2022 तक 50 अरब डॉलर का हो सकता है पर्यटन उद्योग: नीति आयोग के सीईओ
- विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर लक्ष्य पा सकता है उद्योग : कांत
- 28.6 अरब डॉलर की कमाई हुई थी पयर्टन से 2018 में
- 1.3 करोड़ रोजगार मिले इस क्षेत्र में 2014-18 के दौरान
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नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने बृहस्पतिवार को कहा कि 2022 तक भारत में पर्यटन उद्योग की सालाना कमाई 50 अरब डॉलर (करीब 3.56 लाख करोड़ रुपये) होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र का अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। विकास और रोजगार बढ़ाने में भी इसकी बड़ी भूमिका होती है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के ‘15वें सालाना पर्यटन सम्मेलन-2019’ में कांत ने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में पर्यटन क्षेत्र महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जो काफी रोजगार के अवसरों का सृजन कर सकता है। देश में पर्यटकों की संख्या बढ़ने से रोजगार बढ़ते हैं। यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा करता है। भारत को आज वृद्धि और रोजगार की सबसे अधिक जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि 2018 में पर्यटन से भारत को 28.6 अरब डॉलर की कमाई हुई थी। हमें इसे 2022 तक 50 अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य रखना चाहिए।
पर्यटकों की संख्या बढ़ाने पर हो जोर
कांत के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर पर्यटन से होने वाली कमाई में भारत की हिस्सेदारी महज 1.97 फीसदी है, जबकि पर्यटकों की आवाजाही में भारत का हिस्सा सिर्फ 1.2 फीसदी है। यह भारत जैसे विशाल देश के लिए बहुत मामूली है। उन्होंने कहा कि हमें इस हिस्सेदारी को 1.2 फीसदी से बढ़ाकर 3.5 फीसदी के स्तर पर ले जाना होगा, तभी 50 अरब डॉलर की कमाई के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। नीति के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को मदद दी है। होटल कमरों पर जीएसटी दरें घटाई गई हैं। होटल के 7,500 रुपये तक किराये वाले कमरों पर जीएसटी की दर को 18 से घटाकर 12 फीसदी किया है। 7,500 रुपये से अधिक किराये वाले कमरों पर जीएसटी दर को 28 से घटाकर 18 फीसदी किया गया है। 1,000 रुपये के किराये वाले कमरों पर कोई जीएसटी नहीं लगता है।
विकास में उद्योग और राज्यों की मदद जरूरी
नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र पूरी तरह निजी क्षेत्र है। इस क्षेत्र में पर्यटक के आने से लेकर उसके जाने तक की सभी गतिविधियां निजी क्षेत्र की ओर से की जाती हैं। पर्यटक ऑपरेटर, ट्रैवल एजेंट, टूरिस्ट गाइड, कैब परिचालक, रिजॉर्ट से लेकर होटल तक सभी निजी क्षेत्र चलाते हैं। सरकार केवल एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकती है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र उद्योग और राज्य सरकारों के सहयोग से आगे बढ़ेगा। ऐसे में सीआईआई इन दोनों के साथ मिलकर काम करने के साथ पर्यटन उद्योग के लिए सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल बनाए।
विदेशी मुद्रा लाने वाला तीसरा बड़ा क्षेत्र
सीआईआई के आंकड़ों के अनुसार, भारत में पर्यटन क्षेत्र का योगदान 9.2 फीसदी बढ़कर 240 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह देश में विदेशी मुद्रा लाने वाला तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। इस क्षेत्र 4.2 करोड़ लोगों को नौकरियां देता है, जो कुल रोजगार का 8.1 फीसदी है। वहीं, पर्यटन सचिव योगेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि इस क्षेत्र में 2014 से 2018 के बीच 1.3 करोड़ लोगों को नौकरियां मिलीं। इसके अलावा, विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार ने वीजा और ई-वीजा प्रणाली को सुविधाजनक बनाया। हालांकि, देश में टूरिस्ट गाइड के संबंध में बड़ी चुनौती है। सरकार उनके प्रशिक्षण और प्रमाणन के लिए प्रयास कर रही है।