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आयकर: पूर्व तारीख से कर वसूली का प्रावधान खत्म होगा, वोडाफोन व केयर्न मामले से लिया सबक

Thu, 05 Aug 2021 06:44 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 05 Aug 2021 06:44 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने वित्तीय कानून 2012 में संशोधन के लिए महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया है। इसके जरिए लेन-देन पर पिछली तारीख से कर वसूली के प्रावधान को खत्म किया जाएगा।

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Income Tax: Provision for recovery of tax from the retrospective effects  will end, lessons learned from Vodafone and Cairn case
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI

विस्तार

वोडाफोन व केयर्न मामले से सबक लेकर केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में वित्त विधेयक -2012 में संशोधन का महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर दिया। इसके माध्यम से किसी लेनदेन पर पिछली तारीख से कर वसूली के सख्त प्रावधान को खत्म किया किया जाएगा। 

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सरकार ने संशोधन विधेयक में प्रस्ताव किया है कि यदि कोई लेनदेन 28 मार्च 2012 के पहले किया गया है तो पूर्व तिथि से कर वसूली की कोई मांग नहीं की जाएगी। सरकार ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसमें प्रावधान किया गया है कि 28 मई 2012 के पूर्व किए गए किसी भी भारतीय संपत्ति के अप्रत्यक्ष हस्तांतरण पर भविष्य में पिछली तारीख से कर वसूली नहीं की जा सकेगी। बीते कुछ वर्षों में देश में कई वित्तीय व बुनियादी ढांचे संबंधी सुधार किए गए हैं। इससे देश में निवेश के प्रति सकारात्मक माहौल बना है। 
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असल बात यह है कि सरकार को यह संशोधन इसलिए करना पड़ रहा है क्योंकि वोडाफोन व केयर्न के मामले को लेकर क्षमतावान निवेशक के मन में संशय पैदा हो गया था। कोविड-19 से उत्पन्न हालात को देखते हुए अर्थव्यवस्था में त्वरित सुधार जरूरी है। ऐसे में ऐसे प्रावधान, जिनसे निवेशकों में संशय हो, उन्हें हटाया जा रहा है। 
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वोडाफोन मामले में क्या हुआ था
2012 में सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन समूह के मामले में कहा था कि आयकर कानून 1061 की समूह द्वारा की गई व्याख्या सही है। हिस्सेदारी खरीदने के लिए उसे कोई कर चुकाने की जरूरत नहीं है। इस पर तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वित्त विधेयक 2012 के जरिए कोर्ट के उक्त आदेश को नाकाम कर दिया था। इस विधेयक के जरिए आयकर कानून को ऐसे लेन-देन के मामलों में पूर्व तारीख से कर वसूली का अधिकार मिल गया था। मुखर्जी द्वारा लाए गए विधेयक को संसद ने मंजूरी दे दी थी। इससे वोडाफोन पर फिर कर चुकाने की जिम्मेदारी आ गई थी। 


यह है केयर्न का मामला
वोडाफोन जैसा ही मामला स्कॉटलैंड की फर्म केयर्न एनर्जी पीएलसी का भी था। उसने भी इसी तरह से शेयर ट्रांसफर किए थे। वह 1994 में भारत के तेल व गैस क्षेत्र में उतरी थी। उसने भारी निवेश किया था। इसके एक दशक बाद राजस्थान में भारी मात्रा में तेल व गैस मिली थी। कंपनी ने 2006 में अपनी भारतीय संपत्तियां बीएसई में सूचीबद्ध की। इसके पांच साल बाद सरकार ने ऐसे मामले में पिछले प्रभाव से कर वसूली का कानून बना दिया और केयर्न को 10,247 करोड़ का टैक्स नोटिस भेजा गया। उसकी संपत्ति जब्त कर ली गई। हालांकि केयर्न ने इसे हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण में चुनौती दी। न्यायाधिकरण ने दिसंबर 2020 में भारत सरकार पर 12,600 करोड़ का हर्जाना, लागत व ब्याज लगा दिया। 

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