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Cotton Imports: कपास आयात पर ड्यूटी-फ्री छूट दिसंबर 2025 तक बढ़ी, सरकार बोली- वैश्विक बाजार में मिलेगी ताकत
Thu, 28 Aug 2025 10:37 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 28 Aug 2025 10:37 PM IST
सार
भारत के कुल कपड़ा निर्यात में कपास आधारित वस्त्रों की हिस्सेदारी 33 फीसदी है। यही वजह है कि उच्च गुणवत्ता वाली कपास की लगातार आपूर्ति जरूरी है। सरकार ने कहा कि यह रणनीतिक कदम भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा और रोजगार, किसानों व उपभोक्ताओं- तीनों को लाभ पहुंचाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
केंद्र सरकार ने कपास के आयात पर लगने वाले शुल्क से छूट की अवधि 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दी है। सरकार का कहना है कि यह कदम भारत की कपड़ा और परिधान उद्योग को वैश्विक बाजारों में और प्रतिस्पर्धी बनाएगा, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों (एसएमई) के साथ-साथ निर्यात-उन्मुख इकाइयों को भी नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी।
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अमेरिका का दबाव और भारत की रणनीति
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगा दिया है। अमेरिका भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में सरकार का मानना है कि सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली कॉटन की उपलब्धता से भारत की निर्यात क्षमता मजबूत होगी और रोजगार सुरक्षित रहेंगे।
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रोजगार और उद्योग के लिए अहम
कपड़ा-परिधान उद्योग में करीब 4.5 करोड़ लोग काम करते हैं। स्थिर और किफायती कॉटन की आपूर्ति न केवल लाखों रोजगार बचाने में मदद करेगी, बल्कि उद्योग की वृद्धि को भी प्रोत्साहन देगी। सरकार ने कहा कि इस फैसले से धागा, कपड़ा, परिधान और होम-टेक्सटाइल (मेड-अप्स) बनाने वाले सभी निर्माता और उपभोक्ता राहत पाएंगे।
किसानों की सुरक्षा का दावा
केंद्र सरकार ने साफ किया कि ड्यूटी-फ्री आयात से घरेलू किसानों का नुकसान नहीं होगा। कपास किसानों के हित न्यूनतम समर्थन मूल्य तंत्र के जरिए सुरक्षित रहेंगे। कपास निगम किसानों को उनकी लागत से कम-से-कम 50 प्रतिशत अधिक दाम सुनिश्चित करता है। साथ ही, सरकार ने कहा कि वह कपास के दामों पर लगातार निगरानी रख रही है और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा उपाय तुरंत लागू किए जा सकते हैं।
यह भी पढ़ें - Mohan Bhagwat On US Tariffs: 'RSS नहीं बताएगा कि ट्रंप से कैसे निपटे सरकार', अमेरिकी टैरिफ पर भागवत की दो टूक
वैश्विक प्रतिस्पर्धा से किसानों को भी फायदा
भारत में पैदा होने वाली 95% कपास का उपयोग घरेलू कपड़ा उद्योग ही करता है। ऐसे में जब उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी, तो मिलें किसानों से बेहतर दाम पर कपास खरीदने की स्थिति में होंगी।
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अमेरिका का दबाव और भारत की रणनीति
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगा दिया है। अमेरिका भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में सरकार का मानना है कि सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली कॉटन की उपलब्धता से भारत की निर्यात क्षमता मजबूत होगी और रोजगार सुरक्षित रहेंगे।
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रोजगार और उद्योग के लिए अहम
कपड़ा-परिधान उद्योग में करीब 4.5 करोड़ लोग काम करते हैं। स्थिर और किफायती कॉटन की आपूर्ति न केवल लाखों रोजगार बचाने में मदद करेगी, बल्कि उद्योग की वृद्धि को भी प्रोत्साहन देगी। सरकार ने कहा कि इस फैसले से धागा, कपड़ा, परिधान और होम-टेक्सटाइल (मेड-अप्स) बनाने वाले सभी निर्माता और उपभोक्ता राहत पाएंगे।
किसानों की सुरक्षा का दावा
केंद्र सरकार ने साफ किया कि ड्यूटी-फ्री आयात से घरेलू किसानों का नुकसान नहीं होगा। कपास किसानों के हित न्यूनतम समर्थन मूल्य तंत्र के जरिए सुरक्षित रहेंगे। कपास निगम किसानों को उनकी लागत से कम-से-कम 50 प्रतिशत अधिक दाम सुनिश्चित करता है। साथ ही, सरकार ने कहा कि वह कपास के दामों पर लगातार निगरानी रख रही है और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा उपाय तुरंत लागू किए जा सकते हैं।
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वैश्विक प्रतिस्पर्धा से किसानों को भी फायदा
भारत में पैदा होने वाली 95% कपास का उपयोग घरेलू कपड़ा उद्योग ही करता है। ऐसे में जब उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी, तो मिलें किसानों से बेहतर दाम पर कपास खरीदने की स्थिति में होंगी।