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Airports: हवाई अड्डों को बेहद आलीशान बनाने और फिजूलखर्ची से बचे सरकार, जानिए संसदीय समिति ने क्यों दी ये सलाह
Sun, 06 Aug 2023 02:31 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 06 Aug 2023 02:31 PM IST
सार
समिति की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत एक संसाधनों की कमी वाला देश है। ऐसे में सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण और निजी कंपनियों द्वारा संचालित हवाई अड्डों का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास प्रभावी और किफायती लागत में होना चाहिए।
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राज्यसभा में पेश हुई रिपोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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संसद की एक समिति ने सिफारिश की है सरकार को देश के हवाई अड्डों को बेहद आलीशान बनाने और उन पर फिजूलखर्ची से बचना चाहिए। सरकार को कोशिश करनी चाहिए कि यात्री लागत आम आदमी की पहुंच में रहे। राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि हवाई सेवाओं के सबसे महत्वपूर्ण हितधारक आम नागरिक हैं, जिनकी हवाई यात्रा करने की आकांक्षा समय बीतने और अर्थव्यवस्था के विकास के साथ बढ़ेगी।
राज्यसभा में पेश हुई रिपोर्ट
संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र के अन्य हवाई अड्डों की तुलना में भारत के हवाई अड्डों में उपयोगकर्ता शुल्क किफायती और प्रतिस्पर्धी रहना चाहिए। बता दें कि समिति की यह रिपोर्ट राज्यसभा में पेश की गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत एक विकासशील देश है और यहां के यात्री कीमतों को लेकर काफी सचेत रहते हैं। हमारी राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति में किफायती और स्थिरता पर जोर दिया गया है। समिति ने रिपोर्ट में बताया कि ज्यादातर लोग हवाई अड्डों का इस्तेमाल सिर्फ यात्रा करने, सामान की जांच कराने, सामान वापस लेने के लिए ही करते हैं। इसलिए अन्य चीजों पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है और इसकी जगह यात्री सेवा को बेहतर करने की जरूरत है।
'बहुत आलीशान हवाई अड्डों से निर्माण से बचें'
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ये सच है कि हवाई अड्डों के आधारभूत ढांचे की गुणवत्ता अहम होती है क्योंकि यह देश में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और विदेशी निवेश में अहम योगदान देते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा इन्हें आलीशान बनाने से बचना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया कि एयरपोर्ट टर्मिनल आरामदायक बनाने पर फोकस होना चाहिए और यात्रा सुखद होनी चाहिए, निजी कंपनियों को बहुत ज्यादा आलीशान और महंगे हवाई अड्डों के निर्माण से बचना चाहिए।
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'भारत संसाधनों की कमी वाला देश'
समिति की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत एक संसाधनों की कमी वाला देश है। ऐसे में सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण और निजी कंपनियों द्वारा संचालित हवाई अड्डों का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास प्रभावी और किफायती लागत में होना चाहिए। तकनीक का इस्तेमाल कर संचालन की लागत को भी कम किया जाना चाहिए ताकि हवाई यात्रा आम आदमी की भी पहुंच में रहे। समिति का कहना है कि हवाई किराए में जबरदस्त वृद्धि के बावजूद अधिकतर भारतीय विमानन कंपनियां घाटे में चल रही हैं। यही वजह है कि लंबे समय तक परिचालन के लिए विमानन कंपनियों के लिए कम लागत में प्रभावी संचालन और स्थिरता बहुत जरूरी है।
राज्यसभा में पेश हुई रिपोर्ट
संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र के अन्य हवाई अड्डों की तुलना में भारत के हवाई अड्डों में उपयोगकर्ता शुल्क किफायती और प्रतिस्पर्धी रहना चाहिए। बता दें कि समिति की यह रिपोर्ट राज्यसभा में पेश की गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत एक विकासशील देश है और यहां के यात्री कीमतों को लेकर काफी सचेत रहते हैं। हमारी राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति में किफायती और स्थिरता पर जोर दिया गया है। समिति ने रिपोर्ट में बताया कि ज्यादातर लोग हवाई अड्डों का इस्तेमाल सिर्फ यात्रा करने, सामान की जांच कराने, सामान वापस लेने के लिए ही करते हैं। इसलिए अन्य चीजों पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है और इसकी जगह यात्री सेवा को बेहतर करने की जरूरत है।
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'बहुत आलीशान हवाई अड्डों से निर्माण से बचें'
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ये सच है कि हवाई अड्डों के आधारभूत ढांचे की गुणवत्ता अहम होती है क्योंकि यह देश में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और विदेशी निवेश में अहम योगदान देते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा इन्हें आलीशान बनाने से बचना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया कि एयरपोर्ट टर्मिनल आरामदायक बनाने पर फोकस होना चाहिए और यात्रा सुखद होनी चाहिए, निजी कंपनियों को बहुत ज्यादा आलीशान और महंगे हवाई अड्डों के निर्माण से बचना चाहिए।
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'भारत संसाधनों की कमी वाला देश'
समिति की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत एक संसाधनों की कमी वाला देश है। ऐसे में सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण और निजी कंपनियों द्वारा संचालित हवाई अड्डों का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास प्रभावी और किफायती लागत में होना चाहिए। तकनीक का इस्तेमाल कर संचालन की लागत को भी कम किया जाना चाहिए ताकि हवाई यात्रा आम आदमी की भी पहुंच में रहे। समिति का कहना है कि हवाई किराए में जबरदस्त वृद्धि के बावजूद अधिकतर भारतीय विमानन कंपनियां घाटे में चल रही हैं। यही वजह है कि लंबे समय तक परिचालन के लिए विमानन कंपनियों के लिए कम लागत में प्रभावी संचालन और स्थिरता बहुत जरूरी है।