{"_id":"6756bc0e692f00795902f83a","slug":"india-s-cpi-inflation-likely-to-ease-to-5-5-pc-in-nov-from-6-2-pc-in-oct-morgan-stanley-2024-12-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Morgan Stanley: नवंबर में घटी खुदरा महंगाई; सीपीआई मुद्रास्फीति 5.5% पर आ सकती है, मॉर्गन स्टेनली का दावा","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Morgan Stanley: नवंबर में घटी खुदरा महंगाई; सीपीआई मुद्रास्फीति 5.5% पर आ सकती है, मॉर्गन स्टेनली का दावा
Mon, 09 Dec 2024 03:20 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Mon, 09 Dec 2024 03:20 PM IST
सार
Morgan Stanley: मॉर्गन स्टेनली ने अनुमान जताया है कि भारत में नवंबर की खुदरा महंगाई दर सूचकांक में क्रमिक गिरावट दर्ज की जाएगी, जिसका मुख्य कारण खाद्य कीमतों में राहत है। एक रिपोर्ट में कोर सीपीआई में गिरावट की ओर भी इशारा किया गया है।
विज्ञापन
भारतीय अर्थव्यवस्था।
- फोटो : amarujala
विस्तार
नवंबर महीने की खुदरा महंगाई दर के आकड़ों में नरमी दिख सकती है। मॉर्गन स्टेनली ने एक हालिया रिपोर्ट में यह दावा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति नवंबर में सालाना आधार पर 5.5 प्रतिशत तक घट सकती है, जबकि अक्तूबर में यह 6.2 प्रतिशत थी।
विज्ञापन
रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि मासिक सूचकांक में क्रमिक गिरावट दर्ज की जाएगी, जिसका मुख्य कारण खाद्य कीमतों में राहत है। रिपोर्ट में कोर सीपीआई में गिरावट की ओर भी इशारा किया गया है, जिसमें खाद्य और ईंधन को छोड़कर अन्य वस्तुएं और सेवाएं शामिल हैं।
विज्ञापन
मार्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है, "हमें उम्मीद है कि सीपीआई मुद्रास्फीति नवंबर में 6.2 प्रतिशत से घटकर 5.5 प्रतिशत हो जाएगी, जो अक्तूबर में 6.2 प्रतिशत थी। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में नरमी से मदद मिली है, भले ही कोर महंगाई दर में तेजी आई हो और ईंधन की कीमतों में गिरावट जारी रही हो।"
विज्ञापन
एजेंसी ने कहा कि क्रमिक आधार पर, हमें लगता है कि खाद्य कीमतों में कमी और कोर सीपीआई में गिरावट के कारण सूचकांक में गिरावट आएगी। मुद्रास्फीति में यह कमी नीति निर्माताओं और उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है, क्योंकि हाल के महीनों में उच्च खाद्य कीमतें मुद्रास्फीति में वृद्धि का एक प्रमुख कारण रही हैं। ईंधन की कीमतों में गिरावट ने गिरावट के रुझान को और मजबूत किया है, जिससे घरेलू बजट और व्यवसायों पर दबाव कम हुआ है।