड़ेगी। आरबीआई के फैसले के बाद ब्याज दर अगस्त, 2019 के स्तर पर पहुंच गई है। आरबीआई की मौद्रिक नीति कमेटी (एमपीसी) की अगली बैठक 28-30 सितंबर को होगी।
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विश्लेषकों का कहना है कि अभी भी इस साल दो बार कम से कम दरें बढेंगी। उसके बाद महंगाई के स्तर को देखते हुए इस पर फैसला लिया जा सकता है। गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि ताइवान की घटनाओं का कोई असर नहीं होगा। भारत के कुल कारोबार में ताइवान का योगदान केवल 0.7 फीसदी है।
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डिपॉजिट पर अब 7.5%  तक मिल सकता है ब्याज
आरबीआई ने मई में नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) बढ़ा दिया था। इससे बैंकों के पास से  87 हजार करोड़ रुपये निकल गए थे। इस वजह से भी बैंकों को पूंजी की जरूरत पड़ रही है। बैंकों की उधारी में 14% की इस समय वृद्धि है। एक साल पहले 5.5% थी। यानी करीब 3 गुना की बढ़ोतरी हुई है। पिछले 3 महीने में छोटी समय की जमाओं के ब्याज पर 1.4% की वृद्धि हुई है। ऐसे में आने वाली 3-4 तिमाहियों में 0.50% से एक फीसदी तक बढ़ सकती है। फिलहाल 6.5% तक ब्याज मिल रहा है।

पहली तिमाही में 16.2% वृद्धि का अनुमान
मौद्रिक नीति की बैठक में पहली तिमाही में 16.2 फीसदी जीडीपी वृद्धि का अनुमान जताया गया। दूसरी तिमाही में यह 6.2 फीसदी, तीसरी तिमाही में 4.1 फीसदी और चौथी तिमाही में 4 फीसदी रह सकती है। चालू वित्तवर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7.2 फीसदी रह सकती है। दूसरी तिमाही में महंगाई दर 7.1 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.4 और चौथी तिमाही में 5.8% रह सकती है। पूरे वर्ष में महंगाई की दर 6.7% रहने का अनुमान है।

गवर्नर की प्रमुख बातें

  • विदेशी निवेशक अब बाजार में वापसी कर रहे हैं।  
  • बैंकिंग सिस्टम में अप्रैल-मई में तरलता 6.7 लाख करोड़ घटी
  • अब यह 3.8 लाख करोड़ रुपये पर आ गई।  
  • कच्चा तेल 105 डॉलर प्रति बैरल पर चालू वित्तवर्ष में रह सकता है
  • वैश्विक कारणों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर दिख रहा है
  • 13.6 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया

अप्रैल में ये थी आपकी किस्त (6.4% ब्याज)

लोन अवधि किस्त
40 लाख 25 साल 26,759
कुल ब्याज 40,27,662  
कुल भुगतान 80,27,662  
आंकड़े रुपये में

मई से ऐसे बढ़ी आपकी किस्त (7.8% ब्याज)
लोन अवधि किस्त
40 लाख 25 साल 30,345
कुल ब्याज 51,03,371  
कुल भुगतान 91,03,371  
आंकड़े रुपये में

एनआरआई को सुविधा

आरबीआई ने भारत बिल पेमेंट के जरिए दूसरे देशों से एनआरआई बिल भुगतान स्वीकार करने को मंजूरी दी है। इसमें उपयोगी चीजों, शिक्षा और अन्य इस तरह के शुल्क का भुगतान एनआरआई भारत में कर सकते हैं। इससे वरिष्ठ नागरिकों को फायदा होगा।

6 माह से महंगाई आरबीआई के 6% के दायरे से ज्यादा

महंगाई रेपो दर
अप्रैल-7.79 4.00
मई-7.04 4.40
जून-7.01 4.90
(आंकडे़ फीसदी में )

4 हफ्ते की गिरावट के बाद बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार
लगातार 4 हफ्ते की गिरावट के बाद 29 जुलाई को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 2.4 अरब डॉलर  बढ़कर 573.9 अरब डॉलर हो गया। 24 जून को यह 571.5 अरब डॉलर जबकि सितंबर, 2021 में यह 642 अरब डॉलर था।

कब बढ़ता और घटता है रेपो रेट
जब महंगाई बढ़ती है तो अर्थव्यवस्था में पैसे को कम करने के लिए दर बढ़ा दी जाती है। कर्ज महंगा होने से लोग खर्च कम करते हैं। इससे महंगाई घटती है। जब अर्थव्यवस्था बुरे दौर में होती है तब इसे सुधारने के लिए दरों को कम कर दिया जाता है जिससे लोग ज्यादा खर्च करते हैं। ऐसा कोरोना के समय 2020 में किया गया था। उस समय लगातार दरों को कम किया गया था।

जनवरी तक एक फीसदी और बढ़ सकती है ब्याज दर
जनवरी तक ब्याज दर में एक फीसदी और बढ़त हो सकती है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में तेजी से ऐसा होगा। एचडीएफसी बैंक की प्रधान अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा, आरबीआई रेपो दर को 5.75 फीसदी तक बढ़ा सकता है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक 75 से 100 बीपीएस (बेसिस प्वाइंट) की बढ़ोतरी कर रहे हैं।


ऐसी धारणा है कि 75 से 100 बीपीएस की दर 50 बीपीएस से आगे जा सकती है। आरबीआई के उप गवर्नर माइकल पात्रा ने कहा कि बैंकों ने पहले ही जमा पर ब्याज बढ़ाना शुरू कर दिया है। बल्क जमा पर अब तेजी से दरें बढ़ सकती हैं। 15 जुलाई को समाप्त पखवाड़े में बैंकों की उधारी में वृद्धि 12.89 फीसदी रही।

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