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भारत की तरफ देख रहीं चीन से निकलने वाली कंपनियां, सरकार बनाएगी नई नीति: सीतारमण

Sun, 20 Oct 2019 04:07 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Sun, 20 Oct 2019 04:07 PM IST
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India expresses disappointment over lack of support for IMF quota increase
Nirmala Sitharaman - फोटो : ANI

चीन से निकलकर भारत में निवेश का इरादा रखने वाली कंपनियों के लिए केंद्र सरकार अलग से नीति बनाने की तैयारी में है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि चीन से बाहर निकलने वाले उद्योग, निश्चित रूप से भारत की तरफ देख रहे हैं। अब सरकार के लिए उनके साथ कदम मिलाना जरूरी है। मैं इसके लिए नीति तैयार करके उनसे संपर्क करूंगी और उन्हें बताऊंगी कि भारत किस तरह उनके लिए ज्यादा अनुकूल स्थान हो सकता है।

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सीतारमण ने आगे कहा, भारत निवेश के लिए सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है। जो कंपनियां वियतनाम में काम कर रही हैं, अब वहां कारोबार विस्तार के हिसाब से मैन पॉवर उपलब्ध नहीं है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर सीतारमण ने कहा कि दोनों देशों के बीच जल्द व्यापार समझौता हो सकता है। 
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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में शनिवार को अमेरिकी वित्त मंत्री स्टीवन न्यूकिन से मुलाकात के बाद सीतारमण ने कहा कि दोनों देश की सरकारें व्यापार समझौते पर तेज गति से काम कर रही हैं और जल्द ही मुद्दे पर कुछ सहमति बन सकती है।

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आईएमएफ में कोटा नहीं बढ़ना भारत के लिए झटका

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ( IMF ) से भारत का कोटा नहीं बढ़ने से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निराशा व्यक्त की। इस संदर्भ में आईएमएफ की सालाना बैठक को संबोधित करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि, 'कोटा की 15वीं आम समीक्षा के तहत कोटा बढ़ाने के पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाने को भारत निराशाजनक मानता है।'

अगले दौर की चर्चा में सफलता की उम्मीद

आगे उन्होंने कहा कि इसे भारत तात्कालिक झटका मानता है और उन्हें उम्मीद है कि अगले दौर की चर्चा में कोटा बढ़ाने के संबंध में भारत को सफलता प्राप्त होगी। 

चार सूत्रीय विधि से होता है वितरण 

बता दें कि आईएमएफ कोटा उसके कोष का मुख्य सोर्स है और इसका वितरण चार सूत्रीय विधि से किया जाता है। इसमें सदस्य देश की जीडीपी, आर्थिक विविधता और अंतरराष्ट्रीय भंडार पर गौर किया जाता है।

पांच साल में एक बार होती है समीक्षा 

जब कोई देश आईएमएफ का सदस्य बनता है, तो उसके आर्थिक आकार और विशेषताओं वाले अन्य सदस्यों को मिले कोटे के आसपास ही उसे शुरुआती कोटा दिया जाता है। इसकी समीक्षा पांच साल में एक बार होती है। आईएमएफ में भारत का कोटा 2.76 फीसदी है। वहीं चीन और अमेरिका का कोटा क्रमश: 6.41 और 17.46 फीसदी है। आईएमएफ के सदस्य देश को मिला कोटा कोष में उसकी अधिकतम वित्तीय प्रतिबद्धता और वोटिंग पावर जैसी अन्य चीजें तय करता है। 

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