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Amitabh Kant: 'भारत में नियामकीय अनुपालन अधिक, समाजवादी मानसिकता अब भी जारी', बोले जी20 के पूर्व शेरपा

Thu, 06 Nov 2025 04:56 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 06 Nov 2025 04:56 PM IST
सार

भारत के पूर्व जी-20 शेरपा अमिताभ कांत ने गुरुवार को भारतीय उद्यमों पर पड़ने वाले नियामक अनुपालन बोझ की ओर ध्यान दिलाया और अफसोस जताया कि देश में समाजवादी मानसिकता अब भी बरकरार है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Indian regulations fraught with compliance burdens, socialist mindset continues, says Amitabh Kant
अमिताभ कांत - फोटो : ANI

विस्तार

भारत के पूर्व जी-20 शेरपा अमिताभ कांत ने गुरुवार को भारतीय उद्यमों पर पड़ने वाले नियामक अनुपालन बोझ की ओर ध्यान दिलाया और अफसोस जताया कि देश में समाजवादी मानसिकता अब भी बरकरार है। 

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अमिताभ कांत ने यहां एक्सीलेंस इनेबलर्स कार्यक्रम में बोलते हुए कहा, "भारत का नियामक वातावरण अनुपालन का बहुत अधिक बोझ डालता है। ब्रिटिश राज की जगह कई मायनों में लाइसेंस राज ने ले ली है, और हमारी समाजवादी मानसिकता अब भी कायम है।"
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उन्होंने कहा कि भारत के उद्यमों को अत्यधिक विनियमन और बहुत अधिक अनुपालन बोझ से मुक्त करने की जरूरत है। पूर्व नौकरशाह ने छह वर्षों तक सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी के रूप में भी काम किया है।
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कांत ने विनियमनों को एक ऐसे प्रमुख क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया जिसमें परिवर्तन की आवश्यकता है, तथा उन्होंने बताया कि विनियमनों को "विश्वास और पारदर्शिता के लिए ढाल के रूप में, न कि मनमाने नियंत्रण के लिए तलवार के रूप में" पुनः आकार देने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि विनियमन को "नवाचार और रोजगार सृजन को बाधित नहीं करना चाहिए", बल्कि ऐसी भूमिका निभानी चाहिए जिससे विकास को बढ़ावा मिले। उन्होंने चेतावनी दी कि विकसित भारत पहल के तहत 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद का लक्ष्य जटिल विनियमनों के साथ हासिल नहीं किया जा सकता।

कांत ने अपनी मांगों को सूचीबद्ध करते हुए कहा, "हमें सरकार और विनियमन की भूमिका को मूलतः नियंत्रित से सक्षम में बदलना होगा।" उन्होंने एक "प्रभाव मूल्यांकन" को संस्थागत बनाने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि वित्तीय नियामक अपने कदमों के प्रभाव का नियमित रूप से आकलन करने और सीधे बोर्ड को रिपोर्ट करने के लिए स्वायत्त कार्यालय स्थापित करेंगे।


एक ही नियामक के भीतर शक्तियों के केंद्रित होने पर अपनी आपत्तियों को सार्वजनिक करते हुए कांत ने कहा कि इससे हितों के गंभीर टकराव का खतरा है। उन्होंने कहा, "भारतीय नियामकों को पुनर्गठित किया जाना चाहिए ताकि नियम निर्माण, प्रवर्तन और निर्णयों के लिए तीन अलग-अलग चरण हों, जहां ऐसा करना संभव न हो वहां स्वतंत्र न्यायाधिकरणों को हस्तक्षेप करना चाहिए।"

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