{"_id":"65316020cc6e1183fa0e7d18","slug":"india-need-reliable-data-based-policies-indermit-gill-world-bank-chief-economist-2023-10-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"World Bank: 'भारत में भरोसेमंद डेटा आधारित नीतियों की जरूरत', अर्थशास्त्री इंदरमीत गिल ने क्यों कहा ऐसा? जानिए","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
World Bank: 'भारत में भरोसेमंद डेटा आधारित नीतियों की जरूरत', अर्थशास्त्री इंदरमीत गिल ने क्यों कहा ऐसा? जानिए
Thu, 19 Oct 2023 10:28 PM IST
ज्योति भास्कर
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 19 Oct 2023 10:28 PM IST
सार
विश्व बैंक के बड़े अधिकारी और अर्थशास्त्री ने भारत जैसे देशों में विश्वसनीय डेटा पर आधारित नीतियों की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लिए किए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की।
विज्ञापन
विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंदरमीत गिल
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंदरमीत गिल ने कहा, भारत जैसे मध्यम आय वाले देशों में डेटा भरोसेमंद होने चाहिए। ऐसे आंकड़ों पर आधारित नीतियों की मदद से ही अगले 3-4 दशकों में भारत उच्च आय वाले देशों की श्रेणी में शामिल हो सकता है। गिल ने कहा कि विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर नीतियां नहीं बनाने पर सतत विकास हासिल करना कठिन हो जाएगा।
गिल ने कहा, उच्च आय वाले देशों में विकसित होने के लिए एमसीआई (मध्यम आय वाले देशों) को अपनी मध्यम आकार की कंपनियों में घाटे को कम करना होगा। उन्होंने कहा, "(आगे चलकर) भारत जैसे मध्यम आय वाले देशों के लिए आर्थिक विकास कठिन होगा, आसान नहीं।" उन्होंने दोहराया कि अगर अगले 3-4 दशकों में उच्च आय वाले देशों की सूची में शामिल होना चाहते हैं तो विश्वसनीय जानकारी के आधार पर नीतियां बनानी होंगी।"
उन्होंने कहा, पिछले तीन दशकों- (1990 और 2021 के बीच) के दौरान अपेक्षाकृत कुछ देश (31) उच्च आय वाले देशों के तौर पर विकसित हुए हैं। विश्व बैंक के अनुसार, दुनिया के मध्यम आय वाले देश (एमआईसी) आकार, जनसंख्या और आय स्तर के हिसाब से एक विविध समूह हैं।
विज्ञापन
ऐसे देशों को निम्न मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के रूप में परिभाषित किया गया है - जहां प्रति व्यक्ति GNI (सकल राष्ट्रीय आय) USD 1,036 और अमेरिकी डॉलर (USD) 4,045 के बीच है। उच्च मध्यम-आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में प्रति व्यक्ति GNI USD 4,046 और USD 12,535 के बीच है।
मध्यम आय वाले देशों (एमआईसी) में विश्व की 75 प्रतिशत आबादी और 62 प्रतिशत विश्व के गरीब रहते हैं। एमआईसी वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक तिहाई प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक विकास के प्रमुख इंजन हैं। 12,000 अमेरिकी डॉलर से अधिक की प्रति व्यक्ति आय (वार्षिक) वाले देशों को उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के रूप में परिभाषित किया गया है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। वित्त मंत्रालय का दावा है कि 2014 में पीएम मोदी की सरकार बनने के बाद आर्थिक नीतियों के आधार पर भारत ने लंबी छलांग लगाई है। भारत फिलहाल दुनिया में पांचवें नंबर की अर्थव्यस्था है।
विज्ञापन
गिल ने कहा, उच्च आय वाले देशों में विकसित होने के लिए एमसीआई (मध्यम आय वाले देशों) को अपनी मध्यम आकार की कंपनियों में घाटे को कम करना होगा। उन्होंने कहा, "(आगे चलकर) भारत जैसे मध्यम आय वाले देशों के लिए आर्थिक विकास कठिन होगा, आसान नहीं।" उन्होंने दोहराया कि अगर अगले 3-4 दशकों में उच्च आय वाले देशों की सूची में शामिल होना चाहते हैं तो विश्वसनीय जानकारी के आधार पर नीतियां बनानी होंगी।"
विज्ञापन
उन्होंने कहा, पिछले तीन दशकों- (1990 और 2021 के बीच) के दौरान अपेक्षाकृत कुछ देश (31) उच्च आय वाले देशों के तौर पर विकसित हुए हैं। विश्व बैंक के अनुसार, दुनिया के मध्यम आय वाले देश (एमआईसी) आकार, जनसंख्या और आय स्तर के हिसाब से एक विविध समूह हैं।
विज्ञापन
ऐसे देशों को निम्न मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के रूप में परिभाषित किया गया है - जहां प्रति व्यक्ति GNI (सकल राष्ट्रीय आय) USD 1,036 और अमेरिकी डॉलर (USD) 4,045 के बीच है। उच्च मध्यम-आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में प्रति व्यक्ति GNI USD 4,046 और USD 12,535 के बीच है।
मध्यम आय वाले देशों (एमआईसी) में विश्व की 75 प्रतिशत आबादी और 62 प्रतिशत विश्व के गरीब रहते हैं। एमआईसी वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक तिहाई प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक विकास के प्रमुख इंजन हैं। 12,000 अमेरिकी डॉलर से अधिक की प्रति व्यक्ति आय (वार्षिक) वाले देशों को उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के रूप में परिभाषित किया गया है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। वित्त मंत्रालय का दावा है कि 2014 में पीएम मोदी की सरकार बनने के बाद आर्थिक नीतियों के आधार पर भारत ने लंबी छलांग लगाई है। भारत फिलहाल दुनिया में पांचवें नंबर की अर्थव्यस्था है।