Indian Ships In Hormuz: 'शिवालिक' के बाद दूसरा भारतीय जहाज 'नंदा देवी' भी होर्मुज से निकला, इलाके का हाल क्या?
पश्चिम एशिया तनाव बीच भारत को बड़ी राहत मिली है। ईरान की मंजूरी के बाद भारतीय एलपीजी टैंकर शिवालिक और नंदा देवी होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकल गए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान की ओर से भारतीय ध्वज वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग देने के फैसले के बाद भारतीय एलपीजी टैंकर शिवालिक ने इस अहम समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। वहीं दूसरा एलपीजी पोत नंदा देवी भी इस संवेदनशील तेल मार्ग से सुरक्षित बाहर निकल गया है। ये 16 और 17 मार्च को भारत पहुंचेगे।
शिवालिक को लेकर क्या है स्थिति?
सरकारी सूत्रों ने शनिवार को बताया कि शिवालिक इस समय भारतीय नौसेना की निगरानी और सुरक्षा में आगे बढ़ रहा है। जहाज खुले समुद्र में पहुंच चुका है और अगले दो दिनों में भारत के किसी बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है।
क्या कूटनीतिक संवाद से भारत को मिली राहत?
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच वस्तुओं और ऊर्जा आपूर्ति के सुचारु प्रवाह को लेकर उच्चस्तरीय चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि इसी कूटनीतिक संवाद के बाद भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग का रास्ता साफ हुआ।
इससे पहले शुक्रवार को भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने संकेत दिया था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय जहाजों को जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रास्ता मिल सकता है। उन्होंने कहा था कि भारत ईरान का मित्र देश है और दोनों देशों के इस क्षेत्र में साझा हित हैं। फथाली ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में भारत सरकार ने युद्ध के बाद विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की मदद की है।
राजदूत का यह बयान ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची के उस बयान के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान ने कुछ देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है।
ईरान कभी नहीं चहाता कि होर्मुज बंद हो
वहीं, भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान कभी नहीं चाहता था कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो, हालांकि मौजूदा हालात के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान ने जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया है। यह खुला है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों की वजह से जहाज आसानी से गुजर नहीं पा रहे हैं। कुछ जहाज अब भी वहां से गुजर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर के नेताओं को युद्ध रोकने के लिए अमेरिका पर दबाव बनाना चाहिए, क्योंकि इस संघर्ष का असर तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस निर्यात का करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।
होर्मुज में फंसे भारत के कितने जहाज?
पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री स्थिति और भारतीय नाविकों व जहाजों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों पर अपडेट जारी किया। मंत्रालय के मुताबिक, इस समय फारस की खाड़ी में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाज संचालित हो रहे हैं, जिन पर 668 भारतीय नाविक तैनात हैं। इसके अलावा 76 भारतीय नाविक अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में मौजूद तीन जहाजों पर हैं।
मंत्रालय ने बताया कि डीजी शिपिंग जहाज मालिकों, RPSL एजेंसियों और भारतीय मिशनों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। सभी भारतीय जहाजों और उनके चालक दल की सक्रिय निगरानी की जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, 24 घंटे के कंट्रोल रूम के सक्रिय होने के बाद से डीजी शिपिंग ने 2,425 से अधिक कॉल और 4,441 ईमेल हैंडल किए हैं। साथ ही 223 से अधिक फंसे हुए भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी भी सुनिश्चित की गई है।