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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   India's GDP nearing to $20 trillion, per capital income at $10k by 2047, says Bibek Debroy

Bibek Debroy: देश में प्रति व्यक्ति आय 2047 तक 10 हजार डॉलर होगी, जीडीपी 20 हजार डॉलर के करीब पहुंच सकती है

Wed, 04 Jan 2023 08:02 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Wed, 04 Jan 2023 08:02 PM IST
सार

Bibek Debroy: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन विवेक देबरॉय ने बुधवार को कहा कि देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2047 तक 20,000 अरब डॉलर तथा प्रति व्यक्ति आय अमेरिकी मुद्रा के वर्तमान मूल्य पर 10,000 डॉलर हो जाएगी।

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India's GDP nearing to $20 trillion, per capital income at $10k by 2047, says Bibek Debroy
अर्थव्यवस्था जीडीपी - फोटो : pixabay

विस्तार

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष बिबेक देबरॉय ने बुधवार को कहा कि भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2047 तक 20,000 डॉलर के करीब पहुंच जाएगा। इससे देश में प्रति व्यक्ति आय 10,000 डॉलर (डॉलर के मौजूदा मूल्य पर) तक पहुंच सकती है।  

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देबरॉय हैदराबाद विश्वविद्यालय (यूओएच) में आयोजित इंडियन इकोनोमेट्रिक सोसाइटी (टीआईईएस) के 57वें वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को डिजिटल तरीके से संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कहा कि भले ही कोविड-19 महामारी बीत चुकी हो, लेकिन चीन में चीन में कोविड के लौटने, रूस-यूक्रेन संघर्ष, यूरोप और अमेरिका में विकास की आशंकाओं के कारण दुनिया भर में बहुत अनिश्चितता है। 
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देबरॉय के हवाले से आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘अमेरिकी मुद्रा के आज के मूल्य के हिसाब से वर्ष 2047 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 10,000 डॉलर होगी। जीडीपी का औसत आकार 20,000 अरब डॉलर होगा। यानी भारत एक परिवर्तित समाज होगा।’’
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उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों समेत लोगों को बुनियादी आवश्यकताएं प्रदान की गई हैं। भारत में कोविड बाद आर्थिक संकेतकों में सुधार हुआ है। हर कोई अब 2023-24 में वृद्धि दर और 2047 तक अर्थव्यवस्था की वृद्धि को देखना चाहता है।

देबरॉय ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध, यूरोप तथा अमेरिका में आर्थिक वृद्धि की संभावना जैसी चीजों से वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के कारण देश को विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार और पूंजी बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।


उन्होंने कहा, ‘‘भारत कोई इनसे अलग-थलग नहीं है। ऐसे में हमें भी अस्थिरता का सामना करना होगा। विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार, पूंजी बाजार और विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। मुद्रास्फीति पर भी इन अनिश्चितताओं का असर होगा।’’ देबरॉय ने कहा कि भारत को एक सरलीकृत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) और प्रत्यक्ष कर की आवश्यकता है। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर हर किसी को सोचना चाहिए।

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