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Scindia: सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम का आवंटन होगा, अंबानी-मित्तल की नीलामी की मांग पर मंत्री ये बोले

Thu, 07 Nov 2024 04:45 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 07 Nov 2024 04:45 PM IST
सार

सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम का आवंटन किया जाएगा, न कि नीलामी की जाएगी। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को यह साफ कर दिया। केंद्रीय मंत्री का रुख भारतीय अरबपति मुकेश अंबानी और सुनील मित्तल की मांग के विपरीत है। केंद्रीय मंत्री ने इस मसले पर क्या कहा, आइए जानें।

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In a win for Elon Musk, Scindia says no to spectrum auction pitch from Ambani, Mittal
ज्योतिरादित्य सिंधिया - फोटो : PTI

विस्तार

सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम का आवंटन किया जाएगा, न कि नीलामी की जाएगी। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को यह साफ कर दिया। केंद्रीय मंत्री का रुख भारतीय अरबपति मुकेश अंबानी और सुनील मित्तल की मांग के विपरीत है। वहीं सरकार के इस रुख से एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को फायदा मिल सकता है।

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सैटेलाइट ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम मुफ्त में नहीं दिया जाएगा: सिंधिया

सिंधिया ने पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि आवंटन के बावजूद, सैटेलाइट ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम मुफ्त में नहीं दिया जाएगा और दूरसंचार नियामक ट्राई इसके लिए कीमत तय करेगा। सिंधिया ने कहा, "प्रत्येक देश को अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) का पालन करना होगा, जो अंतरिक्ष या उपग्रहों में स्पेक्ट्रम के लिए नीति तैयार करने वाला संगठन है, और आईटीयू असाइनमेंट के आधार पर स्पेक्ट्रम दिए जाने के मामले में बहुत स्पष्ट रहा है। इसके अलावा, यदि आप आज दुनिया भर में देखें, तो मुझे एक भी ऐसा देश नहीं दिखता जो उपग्रह के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी करता हो।"

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जियो-एयरटेल सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को नीलामी के जरिए देने की कर रहे मांग

भारत डिजिटल प्रौद्योगिकी के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी, अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) का सदस्य है। मस्क की स्टारलिंक और अमेजन के प्रोजेक्ट कुइपर जैसे वैश्विक समकक्षों ने प्रशासनिक आवंटन का समर्थन किया है। अंबानी की रिलायंस जियो, स्पेक्ट्रम को नीलामी के माध्यम से आवंटित करने की जरूरत के बारे में मुखर रही है, ताकि उन पुराने ऑपरेटरों को समान अवसर प्रदान किया जा सके, जो एयरवेव्स खरीदते हैं और टेलीकॉम टावर जैसे बुनियादी ढांचे की स्थापना करते हैं। एयरटेल के मित्तल ने भी पिछले महीने एक कार्यक्रम में, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे, इस तरह के आवंटन के लिए बोली लगाने की ही आवश्यकता पर जोर दिया था।

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भारतीय दूरसंचार कंपनियों को प्रशासनिक आवंटन से क्या है दिक्कत?

जियो और मित्तल की भारती एयरटेल- जो क्रमशः भारत की सबसे बड़ी और दूसरी सबसे बड़ी ऑपरेटर हैं- का मानना है कि सरकार की ओर से पूर्व-निर्धारित मूल्य पर सैटेलाइट ब्रॉडबैंड एयरवेव देने से असमान प्रतिस्पर्धा का माहौल पैदा होगा, क्योंकि उन्हें (जियो और एयरटेल जैसी कंपनियों को) अपने स्थलीय वायरलेस फोन नेटवर्क के लिए स्पेक्ट्रम प्राप्त करने के लिए नीलामी में प्रतिस्पर्धा करनी होगी। दोनों कंपनियां सैटेलाइट ब्रॉडबैंड क्षेत्र में भी हिस्सेदारी के लिए होड़ में हैं। दूसरी ओर, एलन मस्क के नेतृत्व वाली स्टारलिंक वैश्विक प्रवृत्ति के अनुरूप लाइसेंसों के प्रशासनिक आवंटन की मांग कर रही है, क्योंकि वह दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते मोबाइल टेलीफोनी और इंटरनेट बाजार में प्रवेश करना चाहती है।

आवंटन से स्टारलिंक जैसी विदेशी कंपनियों को वॉयस और डेटा सेवाएं प्रदान करने की अनुमति मिलेगी

सिंधिया ने कहा कि दिसंबर में पारित दूरसंचार अधिनियम 2023 ने इस मामले को 'अनुसूची 1' में डाल दिया है, जिसका अर्थ है कि सैटकॉम स्पेक्ट्रम का आवंटन प्रशासनिक रूप से किया जाएगा। ऐसा आवंटन सरकार की ओर से तय की गई कीमत पर होगा और स्टारलिंक जैसी विदेशी कंपनियों को वॉयस और डेटा सेवाएं प्रदान करने की अनुमति देगा। अगर स्पेक्ट्रम की नीलामी की जाती, तो स्टारलिंक के लिए सेवाएं शुरू करना महंगा हो जाता। स्टारलिंक ने देश में परिचालन शुरू करने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। हालांकि, सिंधिया ने इस आवेदन के बारे में कोई संकेत नहीं दिया।

मंत्री ने कहा कि नियामक प्रक्रिया बहुत स्पष्ट और पारदर्शी है। उन्होंने बताया कि नया दूरसंचार अधिनियम पारित हो चुका है और सैटेलाइट स्पेक्ट्रम स्पष्ट रूप से अनुसूची एक का हिस्सा है। मंत्री ने कहा, "...और इसलिए, हम इस समय भारत में निवेश करने की इच्छा रखने वाली किसी भी संस्था के आवेदन पर विचार करने के लिए तैयार हैं। मुझे लगता है कि अभी केवल एक या दो लाइसेंस दिए गए हैं। और जो कोई भी भाग लेना चाहता है, भारत निश्चित रूप से उसका स्वागत करेगा।"

एलन मस्क ने जियो-एयरटेल की मांग को बताया था गलत 

पिछले महीने, मस्क ने एक्स पर एक पोस्ट में, सैटेलाइट ब्रॉडबैंड को आवंटित करने और नीलामी न करने पर सेक्टर नियामक ट्राई के परामर्श पत्र को दरकिनार करने की जियो की ओर से की गई मांग को "अभूतपूर्व" बताया था, और जब मित्तल ने प्रधानमंत्री की उपस्थिति में यह बात कही थी, तो उन्होंने पूछा था कि क्या स्टारलिंक को भारत में इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने की अनुमति देना "बहुत अधिक परेशानी" वाली बात थी।



यह शायद पहली बार था कि मस्क, जिनकी कुल संपत्ति 241 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, अंबानी, मित्तल और गौतम अदाणी की संयुक्त संपत्ति से भी अधिक है, ने भारतीय कंपनियों की ओर से की गई समान अवसर की मांग के खिलाफ सीधे तौर पर अपनी बात रखी थी। पेपाल के पीछे के दिमाग, टेस्ला व स्पेसएक्स के संस्थापक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) के वर्तमान मालिक मस्क, अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग दैनिक आधार पर विभिन्न विषयों पर अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए करते हैं।

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