सुविधा: अब ई-मेल से दूर होंगी करदाताओं की शिकायतें, आयकर विभाग ने दी राहत
आयकर विभाग ने फेसलेस टैक्स असेसमेंट, फेसलेस पेनल्टी और फेसलेस अपील से संबंधित शिकायतों के लिए तीन ई-मेल आईडी की सुविधा शुरू की है।
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करदाताओं तो बेहतर सुविधाएं प्रदार करने के लिए सरकार आए दिन कोई न कोई बदल्व करती रहती है। अब सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए इनकम टैक्स विभाग ने एक सराहनीय कदम उठाया है। आयकर विभाग ने करदाताओं के चार्टर के साथ डेडिकेटेड ई-मेल आईडी की सुविधा शुरू कर दी है।
यानी करदाता अब ई-मेल आईडी के जरिए भी फेसलेस टैक्स असेसमेंट, फेसलेस पेनल्टी और फेसलेस अपील से संबंधित शिकायत दर्ज कर सकेंगे। आइए जानते हैं ये ई-मेल आईडी कौन सी हैं-
- फेसलेस असेसमेंट के लिए: samadhan.faceless.assessment@incometax.gov.in
- फेसलेस पेनल्टी के लिए: samadhan.faceless.penalty@incometax.gov.in
- फेसलेस अपील के लिए: samadhan.faceless.appeal@incometax.gov.in
In a move aimed to further improve taxpayer services in alignment with the Taxpayers’ Charter, the Income Tax Department creates dedicated e-mail ids for registering grievances in respect of pending cases under the Faceless Scheme.(1/2)@nsitharamanoffc@mppchaudhary@FinMinIndia
— Income Tax India (@IncomeTaxIndia) August 7, 2021
अगस्त 2020 में पीएम मोदी ने की थी शुरुआत
5 जुलाई, 2019 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पहले बजट में इसका जिक्र हुआ था। अगस्त 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'पारदर्शी कराधान - ईमानदार का सम्मान', 21वीं सदी के टैक्स सिस्टम की नई व्यवस्था का लोकार्पण किया था। इस प्लेटफॉर्म में फेसलेस असेसमेंट, फेसलेस अपील और टैक्सपेयर्स चार्टर जैसे बड़े रिफॉर्म्स हैं। फेसलेस असेसमेंट और टैक्सपेयर्स चार्टर उसी दिन से लागू हो गए थे, जबकि फेसलेस अपील की सुविधा 25 सितंबर से उपलब्ध हुई।
कैसे काम करता है सिस्टम?
फेसलेस का अर्थ- करदाता कौन है और आयकर अधिकारी कौन है, उससे कोई मतलब नहीं होना चाहिए। पहले आयकर विभाग जांच करता था, लेकिन अब किसी भी राज्य का अधिकारी कहीं की भी जांच कर सकता है। ये सब भी तय होगा कि कौन सा टैक्स असेसमेंट कौन करेगा। साथ ही असेसमेंट से निकला रिव्यू किस अधिकारी के पास जाएगा, ये किसी को पता नहीं चलेगा। इससे आयकर अधिकारियों से जान पहचान बनाने और दबाव बनाने के हथकंडे नहीं चलेंगे। इतना ही नहीं, इस कदम से गैर जरूरी मुकदमेबाजी से भी बचा जा सकेगा।