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उन्नत किस्म विकसित: देश में ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक के खतरों को कम करने वाले सरसों का होगा उत्पादन

Sun, 10 Oct 2021 02:19 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 10 Oct 2021 02:19 AM IST
सार

राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ नरेंद्र सिंह ने बताया सरसों के तेल में हानिकारक वसा वाले अम्ल इस किस्म में न के बराबर हैं। यह बीज पौष्टिकता के साथ ही स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहतर है। इसमें कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाले इरुसिक एसिड की मात्रा और ग्लूकोसिनोट्स की मात्रा अमूमन सामान्य सरसों के बीज में पाए जाने वाले मानकों से काफी कम हैं।

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IARI Pusa developed Mustard variety 0031 Will reduce the risk of blood pressure and heart attack
Indian Agricultural Research Institute - फोटो : IARI

विस्तार

ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक के खतरों को कम करने वाली सरसों की उन्नत किस्म पूसा ‘0031’ इस साल बंपर उपज देगी। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर किसानों को सरसों की ‘0031’ किस्म की बीज उपलब्ध कराए गए हैं। राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ नरेंद्र सिंह ने बताया सरसों के तेल में हानिकारक वसा वाले अम्ल इस किस्म में न के बराबर हैं। इसलिए इसका रकबा साल दर साल बढ़ाना तय माना जाना चाहिए। 

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पिछले साल देश में 70 लाख हेक्टेयर में सरसों की खेती हुई थी। इस बार लगभग 10,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर सरसों के इस बीज का प्रयोग किसानों द्वारा किए जाने का संभावना है। हालांकि पीएम ने हाल ही में इसकी उन्नत किस्म पूसा मस्टर्ड ‘0033’ को भी विकसित कर राष्ट्र को समर्पित किया है। लेकिन यह उत्पादन के लिए अगले साल से बाजार में उपलब्ध होगा। 
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पौष्टिकता के साथ ही स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर
यह बीज पौष्टिकता के साथ ही स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहतर है। इसमें कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाले इरुसिक एसिड की मात्रा और ग्लूकोसिनोट्स की मात्रा अमूमन सामान्य सरसों के बीज में पाए जाने वाले मानकों से काफी कम हैं। जहां सामान्य सरसों बीज में इरुसिक एसिड की मात्रा 45 फीसदी और ग्लूकोसिनोट्स की मात्रा 120 पीपीएम(पार्ट्स ऑफ मिलियन) होती है, वहीं सरसों की ‘0031’ किस्म में इन दोनों तत्वों की मात्रा को बेहद कम किया गया है।
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इसमें इरुसिक एसिड की मात्रा को दो फीसदी और ग्लूकोसिनोट्स की मात्रा को 30 पीपीएम किया गया है, जबकि अच्छे वसा तत्वों जैसे ओलिक एसिड, लिनोलिक एसिड की मात्रा इसमें बढ़ी है, जिससे इस सरसों के बीज से निकलने वाला तेल हर लिहाज से बेहतर और प्रति हेक्टेयर अधिक उपज देने वाला भी है। इसके अलावा सल्फर कम होने के कारण तेल से झांस और तीखी महक भी कम होती है।

किसान बीज को सीधे पूसा से प्राप्त कर सकते हैं
डॉ. एके सिंह ने अमर उजाला को बताया कि केवल यूपी, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक सीमित रहने की वजह, बीज का उत्तर पश्चिम भारत के लिए मुफीद होना है। इसलिए यहां के किसानों को बीज देने के लिए छह कंपनियों के साथ अनुबंध करके उत्पादन की अनुमति है। इसके अलावा पूसा से भी इसे किसान सीधे प्राप्त कर सकता है। डॉ. सिंह ने बताया कि इस किस्म को विकसित करने में आठ वर्ष की कड़ी मशक्कत लगी है। 


डबल जीरो फायदेमंद 
सरसों की जिन किस्मों में इरुसिक अम्ल दो फीसदी से कम होता है, ग्लुकोसिनोट्स तीस माइक्रोमोल से कम होता है। उन्हें डबल जीरो कहा जाता है, इसे कनोला ऑयल का नाम देकर विदेशों से ऊंची कीमतों पर आयात किया जाता है। इस किस्म को 2017 में ही राष्ट्र को समर्पित किया गया था, लेकिन पिछले दो साल से कोरोना संक्रमण की मार के चलते इस साल ही इसके व्यावसायिक प्रयोग को सुव्यवस्थित किया गया है।

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