{"_id":"62bebfafdaf4087af53311bc","slug":"indian-economy-manufacturing-hit-by-inflation-manufacturing-sector-activity-at-nine-month-low","type":"story","status":"publish","title_hn":"Indian Economy: मैन्युफैक्चरिंग पर महंगाई की मार, विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधि नौ महीने के निचले स्तर पर ","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Indian Economy: मैन्युफैक्चरिंग पर महंगाई की मार, विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधि नौ महीने के निचले स्तर पर
Fri, 01 Jul 2022 03:05 PM IST
विवेक दास
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विवेक दास
Updated Fri, 01 Jul 2022 03:05 PM IST
सार
मौसमी रूप से समायोजित एसएंडपी ग्लोबल इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जून में गिरकर 53.9 पर आ गया है यह मई में 54.6 था। इडेक्स में पिछले साल सितंबर के बाद से सबसे बड़ी कमजोरी देखी जा रही है।
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garment manufacturing Factory
- फोटो : Justdial
विस्तार
एक मासिक सर्वेक्षण में शुक्रवार को कहा गया है कि भारत में विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधि जून महीने में नौ महीने के निचले स्तर पर आ गई है, यह गिरावट महंगाई के दबाव के कारण कुल बिक्री और उत्पादन के घटने के कारण दर्ज की गई है।
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मौसमी रूप से समायोजित एसएंडपी ग्लोबल इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जून में गिरकर 53.9 पर आ गया है यह मई में 54.6 था। इडेक्स में पिछले साल सितंबर के बाद से सबसे बड़ी कमजोरी देखी जा रही है।
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जून महीने के पीएमआई डेटा ने लगातार बारहवें महीने में समग्र परिचालन स्थितियों में सुधार की ओर इशारा किया है। पीएमआई की आंकड़ों के अनुसार 50 से ऊपर के प्रिंट का मतलब विस्तार होता है जबकि 50 से नीचे के स्कोर का मतलब संकुचन होता है।
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एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंडेक्स के इकोनॉमिक्स एसोसिएट डायरेक्टर पोलियाना डे लिमा का मानना है कि भारतीय विनिर्माण उद्योग में वित्तीय वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में तीव्र मूल्य दबाव, बढ़ती ब्याज दरों, मुद्रा स्फीति, चुनौतीपूर्ण भू-राजनीतिक परिदृश्य के बावजूद एक ठोस आधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा है कि कारखानों के ऑर्डर और प्रोडक्शन में लगातार बारहवें महीने में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, पर मुल्य वृद्धि नौ महीने के निचले स्तर पर है।
आरबीआई की फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट में बताया गया है कि यूरोप में रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई के कारण ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक क्लियर नहीं है। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक महंगाई के दबाव को काम करने के लिए अपनी मौद्रिक नीति को सख्त बना रहे हैं।