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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   India's GDP growth to moderate to 6 quarter low of 6 pc in Q1: ICRA

ICRA का अनुमान: जीडीपी वृद्धि दर पहली तिमाही में 6% पर आ जाएगी, बीती छह तिमाहियों में यह सबसे कम

Thu, 22 Aug 2024 01:35 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 22 Aug 2024 01:35 PM IST
सार

ICRA: आईसीआरए को उम्मीद है कि पूरे वित्त वर्ष 2024-25 के लिए, जीडीपी 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जो 2023-24 की वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत से कम है। जून तिमाही की वृद्धि के आधिकारिक आंकड़े 30 अगस्त को  सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी किए जाएंगे।

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India's GDP growth to moderate to 6 quarter low of 6 pc in Q1: ICRA
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala

विस्तार

आईसीआरए ने गुरुवार को अनुमान जताया है कि सरकारी पूंजीगत व्यय में कमी और शहरी उपभोक्ता मांग कम होने के कारण अप्रैल-जून में भारत की आर्थिक वृद्धि दर छह तिमाहियों के निचले स्तर 6 प्रतिशत पर आ जाएगी। 

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आईसीआरए (Investment Information and Credit Rating Agency) को उम्मीद है कि पूरे वित्त वर्ष 2024-25 के लिए, जीडीपी 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जो 2023-24 की वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत से कम है। घरेलू रेटिंग एजेंसी ने एक बयान में कहा, "आईसीआरए ने सरकारी पूंजीगत व्यय में कमी और शहरी उपभोक्ता विश्वास में कमी के बीच, वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही में जीडीपी के साल-दर-साल (YoY) विस्तार को वित्त वर्ष 2024 की चौथी तिमाही के 7.8 प्रतिशत से छह तिमाहियों के निचले स्तर 6 प्रतिशत पर लाने का अनुमान लगाया है।" 
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जून तिमाही की वृद्धि के आधिकारिक आंकड़े 30 अगस्त को MoSPI (सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय) की ओर से जारी किए जाएंगे। 2023-24 की जून तिमाही (Q1)में वृद्धि  दर 8.2 प्रतिशत थी। ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में संसदीय चुनावों और केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर सुस्त सरकारी पूंजीगत व्यय के कारण कुछ क्षेत्रों में अस्थायी रूप से सुस्ती देखी गई। 
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इसके अलावा, उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण के अनुसार, शहरी उपभोक्ता विश्वास में आश्चर्यजनक गिरावट दर्ज की गई। इस बीच, पिछले साल के प्रतिकूल मानसून के लंबे समय तक चलने वाले प्रभाव और 2024 के मानसून की असमान शुरुआत ने ग्रामीण भावना में व्यापक सुधार को रोक दिया।

नायर के अनुसार, "कम मात्रा में वृद्धि और कमोडिटी की कीमतों में कमी ने कुछ औद्योगिक क्षेत्रों की लाभप्रदता को प्रभावित किया। गर्मी की लहर ने विभिन्न सेवा क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही को भी प्रभावित किया, हालांकि इस दौरान बिजली की मांग में महत्वपूर्ण इजाफा हुआ। नायर ने कहा, "संतुलन के आधार पर, हम वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही में भारत के जीवीए (सकल मूल्य वर्धित) और जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की वृद्धि में क्रमश: 5.7 प्रतिशत और 6 प्रतिशत की क्षणिक नरमी की उम्मीद करते हैं।" 


पूरे वित्त वर्ष 2025 के लिए, आईसीआरए को उम्मीद है कि जीडीपी और जीवीए वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक गतिविधि में इजाफा होगा और यह क्रमशः 6.8 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत रहेगी। विशेष रूप से, भारत सरकार के पूंजीगत व्यय के लिए काफी गुंजाइश है, जिसे पूरे वर्ष के बजट अनुमान को पूरा करने के लिए जुलाई-मार्च वित्त वर्ष 2025 में साल-दर-साल आधार पर 39 प्रतिशत तक बढ़ाने की जरूरत है। नायर ने कहा कि इससे वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में जीडीपी वृद्धि 7 प्रतिशत से ऊपर पहुंचने की उम्मीद है।

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