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भारत का पलटवार: रूसी तेल सौदे को लेकर अमेरिका की टिप्पणी का दिया जवाब, कहा-'इस मामले पर राजनीति न करें'
Fri, 18 Mar 2022 02:06 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Fri, 18 Mar 2022 02:06 PM IST
सार
India Counters US Jibe Over Russian Oil Deal: भारत ने रूस से करीब 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल आयात करने के कदम पर अमेरिका की ओर से की गई टिप्पणी का जवाब दिया है। एक रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों ने कहा है कि भारत-रूस तेल सौदे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेल आयात करने वाले देश प्रतिबंधात्मक व्यापार की वकालत नहीं कर सकते।
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कच्चा तेल
- फोटो : pixabay
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विस्तार
भारत ने रूस से करीब 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल आयात करने के कदम पर अमेरिका की ओर से की गई टिप्पणी का जवाब दिया है। सरकारी सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अमेरिका से सख्त लहजे में कहा है कि 'इस मामले पर राजनीति करें'।
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ऊर्जा लेन-देन का न हो राजनीतिकरण
सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारत के वैध ऊर्जा लेन-देन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेल आत्मनिर्भरता वाले देश या जो स्वयं रूस से आयात करते हैं, वे विश्वसनीय रूप से प्रतिबंधात्मक व्यापार की वकालत बिल्कुल भी नहीं कर सकते। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है। कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 85 फीसदी (प्रति दिन 5 मिलियन बैरल) आयात करना पड़ता है।
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ऐेसे प्रस्तावों का हमेशा स्वागत
रिपोर्ट में बताया गया कि भारत कच्चे तेल का अधिकांश आयात पश्चिम एशिया (इराक 23 फीसदी, सऊदी अरब 18 फीसदी, संयुक्त अरब अमीरात 11 फीसदी) से होते हैं। इसमें कहा गया कि भारत को प्रतिस्पर्धी ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करते रहना होगा। हम सभी निर्माताओं के ऐसे प्रस्तावों का स्वागत करते हैं। भारतीय व्यापारी भी सर्वोत्तम विकल्प तलाशने के लिए वैश्विक ऊर्जा बाजारों में काम करते हैं। अमेरिका भी अब भारत (7.3 फीसदी) के साथ कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। चालू वर्ष में अमेरिका से आयात में काफी वृद्धि होने की संभावना है।
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अमेरिका ने की थी यह टिप्पणी
सूत्रों ने कहा कि रूसी तेल/गैस विभिन्न देशों, विशेषकर यूरोप द्वारा प्राप्त किया जा रहा है। रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 75 फीसदी ओईसीडी यूरोप को है। यूरोपीय देश (जैसे नीदरलैंड, इटली, पोलैंड, फिनलैंड, लिथुआनिया, रोमानिया) भी रूसी कच्चे तेल के बड़े आयातक हैं। गौरतलब है कि किफायती रूसी तेल समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए, अमेरिका ने मंगलवार को कहा था कि भले ही भारत अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं करेगा, लेकिन यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को इतिहास के गलत पक्ष में डाल देगा।
तेल की कीमतों ने बढ़ाई चुनौतियां
यूक्रेन संघर्ष के बाद तेल की कीमतों में उछाल ने हमारी चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। प्रतिस्पर्धी सोर्सिंग के लिए दबाव स्वाभाविक रूप से बढ़ गया है। भारत के लिए रूस कच्चे तेल का मामूली आपूर्तिकर्ता रहा है (हमारी आवश्यकता का 1% से भी कम)। भू-राजनीतिक विकास ने हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश की हैं। स्पष्ट कारणों से हमें ईरान और वेनेजुएला से सोर्सिंग बंद करनी पड़ी है। सूत्रों ने कहा कि वैकल्पिक स्रोत अक्सर उच्च लागत पर आते हैं, ऐसे में रूस ने अपने कच्चे तेल को सस्ते में बेचने और बीमा और परिवहन की लागत वहन करने की पेशकश की थी। इसके बाद, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने मई डिलीवरी के लिए व्यापारी विटोल के साथ 30 लाख बैरल रूसी यूराल के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।