अगर मैं मंत्री न होता, तो एयर इंडिया के लिए बोली लगाताः पीयूष गोयल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकार द्वारा कर्ज के बोझ के तले दबी सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया को बेचने की कवायद के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बड़ा बयान दिया है। गोयल ने दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच में गुरुवार को बोलते हुए कहा कि अगर वो मंत्री न होते तो फिर एयर इंडिया को खरीदने के लिए बोली लगा चुके होते।
खराब अर्थव्यवस्था को सही कर रही है सरकार
सरकारी कंपनियों जैसे कि एयर इंडिया, बीपीसीएल में विनिवेश को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में गोयल ने यह बात कही। गोयल ने कहा कि जब हमारी सरकार 2014 में पहली बार बनी थी, तब अर्थव्यवस्था सबसे खराब दौर में थी। उसके बाद कई कदम उठाए गये, ताकि इसको सुधारा जा सके। अगर सरकार अपनी कंपनियों का विनिवेश नहीं करेगी, तो उनकी कुछ वैल्यू नहीं रहती।
गोयल ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था फिर से तेजी के रास्ते पर चलने को तैयार है। देश में निवेश करने को लेकर निवेशकों में काफी उत्साह है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा, "चीजें एक बार फिर से बेहतर होने लगी हैं और अब अर्थव्यवस्था यहां से तेजी से आगे बढ़ने की तैयारी में है।"
एयर इंडिया के दुनियाभर में कुछ बेहतरीन द्विपक्षीय समझौते हैं। दक्ष और बेहतर ढंग से व्यवस्थित एअर इंडिया के पास काफी अच्छे विमान हैं इस लिहाज से यह किसी सोने की खान से कम नहीं है। यहां द्विपक्षीय से तात्पर्य दो देशों के बीच ऐसे समझौते से हैं, जो एक-दूसरे की एयरलाइन कंपनियों को सीटों की एक निश्चित संख्या के साथ सेवाएं संचालित करने की अनुमति देता है।
भारत आज एक ऐसा देश है, जहां आपके पास समान अवसर है, आप ईमानदारी के साथ काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि बैंकों के खुद के आय- व्यय खातों को ठीकठाक करना और बैंकों को मजबूत बनाना एक अच्छा काम है।
आरबीआई उठा रही है कदम
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में फंसे कर्ज और अन्य समस्याओं को ठीक करने के लिए कई कदम उठाए हैं। गोयल ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि कमरे में बैठे हर व्यक्ति के मन में ऐसी कोई छवि नहीं होगी जहां वह मानता होगा कि सार्वजनिक बैंकों ने अच्छा काम नहीं किया।
दुनिया भर की या फिर अगर मैं दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का उदाहरण लूं तो 2008-09 में अर्थव्यवस्था धराशायी हो गई थी। आर्थिक पतन का कारण सरकारी बैंक नहीं बल्कि निजी बैंक थे। भारत में हमारे पास पर्याप्त निजी बैंक हैं, जिन्होंने हमारे के लिए कोई गौरव का काम नहीं किया। इसके विपरीत, यदि आप मुझसे सरकारी बैंकों के बारे में पूछे तो इन बैंकों ने राष्ट्र सेवा में काफी कुछ किया है।"
निवेशकों में निवेश के लिए उत्साह
गोयल ने कहा कि भारत में निवेश करने को लेकर निवेशकों में काफी उत्साह है। उन्होंने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते पर कहा कि यह एक "असंतुलित व्यापार समझौता" था , जो कि आरसीईपी के उन सिद्धांतों पर खरा नहीं उतर रहा था जिनको लेकर आठ साल पहले हमने बात शुरू की थी। सरकार मुक्त व्यापार समझौते पर ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत करेगी। ब्रिटेन जनवरी के आखिर तक यूरोपीय संघ से अलग हो जाएगा।