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GDP: 'भारत को निर्यात में विविधता लाने और एफटीए वार्ता तेज करने की जरूरत', ईएसी-पीएम प्रमुख महेंद्र देव बोले

Fri, 31 Oct 2025 06:25 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Fri, 31 Oct 2025 06:25 PM IST
सार

अर्थशास्त्री एस महेंद्र देव ने कहा कि सुरक्षा नीतियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कमी के बावजूद, भारत के लिए विश्व वस्तु व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बहुत सारे अवसर हैं। उन्होंने निर्यात में विविधता लाने, एफटीए को तेज करने और अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखने पर जोर दिया।

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India needs to diversify exports and expedite FTA talks, says EAC-PM chief Mahendra Dev
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के अध्यक्ष एस महेंद्र देव ने निर्यात में विविधता लाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत तेज करनी चाहिए और अमेरिका के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को अंतिम रूप देने के लिए वाशिंगटन के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए।

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वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद भारत के पास बहुत अवसर

'प्रथम आईएसआईडी@40 विशिष्ट व्यक्ति व्याख्यान' को संबोधित करते हुए देव ने कहा कि सुरक्षा नीतियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कमी के बावजूद, भारत के लिए विश्व वस्तु व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बहुत सारे अवसर हैं।

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उन्होंने कहा कि जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, विनिर्माण के लिए भारत की व्यापार नीति एशिया, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, कुछ विकसित देशों में निर्यात में विविधता लाने, एफटीए को तेज करने और अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखने की होनी चाहिए।

अर्थशास्त्री की टिप्पणी है इस समय अहम 

अर्थशास्त्री ने कहा कि नियम-आधारित विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) सदैव संरक्षणवाद से बेहतर है। उनकी यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारत पर रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करने का दबाव बना रहा है। अमेरिका ने 22 अक्तूबर को रूस की दो सबसे बड़ी कच्चा तेल उत्पादक कंपनियों, रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगा दिए थे और सभी अमेरिकी संस्थाओं और व्यक्तियों के उनके साथ व्यापार करने पर रोक लगा दी थी।

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25 प्रतिशत का जुर्माना लगाया है। यह अमेरिकी बाजारों में प्रवेश करने वाले भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत के पारस्परिक शुल्क के अतिरिक्त है। कुल मिलाकर, भारतीय सामानों पर अमेरिका में 50 प्रतिशत का अतिरिक्त आयात शुल्क लग रहा है।

मध्यम स्तर की विनिर्माण इकाइयों पर जोर 

उन्होंने यह भी बताया कि भारत के आकार का कोई भी उभरता हुआ बाजार मजबूत निर्यात वृद्धि के बिना एक दशक या उससे अधिक समय तक 7 या 8 प्रतिशत की दर से नहीं बढ़ा है। देव ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में 200 से 500 श्रमिकों वाली कई मध्यम स्तर की विनिर्माण इकाइयां होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में, अन्य बातों के अलावा, बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश कम्पनियां 10 से कम श्रमिकों के साथ काम कर रही हैं और उनका आकार छोटा है।

2043 तक जीडीपी में भारत की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी का अनुमान 

उन्होंने कहा कि 1700 ई. में विश्व सकल घरेलू उत्पाद में भारत की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत थी। कुछ अनुमानों से पता चलता है कि 2043 तक विश्व सकल घरेलू उत्पाद में भारत की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत हो जाने की संभावना है। देव ने कहा कि सुधारों के बाद के पिछले तीन दशकों में भारत की औसत वृद्धि दर 6 से 6.5 प्रतिशत प्रति वर्ष रही है।

निवेश दर को बढ़ाने पर फोकस 

निवेश दर को विकास का चालक बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत को 7 प्रतिशत विकास दर प्राप्त करने के लिए निवेश दर को वर्तमान 31 से 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 34 से 35 प्रतिशत करने की आवश्यकता है। निजी क्षेत्र को भारत में अधिक निवेश करना चाहिए क्योंकि अब दोहरी बैलेंस शीट की कोई समस्या नहीं है।देव ने कहा कि सरकारी पूंजीगत व्यय बढ़ रहा है। इसका गुणक प्रभाव होगा। साथ ही ग्रामीण और शहरी मांग में वृद्धि से निजी निवेश में वृद्धि होगी।

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