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Survey: पहली तिमाही में आरबीआई के अनुमान से ज्यादा रह सकती है वृद्धि दर, खपत और मांग से तय होगा भविष्य
Fri, 29 Aug 2025 06:49 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला, बोनस टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला, बोनस टीम, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Fri, 29 Aug 2025 06:49 AM IST
सार
अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ लागू होने के बाद पहली तिमाही के मजबूत आंकड़ों से बाजार पूरे वित्त वर्ष की तस्वीर देखने की कोशिश करेगा। जीडीपी आंकड़ों में खास नजर निजी खपत और मांग पर होगी। वर्तमान स्थिति में यह देखना जरूरी होगा कि भारत ने निजी खपत और मांग के मोर्चे पर कैसा प्रदर्शन किया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
भारतीय अर्थव्यवस्था के बढ़ने की रफ्तार चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में आरबीआई के 6.5 फीसदी के अनुमान से ज्यादा रह सकती है। वहीं, अन्य एजेंसियों ने वृद्धि दर इससे ज्यादा रहने का अनुमान लगाया है। इक्रा ने पहली तिमाही के लिए 6.7 फीसदी का अनुमान दिया है। एसबीआई रिसर्च का अनुमान 6.8 से 7 फीसदी तक का है। रॉयटर्स के सर्वे के मुताबिक, पहली तिमाही की अर्थव्यवस्था की रफ्तार 6.7 फीसदी रह सकती है।
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सरकार पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़े शुक्रवार को शाम पांच बजे जारी करेगी। अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ लागू होने के बाद पहली तिमाही के मजबूत आंकड़ों से बाजार पूरे वित्त वर्ष की तस्वीर देखने की कोशिश करेगा। जीडीपी आंकड़ों में खास नजर निजी खपत और मांग पर होगी। वर्तमान स्थिति में यह देखना जरूरी होगा कि भारत ने निजी खपत और मांग के मोर्चे पर कैसा प्रदर्शन किया है। ऊंचे टैरिफ की वजह से घटते निर्यात के बीच अब घरेलू मांग एवं खपत ही अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि का समर्थन कर सकती है।
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पूंजीगत खर्च से अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
सरकारी पूंजीगत खर्च में सालाना 52 फीसद की उल्लेखनीय वृद्धि ने पहली तिमाही में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया है। इस खर्च ने नौकरियों के सृजन, बुनियादी ढांचे के विकास, सीमेंट, स्टील और इंजीनियरिंग सामानों की मांग को प्रोत्साहित किया है। केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च 2.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है। यह वृद्धि निजी क्षेत्र की निवेश में कमी को संतुलित करने में महत्वपूर्ण रहा है।
ग्रामीण मांग और कृषि में सुधार की उम्मीद
ग्रामीण क्षेत्रों में खपत में उछाल से शहरी मांग की कमजोरी संतुलित होने की उम्मीद है। अनुकूल मानसून और रिकॉर्ड फसल उत्पादन से ग्रामीण आय बढ़ी है, जिससे एफएमसीजी, कृषि उपकरण और ग्रामीण खुदरा क्षेत्र में तेजी आ सकती है।
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टैरिफ का आगे दिख सकता है असर
पहली तिमाही टैरिफ से ज्यादा प्रभावित नहीं हुई है, इसलिए अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन मजबूत रह सकता है। दूसरी तिमाही से पूरा असर होगा। इससे 2025-26 में वृद्धि दर घटकर 6.3 से 6.5 फीसदी के बीच रह सकती है। व्यापार तनाव और निजी निवेश में कमी का भी असर रहेगा।