कितने भारतीयों ने छुपा रखा है स्विस बैंकों में काला धन, अब जल्द लगेगा पता, सरकार को मिली बड़ी सफलता
काले धन को लेकर के देश भर में बड़ी बहस छिड़ी हुई है। खासतौर पर स्विस बैंकों में कितने भारतीयों ने अपना काला धन छुपा रखा है, उसकी सही जानकारी सरकार के पास भी नहीं है। कई सालों से आकलन चल रहा है कि अरबों रुपया इन बैंकों में भारतीयों ने जमा कर रखा है।
अब जल्द मिलेगी जानकारी
स्विट्जरलैंड की सुप्रीम कोर्ट ने स्विस सरकार को अगले 10 दिनों में भारत सरकार के साथ जानकारी साझा करने के लिए कहा है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि एचएसबीसी बैंक भारत सरकार को इस बात की जानकारी दे।
भारत के पास नहीं है आंकड़ा
वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया कि विदेश में कितना कालाधन है, इसका कोई सरकारी आंकड़ा नहीं है। लेकिन एचएसबीसी में जिन भारतीयों के खातों की जानकारी मिली है, उनसे 8,448 करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता चला। इन्हें 5,447 करोड़ का टैक्स नोटिस भेजा गया है। 164 मामलों में 1,290 करोड़ की पेनल्टी लगाई गई है। 84 मामलों में 199 केस भी दर्ज किए गए हैं।
पनामा पेपर्स में 426 लोगों के खिलाफ जानकारी
पनामा पेपर्स के बारे में गोयल ने कहा कि इसमें 426 लोगों की जानकारी थी। अभी तक 50 मामलों में जब्ती और 12 में सर्वे की कार्रवाई हुई है। कालाधन कानून के तहत 16 मामले दर्ज किए गए हैं और 1,532.88 करोड़ रुपये के अघोषित विदेशी निवेश का पता चला है।
भारतीयों के हैं 7 हजार करोड़ से अधिक जमा
स्विस बैंकों में भारतीयों के 7,000 करोड़ रुपये जमा है। 2011 में फ्रांस ने एचएसबीसी में 628 खातों की जानकारी दी। मई 2012 के श्वेतपत्र के अनुसार स्विस बैंकों में 2010 में भारतीयों के 9,295 करोड़ रुपये जमा था। 2015 में भारतीय मीडिया में एचएसबीसी की जिनेवा ब्रांच में 1,195 भारतीय खाताधारकों की सूची प्रकाशित हुई। इनमें 25,420 करोड़ रुपए जमा थे।
शेल कंपनियों के खिलाफ 98% सटीक कार्रवाई
सरकार ने 2.2 लाख शेल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन खत्म किया था। गोयल ने बताया कि इनमें से सिर्फ 5,000 ने जवाब दिया कि उनका कारोबार वैध है। यानी सरकार की कार्रवाई 98% सटीक थी।
चार साल में रिटर्न फाइल करने वाले 50% बढ़े
गोयल ने कहा, 4 साल में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले 50% बढ़ गई है। वहीं बजट दस्तावेजों के मुताबिक 2013-14 से 2017-18 के दौरान आयकर संग्रह 2.41 लाख करोड़ से बढ़कर 4.41 लाख करोड़ हो गया था।