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Tax: सीबीएएम के कारण भारत को GDP का .05 % नुकसान, रिपोर्ट में किया गया दावा

Thu, 18 Jul 2024 01:24 AM IST
विशांत श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Thu, 18 Jul 2024 01:24 AM IST
सार

सीबीएएम कर के कारण भारत के सकल घरेलू उत्पाद को 0.05 प्रतिशत का नुकसान होगा। यह दावा एक रिपोर्ट में किया गया है। 

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India to lose of GDP due to CBAM, should impose 'historical polluter tax' on EU: Report
Tax टैक्स - फोटो : istock

विस्तार

भारत से निर्यात किए जाने वाले कार्बन-सघन सामानों पर यूरोपीय संघ अतिरिक्त 25 प्रतिशत  कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) कर लगाएगा। यह बात बुधवार को एक रिपोर्ट में बताई गई है। रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के लिए ऐतिहासिक रूप से जिम्मेदार अमीर देशों पर जवाबी कर लगाने की भी सिफारिश की गई है।

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क्या है CBAM? 
सीबीएएम भारत और चीन जैसे देशों से आयातित लोहा, इस्पात, सीमेंट, उर्वरक और एल्यूमीनियम जैसे ऊर्जा-गहन उत्पादों पर यूरोपीय संघ का प्रस्तावित कर है।

थिंक टैंक - सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने "द ग्लोबल साउथ रिस्पॉन्स टू चेंजिंग ट्रेड रिजिम इन द एरा ऑफ क्लाइमेट चेंज’’ शीर्षक वाली रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक  सीबीएएम कर भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 0.05 प्रतिशत होगा।
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ये निष्कर्ष पिछले तीन वर्षों (2021-22, 2022-23 और 2023-24) के आंकड़ों पर आधारित हैं।यह कर वस्तुओं के उत्पादन के दौरान उत्पन्न कार्बन उत्सर्जन पर आधारित है।
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यूरोपीय संघ बोला- सख्त पर्यावरण मानकों का पालन होगा
यूरोपीय संघ का कहना है कि यह कर व्यवस्था घरेलू स्तर पर निर्मित वस्तुओं के लिए एक समान अवसर प्रदान करेगी। इसके साथ ही सख्त पर्यावरण मानकों का पालन करना होगा और आयात से उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है।

हालांकि इस कर व्यवस्था के कारण अन्य देश, विशेष रूप से विकासशील देश, चिंतित हैं। इन देशों का मानना है कि इस कर व्यवस्था से उनकी अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान होगा और इस गुट के साथ व्यापार करना बहुत महंगा हो जाएगा।

CBAM कर के कारण बहस छिड़ी
इस कदम ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलनों सहित बहुपक्षीय मंचों पर भी बहस छेड़ दी है। जिसमें विकासशील देशों का तर्क है कि संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन नियमों के तहत कुछ देश यह निर्देश नहीं दे सकते हैं कि दूसरे देशों को उत्सर्जन कैसे कम करना चाहिए।



CEA भी जता चुके हैं आपत्ति
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकसित देशों के कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था (सीबीएएम) जैसे उपाय विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए उचित नहीं हैं।

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