Biz Updates: ह्यूंदै मोटर इंडिया को एमएससीआई इंडिया सूचकांक में मिलेगी जगह, अदाणी ग्रीन होगी बाहर
ह्यूंदै मोटर इंडिया लिमिटेड को एमएससीआई इंडिया सूचकांक में शामिल किया जाएगा जबकि अदाणी ग्रीन एनर्जी इससे बाहर होगी। सूचकांक संकलक एमएससीआई की घोषणा के अनुसार, एमएससीआई वैश्विक मानक सूचकांक के घटकों में परिवर्तन 28 फरवरी 2025 से प्रभावी होंगे।
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ह्यूंदै मोटर इंडिया लिमिटेड को एमएससीआई इंडिया सूचकांक में शामिल किया जाएगा जबकि अदाणी ग्रीन एनर्जी इससे बाहर होगी। सूचकांक संकलक एमएससीआई की घोषणा के अनुसार, एमएससीआई वैश्विक मानक सूचकांक के घटकों में परिवर्तन 28 फरवरी 2025 से प्रभावी होंगे। एमएससीआई वैश्विक निवेश समुदाय के लिए महत्वपूर्ण निर्णय समर्थन उपकरण व सेवाओं का अग्रणी प्रदाता है। एमएससीआई ग्लोबल स्मॉल कैप सूचकांक में 19 कंपनियों को जोड़ा जाएगा, जबकि 19 कंपनियां 28 फरवरी से बाहर हो जाएंगी।
कोलकाता: बंगाल विधानसभा में FY2026 के लिए 3.89 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश
पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बुधवार को 2025-26 के लिए राज्य का बजट पेश किया, जो 3.89 लाख करोड़ रुपये का है। इसमें सामाजिक कल्याण, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है।
सरकार ने अपने बजट में बुनियादी ढांचे और कृषि विकास परियोजनाओं की एक श्रृंखला का अनावरण किया है, जिसमें ग्रामीण संपर्क, नदी कटाव नियंत्रण और कृषि सहायता पहलों के लिए महत्वपूर्ण धनराशि आवंटित की गई है। एक महत्वपूर्ण घोषणा में भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य सरकार 1 अप्रैल, 2025 से महंगाई भत्ते (डीए) में चार प्रतिशत की वृद्धि करेगी। इससे राज्य कर्मचारियों के लिए कुल महंगाई भत्ता 18 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे बढ़ती महंगाई के बीच उन्हें काफी राहत मिलेगी।
आरबीआई ने कोटक महिंद्रा बैंक पर लगे प्रतिबंध हटाए, बैंक नए क्रेडिट कार्ड जारी कर सकेगा
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कोटक महिंद्रा बैंक पर नौ महीने पुराने प्रतिबंध हटा दिए। जिससे उसे अपने ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग चैनलों के माध्यम से नए ग्राहकों को जोड़ने की अनुमति मिल गई। रिजर्व बैंक ने निजी क्षेत्र के इस ऋणदाता को नये क्रेडिट कार्ड जारी करने की भी अनुमति दे दी।
अप्रैल 2024 में आरबीआई ने ऋणदाता को अपने ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग चैनलों के माध्यम से नए ग्राहकों को जोड़ने और नए क्रेडिट कार्ड जारी करने से बचने का निर्देश दिया था। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को एक बयान में कहा कि इसके बाद बैंक ने पर्यवेक्षी चिंताओं को दूर करने के लिए सुधारात्मक उपाय शुरू किए और भारतीय रिजर्व बैंक को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की। बैंक ने अनुपालन को मान्य करने के लिए आरबीआई की पूर्व अनुमति से एक एक्सटर्नल ऑडिट जांच भी शुरू की।
औद्योगिक उत्पादन बढ़ने की रफ्तार घटकर तीन माह के निचले स्तर पर
खनन और विनिर्माण क्षेत्रों के खराब प्रदर्शन से देश का औद्योगिक उत्पादन दिसंबर, 2024 में 3.2 फीसदी की दर से ही बढ़ा, जो इसका तीन माह का निचला स्तर है। इससे पहले सितंबर में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर सबसे कम 3.2 फीसदी रही थी, जबकि दिसंबर, 2023 में यह 4.4 फीसदी बढ़ा था।
इसके साथ ही सरकार ने नवंबर, 2024 के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) आंकड़े को भी संशोधित कर पांच फीसदी कर दिया है। पिछले महीने जारी अस्थायी अनुमान में इसे 5.2 फीसदी बताया गया था। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के मुताबिक, दिसंबर, 2024 में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन तीन फीसदी बढ़ा, जो एक साल पहले की समान अवधि के 4.6 फीसदी से कम है। खनन क्षेत्र की वृद्धि दर 5.2 फीसदी से घटकर 2.6 फीसदी रह गई। बिजली, निर्माण/बुनियादी ढांचा, प्राथमिक और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है।
देश में 2030 तक 60 फीसदी बढ़ेगी प्राकृतिक गैस की खपत
देश में प्राकृतिक गैस की खपत 2030 तक 60 फीसदी बढ़ जाएगी। इस मांग को पूरा करने के लिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का दोगुना आयात करना पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने कहा, तेज शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण भारत के ऊर्जा बाजार में बदलाव देखने को मिलेगा। इससे दशक के अंत तक और संभवतः उससे आगे गैस की मांग बढ़ेगी। हालांकि, इस दौरान घरेलू उत्पादन मांग की तुलना में बहुत धीमी गति से बढ़ने का अनुमान है, जिससे प्राकृतिक गैस का आयात बढ़ाना पड़ेगा। एजेंसी ने कहा, एक दशक की धीमी वृद्धि और समय-समय पर गिरावट के बाद भारत की प्राकृतिक गैस की मांग पिछले दो वर्षों में 10 फीसदी से अधिक बढ़ गई है। 2030 तक भारत की गैस मांग बढ़कर 103 अरब क्यूबिक मीटर (बीसीएम) प्रति वर्ष हो जाएगी। अगर सरकार इस क्षेत्र के लिए अतिरिक्त नीतिगत सहायता देती है, तो 2030 तक सालाना मांग 120 बीसीएम तक पहुंच सकती है।
घरेलू उत्पादन में 8 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान
एजेंसी के मुताबिक, 2030 तक भारत का घरेलू गैस उत्पादन 8 फीसदी बढ़कर 38 बीसीएम प्रति वर्ष होने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि भारत को दशक के अंत तक सालाना आयात दोगुना कर लगभग 65 बीसीएम करना होगा।