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आठ महीने में चीन से आए 13000 करोड़ के 130 एफडीआई प्रस्ताव
Wed, 23 Dec 2020 06:39 AM IST
डिंपल अलवधी
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Wed, 23 Dec 2020 06:39 AM IST
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भारत-चीन
- फोटो : pixabay
कोरोनाकाल में भारतीय उद्योग जगत पर छाए संकट के बीच चीन की ओर से प्रत्यक्ष निवेश के कई प्रस्ताव आए। संकट में फंसी भारतीय कंपनियों को हथियाने की फिराक में चीन लगातार निवेश की कोशिश कर रहा है। आलम ये रहा कि 20 साल में जहां चीन से कुल एफडीआई 15 हजार करोड़ रहा, वहीं पिछले आठ महीने में ही 13 हजार करोड़ के प्रस्ताव आ चुके हैं।
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सूत्रों ने बताया कि अप्रैल से अब तक चीन की ओर से 120-130 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के प्रस्ताव मिले हैं। यह राशि 12-13 हजार करोड़ की है। इससे पहले अप्रैल 2000 से सितंबर 2020 तक सिर्फ 15,526 करोड़ का एफडीआई आया था।
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गनीमत रही कि सीमा पर चीन के साथ जारी तनाव के बीच आए इन प्रस्तावों से पहले ही भारत सरकार ने नया कानून पारित कर दिया। इसके तहत भारत के साथ सीमा साझा करने वाले किसी भी देश के नागरिक या वहां की कंपनियां बिना सरकार से अनुमति लिए निवेश नहीं कर सकती हैं। यही कारण रहा कि चीन को भारत के किसी भी क्षेत्र में प्रत्यक्ष निवेश करने से पहले सरकार के पास मंजूरी के लिए जाना पड़ा।
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स्थापित कंपनियों को मिले अधिकतर प्रस्ताव
एफडीआई प्रस्तावों की समीक्षा करने के लिए बनाई गई अंतर-मत्रालयी समिति ने बताया कि चीन की ओर से आए अधिकतर एफडीआई प्रस्ताव पहले से स्थापित कंपनियों के लिए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि चीन की मंशा महामारी व पूंजी संकट से जूझ रही और बंद होने की कगार पर पहुंची कंपनियों में निवेश कर अधिकार प्राप्त करने का है। हालांकि, अप्रैल में उद्योग संवर्द्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने प्रेस नोट जारी कर यह नियम बना दिया था कि भारतीय सीमा से जुड़े देशों या उसके नागरिकों को किसी भी कंपनी या क्षेत्र में निवेश के लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी। इसका मकसद घरेलू कंपनियों पर विदेशी अधिकार में जाने से बचाना था।
सरकारी ठेकों में बोली लगाने की कोशिश
सूत्रों के अनुसार, चीनी कंपनियों ने एफडीआई प्रस्तावों के अलावा सरकारी ठेकों में बोली लगाने के लिए पंजीकरण का आवेदन भी किया है। इन प्रस्तावों को मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय के पास भेजा गया है। हालांकि, बहुस्तरीय संस्थानों से फंडिंग प्राप्त करने वाले प्रोजेक्ट में चीनी कंपनियों के बोली लगाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अगर सरकार के प्रोजेक्ट में बोली लगानी है, तो पहले पंजीकरण कराना होगा। इसकी अनुमति केंद्र सरकार की ओर से दी जाएगी।