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एक्सप्लेनर: 158 साल पुराने समूह का बोर्डरूम ड्रामा, जानें टाटा संस की खींचतान बाहर आने से पहले क्या-क्या हुआ

Sat, 19 Sep 2026 02:30 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 19 Sep 2026 02:30 PM IST
सार

टाटा संस के बोर्डरूम में चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार और आईपीओ को लेकर उपजे भारी विवाद की पूरी कहानी पढ़ें। जानिए 24 घंटे में बोर्डरूम के भीतर क्या-क्या हुआ। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।

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Power Struggle at Tata Sons: The 24-Hour Boardroom Drama Exposing Deep Rifts in the Conglomerate
टाटा में बोर्डरूम ड्रामा - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारतीय कॉरपोरेट जगत के सबसे प्रतिष्ठित 158 साल पुराने टाटा समूह में नियंत्रण और भविष्य की दिशा को लेकर एक अभूतपूर्व वर्चस्व की जंग छिड़ गई है। टाटा संस की एक महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक के दौरान उठे विवाद ने टाटा संस के बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के बीच गहरी दरार को उजागर कर दिया है। महज 24 घंटों के भीतर घटे घटनाक्रम ने देश के सबसे बड़े कारोबारी घराने में एक बड़े सार्वजनिक विवाद का रूप ले लिया, जो अब अदालती लड़ाई और सरकार की दखल तक पहुंचने के मुहाने पर खड़ा है।

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बोर्डरूम की बैठक में विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

24 घंटे के इस नाटकीय घटनाक्रम की शुरुआत टाटा संस की बोर्ड बैठक से हुई। बैठक के शुरुआती आधे घंटे में तिमाही प्रदर्शन और खातों जैसे सामान्य व्यावसायिक विषयों पर शांतिपूर्ण चर्चा की गई। हालांकि, जैसे ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई के लिस्टिंग (सूचीबद्धता) संबंधी निर्देशों का मुद्दा उठा, माहौल का तनाव अचानक बढ़ गया।

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टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन, जो पिछले एक दशक से कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं और जिन्होंने कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने के संकेत दिए थे, ने इस साल की शुरुआत में सर्वसम्मति न बनने पर पद छोड़ने का फैसला किया था। लेकिन बोर्ड बैठक में अचानक एक ऐसा मोड़ आया जब बोर्ड के सदस्यों ने 4-1 के बहुमत से चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पांच और वर्षों के लिए बढ़ाने और आईपीओ की दिशा में कदम उठाने का फैसला किया।

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Power Struggle at Tata Sons: The 24-Hour Boardroom Drama Exposing Deep Rifts in the Conglomerate
टाटा संस बनाम टाटा ट्रस्ट्स - फोटो : amarujala.com

नोएल टाटा ने आईपीओ के खिलाफ क्या विकल्प रखे?

टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख नोएल टाटा ने आईपीओ का कड़ा विरोध किया और बिना आवाज उठाए पूरी शांति के साथ अपना तर्कसंगत पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि कंपनी का आईपीओ लाना अनिवार्य नहीं है और इसके विकल्प तलाशे जाने चाहिए। नोएल टाटा ने प्रस्ताव रखा कि टाटा संस को आरबीआई के पास जाकर अपना पक्ष रखना चाहिए और गैर-सूचीबद्ध रहने के सभी कानूनी रास्ते अपनाने चाहिए। यदि यह प्रयास विफल होता है, तो वित्तीय और कॉरपोरेट तैयारियों के लिए कम से कम तीन साल का अतिरिक्त समय मांगा जाए।

आईपीओ से बचने के लिए उन्होंने शापूरजी पालोनजी समूह की 18.4% हिस्सेदारी में से कुछ हिस्सा टाटा संस द्वारा खरीदने का प्रस्ताव दिया। इस योजना के तहत 18 महीनों में दो किश्तों में एसपी समूह को कम से कम 250 अरब रुपये (2.6 अरब डॉलर) नकद दिए जा सकते थे। इस बायबैक का वित्तपोषण आंतरिक नकदी, सूचीबद्ध टाटा कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री और नई संपत्तियों में बाहरी निवेश से करने का सुझाव दिया गया।

चेयरमैन के कार्यकाल विस्तार के बारे में क्या चर्चा हुई?

बैठक में जब नामांकन और पारिश्रमिक समिति के अध्यक्ष मनवानी ने चंद्रशेखरन का कार्यकाल पांच साल बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, तो चंद्रशेखरन खुद को चर्चा से अलग रखते हुए कमरे से बाहर चले गए। नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव का यह कहते हुए विरोध किया कि चंद्रशेखरन द्वारा 12 अगस्त को पद छोड़ने की घोषणा को स्वीकार किया जा चुका है और अब यह पन्ना पलट चुका है। 

नोएल टाटा ने टाटा संस के नियमों के आर्टिकल 121 का हवाला दिया, जिसके अनुसार चेयरमैन की नियुक्ति के लिए टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नामांकित निदेशकों के बहुमत का समर्थन जरूरी है। हालांकि, ट्रस्ट्स के दो नामांकित निदेशकों के बीच विभाजन हो गया- नोएल टाटा ने विस्तार का विरोध किया जबकि श्रीनिवासन ने इसका समर्थन किया, जिससे ट्रस्ट का वोट 1-1 से टाई हो गया। इसके बावजूद, बोर्ड ने नोएल टाटा के विरोध को दरकिनार करते हुए 4-1 के वोट से चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ा दिया।

Power Struggle at Tata Sons: The 24-Hour Boardroom Drama Exposing Deep Rifts in the Conglomerate
एन, चंद्रशेखरन। - फोटो : अमर उजाला

24 घंटे के भीतर कैसे बढ़ा टाटा ट्रस्ट्स का आक्रामक रुख?

बोर्ड बैठक समाप्त होने तक मीडिया में नोएल टाटा बॉम्बे हाउस से बाहर जाने खबरें आने लगीं और चंद्रशेखरन को सेवा विस्तार दिए जाने की खबरें सामने आने लगीं। इसके जवाब में नोएल टाटा और उनकी टीम ने देर रात तक आक्रामक काउंटर-ऑफेंसिव चलाया। शाम 4:30 बजे संवाददाताओं को पहला ईमेल भेजा गया। रात 9:15 बजे तक टाटा ट्रस्ट्स ने एक के बाद एक पांच विस्तृत प्रेस विज्ञप्तियां जारी कर दीं। टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार को गैर-कानूनी और कानूनी रूप से पूरी तरह अमान्य करार दिया।

इस कॉरपोरेट जंग का आगे क्या असर होगा?

यह विवाद केवल प्रेस बयानों तक सीमित नहीं रहा; नोएल टाटा और उनकी कानूनी टीम बोर्ड के फैसलों को अदालत में चुनौती देने के लिए वरिष्ठ वकीलों से परामर्श कर रही है। वहीं, चंद्रशेखरन की निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्ति को अभी टाटा संस की आगामी एजीएममें शेयरधारकों की मंजूरी मिलना बाकी है। इस अंदरूनी खींचतान का सीधा असर शेयर बाजार पर भी देखा गया, जहां टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों में आईपीओ की उम्मीद से आई शुरुआती तेजी बयानों के युद्ध के बाद थम गई और शेयर नीचे आ गए।

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