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Inflation: चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर RBI के अनुमान से भी कम रहने के आसार, SBI ने कहा- बेहतर कारकों से मदद
Fri, 03 Oct 2025 05:51 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 03 Oct 2025 05:51 AM IST
सार
एक अनुमान के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुमान से भी कम रहेगी। एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक महंगाई दर नीचे रहने का प्रमुख कारण बेहतर कारकों से मिलने वाली अनुमानित मदद है। क्रिसिल का रुख भी सकारात्मक है। जानिए विस्तार से
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चालू वित्त वर्ष में महंगाई काबू में रहने का अनुमान (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ANI
विस्तार
देश में महंगाई दर चालू और अगले वित्त वर्ष के लिए भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के अनुमान से कम रहेगी। एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई में कमी आने के कई कारण हैं। इसमें मानसून की अच्छी प्रगति, मजबूत जलाशय स्तर, खाद्यान्न के पर्याप्त भंडार और जीएसटी सुधार है। यह सभी कारक मिलकर उम्मीद से अधिक तेजी से महंगाई को कम रहे हैं।
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आरबीआई ने 2025-26 के लिए खुदरा महंगाई दर के अनुमान को 0.50 फीसदी घटाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया है। यह अप्रैल के अनुमान से 1.6 फीसदी कम है। हालांकि, एसबीआई रिसर्च का मानना है कि 2025-26 और 2026-27 में महंगाई दर उम्मीद से कम रहेगी। आरबीआई ने हाल में अपने अनुमान में बताया, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून, 2026 में महंगाई 4.5 प्रतिशत रह सकती है। वैश्विक अनिश्चितताओं और अस्थिर बाजारों को देखते हुए मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय तर्कसंगत है।
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मुद्रास्फीति चिंता का मुख्य विषय नहीं : क्रिसिल
जीएसटी दरों में कटौती और कच्चे तेल की कम कीमतों के कारण इस वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति चिंता का मुख्य विषय नहीं है। क्रिसिल के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के दरों में कटौती की शुरुआत ने आरबीआई के लिए कटौती की गुंजाइश बढ़ा दी है। 2025 के बाकी बचे समय में अमेरिकी केंद्रीय बैंक दो और कटौती कर सकता है। आरबीआई एक बार दरें घटा सकता है। जीएसटी सुधार से मुद्रास्फीति में राहत मिलेगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादक इस कटौती का लाभ उपभोक्ता कीमतों पर कब डालते हैं। इससे मुद्रास्फीति में महत्वपूर्ण कमी आने की संभावना है। अनुमान है कि ब्रेंट क्रूड इस वित्त वर्ष में औसतन 62-67 डॉलर प्रति बैरल रहेगा।
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क्रिसिल ने कहा, एमपीसी अब तक विकास से संतुष्ट दिख रही है। हो सकता है कि वह विकास के लिए नकारात्मक जोखिम सामने आने पर कदम उठाने के लिए अपनी मौद्रिक नीति की गुंजाइश बचा रही हो। मुद्रास्फीति की अनुकूल संभावनाएं मौद्रिक नीति को अधिक उदार बनाने के लिए खुला रखती हैं।