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अगस्त से अप्रैल में डाटा चोरी से भारतीय कंपनियों को औसतन 14 करोड़ का नुकसान: IBM
Wed, 29 Jul 2020 01:22 PM IST
डिंपल अलवधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Wed, 29 Jul 2020 01:22 PM IST
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IBM
- फोटो : pixabay
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भारत में अगस्त 2019 से लेकर अप्रैल 2020 के बीच विभिन्न संगठनों के डाटा में सेंध लगने से उन्हें औसतन 14 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। आईबीएम की बुधवार को जारी रिपोर्ट में यह कहा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आंकड़ों की चोरी अथवा उनमें सेंध लगाने के जितने भी हमले हुए हैं उनमें से 53 फीसदी दुर्भावना के साथ किए गए।
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2019 की लागत के मुकाबले 9.4 फीसदी अधिक
वहीं सिस्टम में होने वाली गड़बड़ियों का इसमें 26 फीसदी और 21 फीसदी मानव गलती का योगदान रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 'वर्ष 2020 के अध्ययन में डाटा सेंध के मामलों में औसतन लागत 14 करोड़ रुपये रही है। यह 2019 की लागत के मुकाबले 9.4 फीसदी अधिक है। 2020 के अध्ययन में प्रत्येक नुकसान अथवा चोरी रिकार्ड की 5,522 रुपये लागत रही, यह 2019 के मुकाबले 10 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है।'
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रिपोर्ट के मुताबिक डाटा चोरी की पहचान करने का औसत समय 221 दिन से बढ़कर 230 दिन और इसे नियंत्रित करने का औसत समय 77 से बढ़कर 83 दिन हो गया।
भारत में साइबर अपराध के तरीकों में बदलाव
आईबीएम इंडिया एवं दक्षिण एशिया के सॉफ्टवेयर सुरक्षा लीडर प्रशांत भटकल ने एक वक्तव्य में कहा, 'भारत में साइबर अपराध के तौर तरीकों में बदलाव देखा जा रहा है। यह अब पूरी तरह से संगठित और गठबंधन बनाकर हो रहा है कि भारत में नकल अथवा धोखे में डालकर, सोशल इंजीनिरिंग के जरिए कई तरह से हमले किए जा रहे हैं।'
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डाटा में सेंध लगाने की घटनाओं से भारतीय कंपनियों को 2019 में 12.8 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत भी वहन करनी पड़ी। भटकल ने कहा है कि कंपनियां साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक हुई हैं और इसके समाधान की महत्ता को समझती हैं लेकिन हमें पिछले साल के मुकाबले डाटा चोरी अथवा इसमें सेंध लगाने के मामले में लागत 9.4 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। इसके साथ ही जिन्होंने सुरक्षा ऑटोमेशन की व्यवस्था की है वह सेंध के मामलों का उनके मुकाबले जिनकी कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है 27 फीसदी तेजी के साथ पता लगाकर उसे नियंत्रित कर सकेंगे।