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कोरोना काल में कम हुई शराब की बिक्री, सबसे ज्यादा इन राज्यों में आई गिरावट

Mon, 09 Nov 2020 02:46 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Mon, 09 Nov 2020 02:46 PM IST
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Indian foreign liquor sales decline by 9 percent in September quarter
शराब - फोटो : pixabay

चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में भारत निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) की बिक्री 8.98 फीसदी कम होकर 780 लाख पेटियों पर आ गई। उद्योग संगठन सीआईएबीसी के आंकड़ों में यह पता चला है। शराब बनाने वाली कंपनियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज इंडस्ट्री (सीआईएबीसी) के अनुसार, पिछले साल की समान तिमाही में 857 लाख पेटी आईएमएफएल की बिक्री हुई थी। 

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जून तिमाही की तुलना में सुधार
एक पेटी का मतलब नौ लीटर शराब है। सीआईएबीसी भारतीय मादक पेय पदार्थ उद्योग का शीर्ष निकाय है। हालांकि सितंबर तिमाही के दौरान शराब की बिक्री में जून तिमाही की तुलना में सुधार आया है। आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के दौरान यानी अप्रैल से सितंबर तक देश भर में आईएमएफएल की बिक्री 1,220 लाख पेटी रही है। यह साल भर पहले की समान अवधि के 1,720 लाख पेटी की तुलना में 29.06 फीसदी कम है।
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इन राज्यों में आई अधिक गिरावट
उद्योग संगठन का कहना है कि दूसरी तिमाही में शराब की बिक्री में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन पहली तिमाही ने असल नुकसान किया है। पहली तिमाही के दौरान लॉकडाउन के चलते कुछ समय देश भर में शराब की बिक्री बंद रही थी। सीआईएबीसी के अनुसार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और राजस्थान जैसे राज्यों में शराब की बिक्री में अधिक गिरावट देखने को मिली। इसका कारण है कि इन राज्यों ने लॉकडाउन के बाद शराब की बिक्री शुरू होने पर कोरोना कर लगाया था। मालूम हो कि शराब उद्योग राज्य सरकारों के राजस्व में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का योगदान देता है। 
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कई राज्यों की 15-30 फीसदी आय शराब से ही होती है। शराब से राज्यों को 2019 में करीब 2.48 लाख करोड़ रुपये, 2018 में 2.17 लाख करोड़ रुपये और 2017 में 1.99 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। यानी 2019 के आंकड़ों के अनुसार, लॉकडाउन के पहले और दूसरे चरण में 40 दिनों के दौरान राज्यों को शराब से औसतन करीब 27 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। लॉकडाउन में एक दिन में राज्यों को औसतन करीब 679 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। 


बाजार शोध संस्था यूरोमेंटल इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में भारत में शराब उद्योग कारोबार लगभग दोगुना हुआ है। 20 से 25 वर्षों तक के युवा व्हिस्की और वोदका जैसे अलकोहल का सेवन अधिक कर रहे हैं।

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