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मकानों की बिक्री 50 फीसदी बढ़ी, नकदी संकट से धीमी पड़ी रफ्तार
Wed, 26 Dec 2018 02:39 AM IST
गौरव द्विवेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Wed, 26 Dec 2018 02:39 AM IST
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सुधार के संकेतों के साथ 2018 में रीयल एस्टेट क्षेत्र में मकानों की बिक्री 50 फीसदी बढ़ी है। मकानों की बिक्री में यह तेजी देश के प्रमुख शहरों में 2018 में किफायती फ्लैट की मांग में बढ़ोतरी व स्थिर कीमतों के कारण आई है। हालांकि साल के अंत में तरलता तंगी के कारण मजबूत वृद्धि की आशा कमजोर हुई है। साथ ही इससे मकान खरीदारों के बीच देर से डिलिवरी की चिंता दिखी।
नोटबंदी, जीएसटी लागू होने व कठोर मानकों के तीन तरफा प्रहार के बाद रीयल एस्टेट क्षेत्र में काफी सुधार आया है। प्रॉपर्टी डीलरों और परामर्शदाताओं के अनुसार, अगले साल आम चुनावों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के नकदी संकट कारण मकान बिक्री में 2019 की पहली छमाही में सुस्ती आ सकती है। हालांकि, यदि निर्माणाधीन फ्लैटों पर जीएसटी की दरें 12 फीसदी से घटाकर कम करने की अनुमति दी जाती है तो दूसरी छमाही में बिक्री में तेजी आ सकती है। एनबीएफसी की नकदी स्थिति में सुधार भी जरूरी है, क्योंकि ये कंपनियां बड़े पैमाने पर रीयल एस्टेट क्षेत्र का वित्त पोषण करती हैं।
किफायती मकान नया मूलमंत्र
किफायती मकान रीयल एस्टेट के लिए नया वरदान साबित हुए हैं। इनसे 2016 में नोटबंदी व 2017 में रेरा और जीएसटी जैसे दो नए कानून आने से अपने निचले स्तर पर पहुंच चुके क्षेत्र को धीरे-धीरे उबरने में मदद मिली। जेएलएल इंडिया के अनुसार, 2018 में सात प्रमुख शहरों में आवास बिक्री में 47 फीसदी की बढ़त हुई है। एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार सात शहरों में मकानों की बिक्री 16 फीसदी बढ़ी, जबकि प्रोपटाइगर ने नौ शहरों में मकानों की बिक्री में 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है। रहने के लिए तैयार घरों पर जीएसटी न लगने व कोई वित्तीय जोखिम न होने से उनकी मांग में तेजी आई है। फ्लैट की कीमतें अभी स्थिर हैं और उनमें अभी बढ़ोतरी होने की उम्मीद कम है। अगर इनकी मांग बढ़ती भी है तो अधिक आपूर्ति के कारण इनकी कीमतों में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।
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नोटबंदी, जीएसटी लागू होने व कठोर मानकों के तीन तरफा प्रहार के बाद रीयल एस्टेट क्षेत्र में काफी सुधार आया है। प्रॉपर्टी डीलरों और परामर्शदाताओं के अनुसार, अगले साल आम चुनावों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के नकदी संकट कारण मकान बिक्री में 2019 की पहली छमाही में सुस्ती आ सकती है। हालांकि, यदि निर्माणाधीन फ्लैटों पर जीएसटी की दरें 12 फीसदी से घटाकर कम करने की अनुमति दी जाती है तो दूसरी छमाही में बिक्री में तेजी आ सकती है। एनबीएफसी की नकदी स्थिति में सुधार भी जरूरी है, क्योंकि ये कंपनियां बड़े पैमाने पर रीयल एस्टेट क्षेत्र का वित्त पोषण करती हैं।
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किफायती मकान नया मूलमंत्र
किफायती मकान रीयल एस्टेट के लिए नया वरदान साबित हुए हैं। इनसे 2016 में नोटबंदी व 2017 में रेरा और जीएसटी जैसे दो नए कानून आने से अपने निचले स्तर पर पहुंच चुके क्षेत्र को धीरे-धीरे उबरने में मदद मिली। जेएलएल इंडिया के अनुसार, 2018 में सात प्रमुख शहरों में आवास बिक्री में 47 फीसदी की बढ़त हुई है। एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार सात शहरों में मकानों की बिक्री 16 फीसदी बढ़ी, जबकि प्रोपटाइगर ने नौ शहरों में मकानों की बिक्री में 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है। रहने के लिए तैयार घरों पर जीएसटी न लगने व कोई वित्तीय जोखिम न होने से उनकी मांग में तेजी आई है। फ्लैट की कीमतें अभी स्थिर हैं और उनमें अभी बढ़ोतरी होने की उम्मीद कम है। अगर इनकी मांग बढ़ती भी है तो अधिक आपूर्ति के कारण इनकी कीमतों में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।
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कम नहीं हुईं खरीदारों की दिक्कतें
रीयल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से बनाया गया रीयल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट यानी रेरा कानून के आने में थोड़ा लंबा वक्त लगा, जिसके तहत अब तक लगभग 35,000 रीयल एस्टेट परियोजनाएं पंजीकृत हो चुकीं है। लेकिन आम्रपाली, जेपी समूह व यूनीटेक जैसी
डिफॉल्टर कंपनियों की परियोजनाओं में फंसे लाखों मकान खरीदारों की चिंताएं कम नहीं हो रही हैं। न्यायालय व एनसीएलटी की ओर से खरीदारों को राहत देने की राहत कोशिश भी अनिर्णायक रही है। हालांकि, इन खरीदारों को नए वर्ष में राहत मिल सकती है।
व्यावसायिक रीयल एस्टेट क्षेत्र भी बढ़ा
आवास क्षेत्र की तरह 2018 में व्यावसायिक रीयल एस्टेट क्षेत्र में भी कार्यालय, रीटेल व लॉजिस्टिक संपत्तियों को किराए पर लेने व उन पर निवेश बढ़ने से सुधार आया है। जेएलएल इंडिया के अनुसार इस वर्ष कार्यालयों के लिए जगह किराए पर लेने के मामलों में 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद यह आंकड़ा 3.33 करोड़ वर्ग फुट जा पहुंचा। किफायती मकानों की तरह कार्यालय बाजार में को-वर्किंग मूलमंत्र रहा। बड़े कॉरपोरेट द्वारा नए स्टार्टअप्स के साथ मिलकर कार्यालय की जगह साझा करने से इस क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई। कार्यलय के लिए किराए पर जगह लेने के 2018 के कुल मामलों में से साझे तौर पर कार्यालय लेने का योगदान 10 फीसदी से अधिक रहा।
रीयल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से बनाया गया रीयल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट यानी रेरा कानून के आने में थोड़ा लंबा वक्त लगा, जिसके तहत अब तक लगभग 35,000 रीयल एस्टेट परियोजनाएं पंजीकृत हो चुकीं है। लेकिन आम्रपाली, जेपी समूह व यूनीटेक जैसी
डिफॉल्टर कंपनियों की परियोजनाओं में फंसे लाखों मकान खरीदारों की चिंताएं कम नहीं हो रही हैं। न्यायालय व एनसीएलटी की ओर से खरीदारों को राहत देने की राहत कोशिश भी अनिर्णायक रही है। हालांकि, इन खरीदारों को नए वर्ष में राहत मिल सकती है।
व्यावसायिक रीयल एस्टेट क्षेत्र भी बढ़ा
आवास क्षेत्र की तरह 2018 में व्यावसायिक रीयल एस्टेट क्षेत्र में भी कार्यालय, रीटेल व लॉजिस्टिक संपत्तियों को किराए पर लेने व उन पर निवेश बढ़ने से सुधार आया है। जेएलएल इंडिया के अनुसार इस वर्ष कार्यालयों के लिए जगह किराए पर लेने के मामलों में 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद यह आंकड़ा 3.33 करोड़ वर्ग फुट जा पहुंचा। किफायती मकानों की तरह कार्यालय बाजार में को-वर्किंग मूलमंत्र रहा। बड़े कॉरपोरेट द्वारा नए स्टार्टअप्स के साथ मिलकर कार्यालय की जगह साझा करने से इस क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई। कार्यलय के लिए किराए पर जगह लेने के 2018 के कुल मामलों में से साझे तौर पर कार्यालय लेने का योगदान 10 फीसदी से अधिक रहा।
उतार-चढ़ाव भरा रहा 2018
एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि सभी श्रेणियों में सुधार के संकेतों के बावजूद 2018 रीयल एस्टेट के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। हालांकि नकदी संकट ने सभी संबद्ध पक्षों को चिंतित किया। वहीं औद्योगिक संगठन क्रेडाई के प्रेसिडेंट जक्षय शाह ने कहा कि 2018 में यह क्षेत्र राख से अचंभे की तरह उठकर अलग स्तर पर चला गया। मेरा अनुमान है कि नीतिगत सुधारों के बाद ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी से निरंतर इस क्षेत्र में विकास होगा।
एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि सभी श्रेणियों में सुधार के संकेतों के बावजूद 2018 रीयल एस्टेट के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। हालांकि नकदी संकट ने सभी संबद्ध पक्षों को चिंतित किया। वहीं औद्योगिक संगठन क्रेडाई के प्रेसिडेंट जक्षय शाह ने कहा कि 2018 में यह क्षेत्र राख से अचंभे की तरह उठकर अलग स्तर पर चला गया। मेरा अनुमान है कि नीतिगत सुधारों के बाद ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी से निरंतर इस क्षेत्र में विकास होगा।