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2030 तक राज्यों को इंफ्रा पर बढ़ाना होगा तीन गुना खर्च: क्रिसिल

Wed, 27 Nov 2019 03:23 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Wed, 27 Nov 2019 03:23 PM IST
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Infrastructure needs more investment in 10 years says CRISIL

इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में सरकार के तय लक्ष्य को पाने के लिए राज्यों को कुल खर्च में हिस्सेदारी करीब साढ़े तीन गुना बढ़ानी होगी। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा कि राज्यों को अगले एक दशक में इंफ्रा क्षेत्र में 110 लाख करोड़ रुपये का निवेश करना होगा, जो अभी 32 लाख करोड़ के आसपास है। 

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क्रिसिल ने इंफ्रास्ट्रक्चर ईयरबुक 2019 नाम से जारी रिपोर्ट में कहा कि इंफ्रा पर हो रहे कुल खर्च में अभी राज्यों की हिस्सेदारी 41 फीसदी है। पिछले एक दशक में इंफ्रा क्षेत्र में कुल 77 लाख करोड़ रुपये का खर्च हुआ है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि अगले दशक (2021-2030) में राज्यों को अपना खर्च 3.5 गुना बढ़ाकर 110 लाख करोड़ करना होगा। तभी इंफ्रा क्षैत्र के लिए तय बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। क्रिसिल ने कहा कि देश को अगले एक दशक में इंफ्रा क्षेत्र के लिए 235 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी, ताकि औसत विकास दर 7.5 फीसदी बनी रहे। इस लक्ष्य को पाने के लिए इंफ्रा क्षेत्र का खर्च जीडीपी के 6 फीसदी से ज्यादा करना होगा।

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पांच क्षेत्रों पर दो तिहाई खर्च

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि राज्यों को सबसे ज्यादा जोर सिंचाई, परिवहन, ऊर्जा, आवास और जल एवं स्वच्छता जैसे क्षेत्रों पर देना होगा और कुल खर्च का दो तिहाई इन्हीं क्षेत्रों में निवेश करना होगा। इनमें से कई क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे का अभाव है और उन्हें बड़े निवेश की जरूरत है। क्रिसिल की इंफ्रा सलाहकार समिति के अध्यक्ष समीर भाटिया ने कहा कि अगर कुल खर्च में राज्यों की भागीदारी 50 फीसदी हो जाए तो भारत का इंफ्रा क्षेत्र फिर से जोर पकड़ लेगा। राज्यों को अपनी राजकोषीय स्थिति मजबूत करने और पूंजी स्तर बढ़ाने के लिए वित्तीय संस्थानों की क्षमता का विस्तार करना होगा।

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15 बड़े राज्यों की भागीदारी अहम

वित्त वर्ष 2015-19 के दौरान देश के 15 बड़े राज्यों की इंफ्रा क्षेत्र में सकल हिस्सेदारी 83 फीसदी थी और लक्ष्य पाने में इन राज्यों की भागीदारी अहम होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल हैं, जहां निजी निवेश बढ़ाने और पूंजी का स्तर उठाने के लिए नए तरीके तलाशने होंगे। इसके अलावा हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना मध्मय दर्जे के राज्य हैं, जो अपने मौजूदा खर्च को आगे भी बरकरार रखेंगे। 

यूपी-राजस्थान में सबसे ज्यादा संभावना

रिपोर्ट के मुताबिक, अगले एक दशक में यूपी और राजस्थान में इंफ्रा क्षेत्र पर सबसे ज्यादा निवेश हो सकता है। हालांकि, इन राज्यों पर बढ़ता कर्ज इसमें बाधा डाल सकता है। इन राज्यों को आगे बढ़ने के लिए केंद्र के साथ मिलकर लगातार सुधार करने चाहिए। क्रिसिल का कहना है कि आने वाले दशक में एयरपोर्ट और रेलवे पर भारी-भरकम खर्च हो सकता है।  क्रिसिल इंफ्रा एडवाइजरी के वरिष्ठ निदेशक विवेक शर्मा ने कहा, वैश्विक अर्थव्यवस्था में छाई मंदी और वित्तीय संकट की वजह से इस साल निजी निवेश काफी कम रहा है। 

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